NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Kshitij 2) अध्याय 6: संगतकार

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) के अध्याय 6 ‘संगतकार’ (कवि – मंगलेश डबराल) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के विस्तृत उत्तर, कविता का सार, मूलभाव, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ एवं अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड) अध्याय: 6 कवि: मंगलेश डबराल विधा: कविता सत्र: 2026–27

कवि परिचय – मंगलेश डबराल

मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के काफलपानी गाँव में हुआ और शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई। दिल्ली आकर उन्होंने ‘हिंदी पैट्रियट’, ‘प्रतिपक्ष’ तथा ‘आसपास’ में काम किया और भोपाल में भारत भवन से प्रकाशित ‘पूर्वग्रह’ में सहायक संपादक रहे। बाद में वे ‘जनसत्ता’ अखबार में साहित्य संपादक तथा नेशनल बुक ट्रस्ट से भी जुड़े रहे। उनके चार कविता-संग्रह प्रकाशित हुए – पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं और आवाज़ भी एक जगह है। साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा पहल सम्मान से सम्मानित मंगलेश डबराल की ख्याति एक श्रेष्ठ अनुवादक के रूप में भी है। उनकी कविताओं की भाषा पारदर्शी तथा सौंदर्यबोध सूक्ष्म है। सन् 2020 में उनका निधन हुआ।

कविता का सार

‘संगतकार’ मंगलेश डबराल की एक मार्मिक कविता है, जो संगीत के मंच पर मुख्य गायक का साथ देने वाले उस गुमनाम सहयोगी – संगतकार – के महत्त्व पर विचार करती है। कवि बताते हैं कि मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी और गंभीर स्वर के साथ एक दूसरी आवाज़ भी सुनाई देती है, जो सुंदर तो है पर कमज़ोर और काँपती हुई है। यह आवाज़ संगतकार की है – वह मुख्य गायक का छोटा भाई, उसका शिष्य या पैदल चलकर सीखने आने वाला कोई दूर का रिश्तेदार हो सकता है।

कवि कहते हैं कि संगतकार अपनी गूँज को मुख्य गायक की गरज में प्राचीन काल से मिलाता आया है। जब गायक अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो जाता है या अपने ही सरगम को लाँघकर भटकता हुआ अनहद में चला जाता है, तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है। वह मुख्य गायक के पीछे छूटे हुए सामान को समेटने और उसे उसका बचपन याद दिलाने जैसा काम करता है। जब तार सप्तक की ऊँचाई पर गायक का गला बैठने लगता है, उत्साह अस्त होने लगता है और आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरने लगता है, तभी कहीं से संगतकार का स्वर आकर मुख्य गायक को ढाढ़स बँधाता है।

संगतकार कभी-कभी यों ही गायक का साथ देता है, केवल यह जताने के लिए कि वह अकेला नहीं है और गीत फिर से गाया जा सकता है। वह जानबूझकर अपने स्वर को ऊँचा नहीं उठाता और गाए जा चुके राग को धीरे-धीरे दोहराता रहता है। कवि अंत में कहते हैं कि उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है और अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है, उसे विफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। इस प्रकार कविता हर सफलता के पीछे खड़े गुमनाम सहयोगियों के योगदान और उनकी विनम्रता को सम्मान देती है।

मूलभाव / केंद्रीय भाव

इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि किसी भी क्षेत्र में – संगीत, नाटक, फ़िल्म, नृत्य, खेल या समाज और इतिहास में – जब कोई व्यक्ति शिखर तक पहुँचता है, तो उसके पीछे अनेक गुमनाम सहयोगियों का योगदान छिपा होता है। संगतकार इन्हीं अनाम सहयोगियों का प्रतीक है। कवि बताते हैं कि संगतकार का सामने न आना, अपने स्वर को ऊँचा न उठाना उसकी कमज़ोरी या विफलता नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और मनुष्यता है। कविता यह संवेदनशीलता विकसित करती है कि हमें प्रत्येक सहयोगी के मौन योगदान का आदर करना चाहिए।

शब्द-संपदा (शब्दार्थ)

शब्दअर्थ
संगतकारमुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने वाला कलाकार, सहयोगी
गरजऊँची, गंभीर आवाज़
अंतरास्थायी या टेक को छोड़कर गीत का चरण
जटिलकठिन, उलझा हुआ
तानसंगीत में स्वर का विस्तार
नौसिखियाजिसने अभी सीखना आरंभ किया हो
राख जैसा कुछ गिरता हुआबुझता हुआ (कमज़ोर पड़ता हुआ) स्वर
ढाढ़स बँधानातसल्ली देना, सांत्वना देना
स्थायीगीत का मुख्य पद या टेक जो बार-बार दोहराया जाता है
सरगमसंगीत के सात स्वर – सा, रे, ग, म, प, ध, नि
तारसप्तकमध्य सप्तक से ऊपर का सप्तक (बहुत ऊँची ध्वनि)
अनहदजिसकी कोई सीमा न हो; असीम, अनंत नाद
गूँजप्रतिध्वनि, स्वर की अनुगूँज
हिचकझिझक, संकोच
विफलताअसफलता
मनुष्यतामानवीयता, इंसानियत
प्रेरणाउत्साह बढ़ाने वाली शक्ति, उत्प्रेरणा
उत्साह अस्त होनाजोश/उमंग का समाप्त होने लगना

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

1. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?

उत्तरसंगतकार के माध्यम से कवि उन गुमनाम, सहयोगी और पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाहते हैं, जो किसी की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हुए भी स्वयं अनाम रह जाते हैं।ये वे लोग हैं जो मुख्य व्यक्ति को संकट के समय सँभालते हैं, उसका उत्साह बढ़ाते हैं, पर श्रेय और प्रसिद्धि नहीं चाहते।वे विनम्र होते हैं और जानबूझकर स्वयं को आगे नहीं रखते; उनका यह त्याग और सहयोग ही उनकी मनुष्यता है।

2. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?

उत्तरसंगतकार जैसे सहयोगी व्यक्ति लगभग हर क्षेत्र में दिखाई देते हैं, जैसे –(क) फ़िल्म में मुख्य अभिनेता के पीछे निर्देशक, पटकथा-लेखक, कैमरामैन, संगीतकार, सहायक कलाकार आदि।(ख) नाटक एवं नृत्य में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगी, साज़िंदे और सहायक कलाकार।(ग) खेल में कोच, फ़िज़ियो और अन्य खिलाड़ी जो टीम-नायक की जीत में सहायता करते हैं।(घ) राजनीति, समाज एवं इतिहास में नेता या नायक की सफलता के पीछे असंख्य कार्यकर्ता एवं अनुयायी।इनके अतिरिक्त किसी भी संस्था, परिवार या आंदोलन की सफलता में पर्दे के पीछे रहकर श्रम करने वाले अनेक लोग संगतकार की भूमिका निभाते हैं।

3. संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?

उत्तरसंगतकार अनेक रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं –(क) मुख्य गायक के भारी स्वर के साथ अपनी गूँज मिलाकर उसके स्वर को और प्रभावशाली बनाते हैं।(ख) जब गायक जटिल तानों में खो जाता है या भटक जाता है, तब वे स्थायी (मुख्य पंक्ति) को सँभाले रखते हैं, जिससे गायक पुनः उसी पर लौट सके।(ग) तार सप्तक की ऊँचाई पर जब गायक का गला बैठने लगता है और उत्साह कम होने लगता है, तब वे अपने स्वर से उसे ढाढ़स बँधाते हैं।(घ) वे गायक को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह अकेला नहीं है और गीत फिर से गाया जा सकता है।

4. भाव स्पष्ट कीजिए— और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है उसे विफलता नहीं उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

उत्तरइन पंक्तियों में कवि संगतकार की विनम्रता को सम्मान देते हैं। संगतकार की आवाज़ में जो हिचक या झिझक सुनाई देती है, वह उसकी कमज़ोरी नहीं है।वह जानबूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता, ताकि मुख्य गायक का महत्त्व बना रहे और वह स्वयं छाया में रहे।कवि कहना चाहते हैं कि संगतकार का सामने न आना और स्वर को दबाए रखना उसकी विफलता या हार नहीं, बल्कि उसकी महानता, उदारता और मनुष्यता है – यही गुण उसे श्रेष्ठ बनाता है।

5. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तरयह कथन पूर्णतः सत्य है कि किसी भी व्यक्ति की प्रसिद्धि के पीछे अनेक लोगों का अदृश्य योगदान होता है।उदाहरण – किसी क्रिकेट खिलाड़ी की सफलता केवल उसकी अपनी प्रतिभा से नहीं मिलती; उसके पीछे कोच का परिश्रम, माता-पिता का त्याग, अन्य खिलाड़ियों का सहयोग तथा फ़िज़ियो व सहयोगी स्टाफ़ की मेहनत होती है।इसी प्रकार किसी फ़िल्म-अभिनेता की प्रसिद्धि के पीछे निर्देशक, लेखक, संगीतकार और तकनीकी कर्मचारियों का योगदान रहता है।अतः हमें केवल शिखर पर खड़े व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे श्रम करने वाले इन सहयोगियों के योगदान को भी आदर देना चाहिए। (विद्यार्थी अपना उदाहरण भी जोड़ सकते हैं।)

6. कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तरगायन में तार सप्तक सबसे ऊँचा सप्तक होता है। इस ऊँचाई पर पहुँचकर कभी-कभी मुख्य गायक का गला साथ छोड़ने लगता है, उसका स्वर काँपने और बिखरने लगता है तथा उत्साह कम होने लगता है।ऐसे कठिन क्षण में संगतकार अपनी आवाज़ मिलाकर मुख्य गायक को सहारा देता है और उसके स्वर को बिखरने से बचा लेता है।वह स्थायी को सँभाले रखता है, जिससे गायक पुनः मुख्य धुन पर लौट आता है। साथ ही वह गायक को यह आत्मविश्वास देता है कि वह अकेला नहीं है।इस प्रकार संगतकार की विशेष भूमिका एक सच्चे सहयोगी और संकटमोचक की है, जो दूसरे की सफलता को टूटने नहीं देता।

7. सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं?

उत्तरजब कोई व्यक्ति सफलता के शिखर की ओर बढ़ते समय लड़खड़ाने लगता है, तब उसके सहयोगी कई प्रकार से उसे सँभालते हैं –(क) वे उसका मनोबल और उत्साह बढ़ाते हैं, जिससे वह निराश होकर हार न माने।(ख) वे उसकी कमियों को ढककर उसका साथ देते हैं और उसे संकट से उबारते हैं।(ग) वे उसे यह विश्वास दिलाते हैं कि वह अकेला नहीं है और दोबारा प्रयास किया जा सकता है।जैसे कविता में संगतकार स्थायी को सँभालकर तथा अपना स्वर देकर मुख्य गायक को बिखरने से बचा लेता है, वैसे ही जीवन में सच्चे सहयोगी कठिन समय में व्यक्ति को धैर्य, सहारा और प्रेरणा देकर सँभाल लेते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

8. कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाएँ— (क) ऐसे में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए। (ख) ऐसी परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?

उत्तर(क) स्थिति का वर्णन – सहयोगी कलाकारों के न पहुँचने पर मैं बहुत घबरा जाऊँगा। मंच पर अकेले प्रस्तुति देने का दबाव होगा, संगत (साथ देने वाले वाद्य/स्वर) के अभाव में प्रस्तुति अधूरी-सी लगेगी और दर्शकों के सामने असहज स्थिति बन जाएगी। मन में निराशा और बेचैनी होगी।(ख) समाधान – मैं धैर्य रखकर आत्मविश्वास नहीं खोऊँगा। आयोजकों एवं उपस्थित अन्य कलाकारों से सहायता माँगूँगा और जो संगतकार उपलब्ध हों, उनके साथ तालमेल बैठाऊँगा।यदि संभव हो तो रिकॉर्डेड संगीत (कराओके) की सहायता लूँगा, अपनी प्रस्तुति को थोड़ा छोटा या सरल कर दूँगा और शांत मन से अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करूँगा। (यह विद्यार्थी की अपनी कल्पना पर आधारित उत्तर है।)

9. आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर (नमूना अनुच्छेद)किसी भी सांस्कृतिक समारोह की सफलता केवल मंच पर दिखने वाले कलाकारों पर ही नहीं, बल्कि मंच के पीछे काम करने वाले अनेक सहयोगियों पर भी निर्भर करती है।ये सहयोगी मंच की सजावट, प्रकाश (लाइटिंग) और ध्वनि-व्यवस्था (साउंड) सँभालते हैं, पर्दा खींचते-गिराते हैं, वेशभूषा एवं श्रृंगार में सहायता करते हैं तथा कलाकारों को समय पर मंच पर भेजते हैं।वे किसी गलती को तुरंत सुधार लेते हैं और कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलाते हैं, फिर भी उन्हें न तालियाँ मिलती हैं और न प्रशंसा। संगतकार की भाँति इन गुमनाम सहयोगियों का योगदान अमूल्य है और इसी कारण समारोह सफल होता है। हमें इनके परिश्रम का सदैव आदर करना चाहिए।

10. किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर क्यों नहीं पहुँच पाते होंगे?

उत्तरकिसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी कई कारणों से शीर्ष स्थान तक नहीं पहुँच पाते –(क) उनमें विनम्रता और त्याग की भावना अधिक होती है, इसलिए वे जानबूझकर आगे नहीं आते और स्वयं को छाया में रखते हैं।(ख) उन्हें उचित अवसर, संसाधन या मार्गदर्शन नहीं मिल पाता, जिसके कारण उनकी प्रतिभा सामने नहीं आ पाती।(ग) कई बार आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियाँ या आत्मप्रचार की रुचि न होना भी इसका कारण होता है।(घ) कभी-कभी वे दूसरों की सफलता में सहयोग देने को ही अपना धर्म और संतोष मान लेते हैं। इस प्रकार उनकी प्रतिभा शीर्ष स्थान पर न पहुँचकर भी समाज के लिए मूल्यवान बनी रहती है।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ‘संगतकार’ कविता के कवि कौन हैं और इसमें संगतकार किसका प्रतीक है?

उत्तर‘संगतकार’ कविता के कवि मंगलेश डबराल हैं। इसमें संगतकार उन सभी गुमनाम सहयोगियों का प्रतीक है, जो किसी की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं, पर स्वयं अनाम रहते हैं।

2. संगतकार मुख्य गायक का क्या-क्या सम्बन्धी हो सकता है, जैसा कविता में बताया गया है?

उत्तरकविता के अनुसार संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई, उसका शिष्य या पैदल चलकर सीखने आने वाला कोई दूर का रिश्तेदार हो सकता है।

3. ‘राख जैसा कुछ गिरता हुआ’ पंक्ति का क्या आशय है?

उत्तरइसका आशय है मुख्य गायक का बुझता हुआ, कमज़ोर पड़ता हुआ स्वर। जब गायक का उत्साह और शक्ति घटने लगती है, तब उसकी आवाज़ राख की तरह झरती-बुझती प्रतीत होती है।

4. संगतकार ‘स्थायी’ को क्यों सँभाले रखता है?

उत्तरजब मुख्य गायक जटिल तानों में खोकर मुख्य धुन से भटक जाता है, तब संगतकार स्थायी (गीत की मुख्य पंक्ति) को गाता रहता है, ताकि गायक पुनः उसी पर लौटकर अपना गायन सँभाल सके।

5. कवि ने संगतकार की हिचक को विफलता क्यों नहीं माना?

उत्तरक्योंकि संगतकार जानबूझकर अपने स्वर को ऊँचा नहीं उठाता, ताकि मुख्य गायक का महत्त्व बना रहे। यह झिझक उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और मनुष्यता का परिचायक है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

6. ‘संगतकार’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहते हैं? विस्तार से लिखिए।

उत्तरइस कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि किसी भी सफलता के पीछे अनेक गुमनाम सहयोगियों का योगदान होता है, जिसे प्रायः अनदेखा कर दिया जाता है।संगतकार के रूप में कवि इन सहयोगियों के त्याग, परिश्रम और विनम्रता को सम्मान देते हैं।वे बताते हैं कि सहयोगी का स्वयं को आगे न रखना उसकी विफलता नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता है।कविता यह संवेदनशीलता विकसित करती है कि हमें केवल शिखर पर खड़े व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उसकी सफलता में सहायक हर व्यक्ति के योगदान का आदर करना चाहिए।

7. संगतकार और मुख्य गायक के संबंध की तुलना जीवन के किसी अन्य संबंध से कीजिए।

उत्तरसंगतकार और मुख्य गायक का संबंध सहयोग, समर्पण और विनम्रता पर आधारित है, जैसे जीवन में अनेक संबंध होते हैं।जैसे एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को आगे बढ़ाने के लिए पर्दे के पीछे रहकर परिश्रम करता है और विद्यार्थी की सफलता में ही अपना संतोष पाता है।इसी प्रकार माता-पिता अपने बच्चों की उन्नति के लिए स्वयं त्याग करते हैं तथा कोच खिलाड़ी की जीत के पीछे अदृश्य रहकर मेहनत करता है।इन सभी संबंधों में संगतकार की भाँति एक पक्ष दूसरे की सफलता के लिए स्वयं को छाया में रखकर निःस्वार्थ सहयोग देता है – यही इनकी समानता है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘संगतकार’ कविता के रचयिता कौन हैं?

(क) नागार्जुन

(ख) मंगलेश डबराल

(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

(घ) ऋतुराज

उत्तर(ख) मंगलेश डबराल।

2. कविता में संगतकार किसका प्रतीक है?

(क) मुख्य गायक का

(ख) श्रोताओं का

(ग) गुमनाम सहयोगियों का

(घ) संगीत-गुरु का

उत्तर(ग) गुमनाम सहयोगियों का।

3. मुख्य गायक का गला कब बैठने लगता है?

(क) मंद्र सप्तक में

(ख) मध्य सप्तक में

(ग) तार सप्तक की ऊँचाई पर

(घ) स्थायी गाते समय

उत्तर(ग) तार सप्तक की ऊँचाई पर।

4. ‘ढाढ़स बँधाना’ का अर्थ है—

(क) क्रोध करना

(ख) तसल्ली/सांत्वना देना

(ग) डाँटना

(घ) चुप रहना

उत्तर(ख) तसल्ली/सांत्वना देना।

5. कविता के अनुसार संगतकार अपनी गूँज कब से मिलाता आया है?

(क) आधुनिक काल से

(ख) मध्यकाल से

(ग) प्राचीन काल से

(घ) अभी कुछ वर्षों से

उत्तर(ग) प्राचीन काल से।

6. कविता में मुख्य गायक का स्वर कैसा बताया गया है?

(क) काँपता हुआ कमज़ोर

(ख) चट्टान जैसा भारी और गंभीर

(ग) हिचकता हुआ

(घ) धीमा एवं मद्धम

उत्तर(ख) चट्टान जैसा भारी और गंभीर।

7. ‘अनहद’ शब्द का अर्थ है—

(क) सीमित ध्वनि

(ख) असीम/अनंत नाद

(ग) टूटता स्वर

(घ) मधुर तान

उत्तर(ख) असीम/अनंत नाद।

8. संगतकार के स्वर में जो हिचक है, उसे कवि क्या मानने के लिए कहते हैं?

(क) विफलता

(ख) कमज़ोरी

(ग) मनुष्यता

(घ) घमंड

उत्तर(ग) मनुष्यता।

9. कविता के अनुसार संगतकार स्थायी को क्यों सँभाले रहता है?

(क) अपना स्वर ऊँचा दिखाने के लिए

(ख) गायक के भटक जाने पर धुन बनाए रखने के लिए

(ग) श्रोताओं को रिझाने के लिए

(घ) पुरस्कार पाने के लिए

उत्तर(ख) गायक के भटक जाने पर मुख्य धुन बनाए रखने के लिए।

10. ‘संगतकार’ कविता क्षितिज भाग 2 के किस खंड में संकलित है?

(क) गद्य खंड

(ख) काव्य खंड

(ग) पूरक पाठ्यपुस्तक

(घ) व्याकरण खंड

उत्तर(ख) काव्य खंड।
उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(ग), 3–(ग), 4–(ख), 5–(ग), 6–(ख), 7–(ख), 8–(ग), 9–(ख), 10–(ख)।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): संगतकार अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता।

कारण (R): वह मुख्य गायक का महत्त्व बनाए रखना चाहता है और विनम्र है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): तार सप्तक पर मुख्य गायक का स्वर बिखरने लगता है।

कारण (R): तार सप्तक संगीत का सबसे नीचा (मंद्र) सप्तक होता है।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – तार सप्तक सबसे ऊँचा सप्तक होता है, सबसे नीचा नहीं।

3. अभिकथन (A): संगतकार का स्वर मुख्य गायक को ढाढ़स बँधाता है।

कारण (R): वह गायक को यह विश्वास दिलाता है कि वह अकेला नहीं है और गीत फिर से गाया जा सकता है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): कवि संगतकार की हिचक को उसकी मनुष्यता मानते हैं।

कारण (R): संगतकार गायन में पूरी तरह असफल कलाकार है।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – संगतकार असफल नहीं, बल्कि विनम्र एवं सहयोगी कलाकार है।

5. अभिकथन (A): संगतकार केवल संगीत के क्षेत्र तक सीमित होता है।

कारण (R): संगतकार जैसे सहयोगी फ़िल्म, नाटक, नृत्य, खेल तथा समाज और इतिहास में भी दिखाई देते हैं।

उत्तर(घ) A गलत है, R सही है – संगतकार जैसे सहयोगी संगीत के अलावा अनेक क्षेत्रों में होते हैं।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • ‘संगतकार’ में प्रतीक एवं केंद्रीय भाव (गुमनाम सहयोगियों का सम्मान) को अवश्य याद रखें – यही अधिकांश प्रश्नों का आधार है।
  • ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ प्रश्न में पहले शब्दार्थ, फिर पंक्ति का सरल भाव और अंत में निष्कर्ष लिखें।
  • स्थायी, अंतरा, सरगम, तार सप्तक, अनहद जैसे संगीत-शब्दों के अर्थ कंठस्थ रखें; इनसे शब्दार्थ व MCQ बनते हैं।
  • कवि-परिचय में जन्म-वर्ष (1948), जन्म-स्थान (काफलपानी, टिहरी गढ़वाल), प्रमुख रचनाएँ एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार अवश्य लिखें।

सामान्य गलतियाँ

  • तार सप्तक को सबसे नीचा सप्तक मान लेना – वास्तव में यह सबसे ऊँचा सप्तक है (सबसे नीचा मंद्र सप्तक है)।
  • संगतकार को केवल कमज़ोर/असफल गायक समझ लेना – कवि उसे विनम्र एवं महान सहयोगी मानते हैं।
  • कवि का नाम ‘मंगलेश डबराल’ के स्थान पर गलत लिखना (वर्तनी सावधानी से लिखें)।
  • उत्तर में पाठ का सार लिख देना, जबकि प्रश्न भाव या भूमिका पूछ रहा हो – प्रश्न के अनुसार ही उत्तर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘संगतकार’ कविता के कवि कौन हैं?

‘संगतकार’ कविता के कवि मंगलेश डबराल हैं, जिनका जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) में हुआ था और जिन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कविता में ‘संगतकार’ किसका प्रतीक है?

संगतकार उन सभी गुमनाम सहयोगियों का प्रतीक है, जो किसी की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हुए भी स्वयं अनाम और छाया में रहते हैं।

कवि संगतकार की हिचक को क्या मानने के लिए कहते हैं?

कवि कहते हैं कि संगतकार की आवाज़ की हिचक और स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश उसकी विफलता नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और मनुष्यता है।

प्रश्न NCERT क्षितिज भाग 2 पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

Scroll to Top