NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 12: अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 12 ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ (लेखक – निदा फ़ाज़ली) का पूरा एवं प्रामाणिक समाधान देता है – पाठ का सार, कठिन शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, भाषा-अध्ययन, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 12 लेखक: निदा फ़ाज़ली विधा: गद्य (संस्मरणात्मक निबंध) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – निदा फ़ाज़ली

निदा फ़ाज़ली का जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ था और उनका बचपन ग्वालियर में बीता। वे उर्दू की साठोत्तरी पीढ़ी के एक महत्त्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की सहज भाषा में, सरलता से किसी के भी दिलो-दिमाग में घर कर लेने वाली कविता रचने में उन्हें विशेष महारत हासिल थी। अपनी गद्य रचनाओं में शे’र-ओ-शायरी पिरोकर थोड़े में बहुत कुछ कह देने के मामले में वे अपने ढंग के अकेले गद्यकार थे। उनकी कविताओं की पहली पुस्तक ‘लफ़्ज़ों का पुल’ थी और शायरी की किताब ‘खोया हुआ-सा कुछ’ के लिए उन्हें 1999 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी आत्मकथा ‘दीवारों के बीच’ और ‘दीवारों के पार’ शीर्षक से प्रकाशित हुई। फ़िल्म उद्योग से भी जुड़े रहे निदा फ़ाज़ली का निधन 8 फरवरी 2016 को हुआ। यहाँ प्रस्तुत पाठ उनकी पुस्तक ‘तमाशा मेरे आगे’ से लिया गया एक अंश है।

पाठ का सार

‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ निदा फ़ाज़ली का एक संस्मरणात्मक निबंध है, जिसमें लेखक मनुष्य की बढ़ती स्वार्थपरता और प्रकृति एवं अन्य जीवों के प्रति घटती संवेदनशीलता पर चिंता प्रकट करता है। लेखक कहता है कि यह धरती केवल मनुष्य की नहीं, बल्कि सभी जीव-जंतुओं की है; पर मनुष्य ने अपनी बुद्धि और स्वार्थ के बल पर सारी धरती को अपनी जागीर बना लिया और अन्य प्राणियों को बेघर कर दिया। परिणामस्वरूप अनेक जीवों की नस्लें समाप्त हो गईं या उन्हें अपना ठौर-ठिकाना छोड़कर भटकना पड़ा।

लेखक पुराने समय की उदार और सहानुभूतिपूर्ण परंपरा को कई उदाहरणों से याद करता है। बादशाह सुलेमान (सोलोमन) सभी जीव-जंतुओं की भाषा जानते थे और स्वयं को सबका रखवाला मानते थे। सिंधी भाषा के महाकवि शेख अयाज़ के पिता एक काले च्योंटे (चींटे) को बाँह पर रेंगता देखकर भोजन छोड़ उठ खड़े हुए, क्योंकि वे उस ‘बेघर’ को उसके घर छोड़ने जा रहे थे। पैगंबर नूह एक घायल कुत्ते को दुत्कारने के अपराध-बोध में जीवन-भर रोते रहे। इन कथाओं से लेखक यह दर्शाता है कि कभी मनुष्य दूसरों के दुख से सच्चे अर्थों में दुखी होता था।

आगे लेखक बंबई (मुंबई) में स्वयं देखे गए दृश्यों का वर्णन करता है। बढ़ती आबादी और बड़े बिल्डरों ने समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी ज़मीन हथिया ली, पेड़ काट दिए और प्रदूषण फैलाकर पक्षियों को बस्तियों से भगा दिया। नेचर (प्रकृति) की सहनशक्ति की एक सीमा होती है; क्रोधित होकर समुद्र ने एक रात अपनी लहरों पर तीन जहाज़ों को उठाकर तीन दिशाओं में फेंक दिया। लेखक अपनी माँ को याद करता है, जो पेड़ों के पत्ते तोड़ने, फूल तोड़ने और कबूतरों-मुर्गे को सताने से मना करती थीं और कबूतर का अंडा टूट जाने के अपराध-बोध में पूरे दिन रोज़ा रखती थीं।

अंत में लेखक बताता है कि वर्सोवा (मुंबई) में उसके फ्लैट के मचान में दो कबूतरों ने घोंसला बना लिया, पर उनके आने-जाने से होने वाली परेशानी से तंग आकर उसकी पत्नी ने वहाँ जाली लगवा दी और कबूतरों के बच्चों को दूसरी जगह कर दिया। अब वे दोनों कबूतर खिड़की के बाहर रात-भर ख़ामोश और उदास बैठे रहते हैं, पर अब न सुलेमान हैं जो उनका दुख समझें और न लेखक की माँ, जो उनके दुख में रात-भर रोएँ – अर्थात् अब दूसरे के दुख से दुखी होने वाले लोग कहाँ रह गए हैं।

पाठ का मूलभाव

इस पाठ का मूल भाव यह है कि मनुष्य की बढ़ती स्वार्थपरता, उपभोग की भूख और संवेदनहीनता ने प्रकृति तथा अन्य जीवों के साथ उसके सहज, करुणामय संबंध को नष्ट कर दिया है। धरती पर सभी प्राणियों का समान अधिकार है; मनुष्य को अपनी सुविधा के लिए दूसरों का घर छीनने का हक नहीं। लेखक संदेश देता है कि हमें पुरानी उदार परंपरा को अपनाते हुए प्रकृति और सभी जीवों के दुख-दर्द के प्रति संवेदनशील बनना चाहिए, अन्यथा प्रकृति के असंतुलन का दंड स्वयं मनुष्य को भी भुगतना पड़ेगा।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
अता फ़रमानाप्रदान करना, बख़्शना
जागीरनिजी संपत्ति, अपनी जमींदारी
दरबदरएक स्थान से दूसरे स्थान भटकना, बेघर
हाकिमराजा, मालिक, शासक
लश्कर (लशकर)सेना, विशाल जनसमुदाय
लकबपद-सूचक नाम, उपाधि
दफ़ाबार (गणना संबंधी); कानून संबंधी धारा
दुत्कारनातिरस्कारपूर्वक भगाना, झिड़कना
प्रतीकात्मकप्रतीकस्वरूप, चिह्न के रूप में
दालानबरामदा
सिमटनासिकुड़ना, संकुचित होना
ज़लज़लेभूकंप
सैलाबबाढ़
नेचरप्रकृति
सैलानीऐसे पर्यटक जो भ्रमण कर नए-नए स्थानों के विषय में जानना चाहते हैं
अज़ीज़प्रिय, प्यारा
मज़ारदरगाह, कब्र
गुंबदमंदिर, मस्जिद आदि के ऊपर बनी गोल छत जिसमें आवाज़ गूँजती है
अज़ाननमाज़ के समय की सूचना जो ऊँची जगह पर खड़े होकर दी जाती है
डेराअस्थायी पड़ाव
रोज़ाउपवास (इस्लाम में दिन-भर का व्रत)
मुआफ़क्षमा, माफ़

प्रश्न-अभ्यास – मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए–

1. बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?

उत्तरबढ़ती आबादी के लिए ज़मीन प्राप्त करने और भवन-निर्माण से लाभ कमाने के लिए बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी ज़मीन हथिया रहे थे।

2. लेखक का घर किस शहर में था?

उत्तरलेखक का घर बंबई (मुंबई) के वर्सोवा नामक स्थान पर था; उसका बचपन ग्वालियर में बीता था।

3. जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?

उत्तरपहले बड़े-बड़े दालानों और आँगनों वाले घर होते थे, पर अब जीवन छोटे-छोटे डिब्बेनुमा घरों (फ्लैटों) में सिमटकर रह गया है।

4. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?

उत्तरबिल्ली ने उनके घोंसले के एक अंडे को तोड़ दिया था और दूसरा अंडा भी बचाने की कोशिश में टूट गया, इसलिए अपने अंडों की हानि से दुखी होकर कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।

लिखित (क)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए–

1. अरब में लश्कर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

उत्तरपैगंबर नूह का असली नाम लश्कर था। एक बार उन्होंने एक घायल कुत्ते को ‘दूर हो जा गंदे कुत्ते’ कहकर दुत्कार दिया। कुत्ते के उत्तर से उन्हें इतना पश्चाताप हुआ कि वे जीवन-भर रोते रहे। इसी कारण अरब में लश्कर को नूह के नाम (लकब) से याद किया जाता है।

2. लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

उत्तरलेखक की माँ सूरज ढलने के समय (शाम के समय) पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका मानना था कि उस समय पेड़ सो जाते या उदास हो जाते हैं और पत्ते तोड़ने पर वे रोते हैं – अर्थात् हर जीव-वस्तु के प्रति संवेदना रखनी चाहिए।

3. प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

उत्तरमनुष्य और प्रकृति के असंतुलन के कारण गर्मी में अधिक गर्मी, बेवक्त की बरसातें, भूकंप (ज़लज़ले), बाढ़ (सैलाब), तूफ़ान और नित नए रोग जैसे संकट उत्पन्न हुए। प्रकृति की सहनशक्ति समाप्त होने पर उसका क्रोध मनुष्य के लिए विनाशकारी सिद्ध हुआ।

4. लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?

उत्तरबिल्ली से कबूतर के अंडे बचाने की कोशिश में अनजाने ही दूसरा अंडा भी लेखक की माँ के हाथ से गिरकर टूट गया। इस ‘गुनाह’ का प्रायश्चित करने और खुदा से माफ़ी माँगने के लिए उन्होंने पूरे दिन का रोज़ा रखा और बार-बार नमाज़ पढ़कर दुआ माँगती रहीं।

5. लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरग्वालियर में लेखक का बड़े दालानों वाला घर था जहाँ कबूतर सहज रहते थे। बंबई (वर्सोवा) में जहाँ पहले दूर तक जंगल, पेड़ और पक्षी थे, वहाँ अब समुद्र किनारे लंबी-चौड़ी बस्तियाँ बन गईं। इस बस्ती ने अनगिनत पक्षियों-जानवरों का घर छीन लिया। लेखक ने अनुभव किया कि बढ़ती आबादी और स्वार्थ ने प्रकृति तथा जीवों के साथ मनुष्य के संबंध को बदल दिया है और संवेदनशीलता समाप्त होती जा रही है।

6. ‘डेरा डालने’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर‘डेरा डालना’ से तात्पर्य है किसी स्थान पर अस्थायी रूप से ठिकाना बना लेना। पाठ में जो पक्षी अपना मूल घर छिनने पर शहर छोड़कर नहीं जा सके, उन्होंने मजबूरी में यहाँ-वहाँ अस्थायी पड़ाव बनाकर रहना शुरू कर दिया – यही उनका ‘डेरा डालना’ है।

7. शेख अयाज़ के पिता अपनी बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?

उत्तरशेख अयाज़ के पिता ने सोचा कि वे कुएँ से नहाकर लौटते समय अनजाने में एक चींटे को उसके घर (कुएँ) से दूर ले आए हैं और इस प्रकार उन्होंने एक ‘घर वाले को बेघर’ कर दिया है। उस बेघर च्योंटे को वापस उसके घर (कुएँ पर) छोड़ने के लिए वे भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए।

लिखित (ख)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए–

1. बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तरबढ़ती आबादी ने पर्यावरण पर बहुत बुरा प्रभाव डाला। रहने के लिए समुद्र को पीछे धकेला गया, पेड़ रास्तों से हटाए गए और बढ़ते प्रदूषण ने पक्षियों को बस्तियों से भगा दिया।प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से गर्मी में अधिक गर्मी, बेवक्त की बरसातें, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नित नए रोग पैदा हुए। अनेक पशु-पक्षियों का घर छिन गया और जीव-जगत संकट में पड़ गया।

2. लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?

उत्तरलेखक के फ्लैट के मचान में दो कबूतरों ने घोंसला बना लिया था। वे दिन में कई-कई बार आते-जाते थे, कभी कोई चीज़ गिराकर तोड़ देते, तो कभी लेखक की लाइब्रेरी में घुसकर परेशान करते।इस रोज़-रोज़ की परेशानी से तंग आकर लेखक की पत्नी ने उनके घोंसले वाली जगह पर जाली लगवा दी और उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया, ताकि वे अंदर न आ सकें।

3. समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

उत्तरबड़े-बड़े बिल्डर वर्षों से समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी ज़मीन हथिया रहे थे। समुद्र लगातार सिमटता गया – पहले उसने टाँगें समेटीं, फिर उकड़ूँ बैठा, फिर खड़ा हो गया; अंत में खड़े रहने की जगह भी कम पड़ी तो उसे क्रोध आ गया।अपना गुस्सा निकालते हुए उसने एक रात अपनी लहरों पर दौड़ते हुए तीन जहाज़ों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया – एक वर्ली, दूसरा बांद्रा और तीसरा गेट-वे-ऑफ़-इंडिया पर जा गिरा।

4. ‘मिट्टी से मिट्टी मिले,/ खो के सभी निशान,/ किसमें कितना कौन है,/ कैसे हो पहचान’ इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि अंत में सभी प्राणी मिट्टी में मिल जाते हैं और उनके सारे भेद-चिह्न मिट जाते हैं।मृत्यु के बाद न कोई ऊँचा रहता है, न नीचा; न मनुष्य, न पशु – सबकी मिट्टी एक हो जाती है। तब यह पहचानना असंभव हो जाता है कि कौन कितना बड़ा या छोटा था। अतः जीवित रहते हुए मनुष्य को अहंकार त्यागकर सभी जीवों को समान एवं प्रेमपूर्ण दृष्टि से देखना चाहिए।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए–

1. नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।

आशयप्रकृति बहुत सहनशील है, पर उसकी सहनशीलता की भी एक सीमा होती है। जब मनुष्य उसका लगातार दोहन और अपमान करता है तो वह क्रोधित हो उठती है।इसी क्रोध का उदाहरण बंबई में समुद्र के रूप में दिखा, जब उसने अपनी जगह छिनने पर लहरों से तीन जहाज़ों को उठाकर फेंक दिया – यह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का विनाशकारी परिणाम था।

2. जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।

आशयइसका आशय है कि महान और बड़े हृदय वाले लोग बहुत धैर्यवान और सहनशील होते हैं; वे छोटी-छोटी बातों पर जल्दी क्रोध नहीं करते।जैसे विशाल समुद्र देर तक अन्याय सहता रहा। परंतु जब बड़े को क्रोध आ ही जाता है, तो उसे रोकना कठिन हो जाता है और उसका परिणाम बहुत भयंकर होता है।

3. इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।

आशयमनुष्य की बढ़ती बस्तियों ने अनगिनत पक्षियों और जानवरों के स्वाभाविक घर (जंगल, पेड़) छीन लिए हैं।कुछ जीव तो वह स्थान छोड़कर अन्यत्र चले गए, पर जो नहीं जा सके वे विवश होकर मनुष्य की बस्ती के बीच ही यहाँ-वहाँ अस्थायी रूप से रहने लगे हैं। यह मनुष्य की स्वार्थपरता और संवेदनहीनता को दर्शाता है।

4. शेख अयाज़ के पिता बोले, ‘नहीं, यह बात नहीं है। मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।’ इन पंक्तियों में छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए।

आशयइन पंक्तियों में शेख अयाज़ के पिता की गहरी संवेदनशीलता और सभी जीवों के प्रति समान करुणा छिपी है। उन्हें भोजन अच्छा न लगने जैसी कोई बात नहीं थी।वे एक तुच्छ-से च्योंटे (चींटे) को भी अपने समान ‘घर वाला’ मानते थे और उसे अनजाने में उसके घर से दूर ले आना पाप समझते थे। इसलिए वे उसे उसके घर वापस छोड़ने जा रहे थे – यह प्रत्येक प्राणी के अस्तित्व और अधिकार के सम्मान की भावना है।

भाषा-अध्ययन

1. उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम लिखिए–

वाक्यकारक चिह्नकारक का नाम
(क) माँ ने भोजन परोसा।नेकर्ता कारक
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।के लिएसंप्रदान कारक
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।कोकर्म कारक
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।मेंअधिकरण कारक
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।परअधिकरण कारक

2. नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए– चींटी, घोड़ा, आवाज़, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।

उत्तर
एकवचनबहुवचन
चींटीचींटियाँ
घोड़ाघोड़े
आवाज़आवाज़ें
बिलबिलों
फ़ौजफ़ौजें
रोटीरोटियाँ
बिंदुबिंदुओं
दीवारदीवारें
टुकड़ाटुकड़े

3. ध्यान दीजिए नुक़्ता लगाने से शब्द के अर्थ में परिवर्तन हो जाता है। नीचे कुछ नुक़्तायुक्त और नुक़्तारहित शब्द दिए जा रहे हैं उन्हें ध्यान से देखिए (सज़ा–सजा, नाज़–नाज, ज़रा–जरा, तेज़–तेज) और उपयुक्त शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए–

उत्तर (क) आजकल ज़माना बहुत खराब है। (ज़माना) (ख) पूरे कमरे को सजा दो। (सजा) (ग) ज़रा चीनी तो देना। (ज़रा) (घ) माँ दही जमाना भूल गई। (जमाना) (ङ) दोषी को सज़ा दी गई। (सज़ा) (च) महात्मा के चेहरे पर तेज था। (तेज)

योग्यता-विस्तार और परियोजना कार्य व्यावहारिक एवं अनुसंधानपरक गतिविधियाँ हैं, जिन्हें विद्यार्थी स्वयं करें– पशु-पक्षी एवं वन्य संरक्षण केंद्रों में जाकर जानकारी प्राप्त करें, अपने आसपास प्रतिवर्ष एक पौधा लगाएँ और उसकी देखभाल करें तथा मनोरंजन के लिए पशु-पक्षियों के उपयोग की किसी घटना का वर्णन करें।

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय (5)

1. पाठ का शीर्षक ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ कितना सार्थक है?

उत्तरशीर्षक पूर्णतः सार्थक है। पूरा पाठ यही दर्शाता है कि पहले लोग दूसरों के, यहाँ तक कि पशु-पक्षियों के दुख से भी दुखी हो जाते थे, पर आज मनुष्य स्वार्थी और संवेदनहीन हो गया है। अंत की कबूतरों वाली घटना इसी भाव को पुष्ट करती है, इसलिए शीर्षक मूल भाव को सटीक रूप से प्रकट करता है।

2. बादशाह सुलेमान के विषय में लेखक ने क्या बताया है?

उत्तरबाइबिल के सोलोमन, जिन्हें कुरआन में सुलेमान कहा गया है, ईसा से 1025 वर्ष पूर्व एक बादशाह थे। वे केवल मनुष्यों के नहीं, बल्कि सभी छोटे-बड़े पशु-पक्षियों के भी राजा थे और उनकी भाषा भी जानते थे। उन्होंने चींटियों को आश्वस्त किया कि वे सबके रखवाले हैं, किसी के लिए मुसीबत नहीं बल्कि सबके लिए मुहब्बत हैं।

3. लेखक की माँ कबूतरों, फूलों और दरिया के प्रति किस प्रकार का व्यवहार सिखाती थीं?

उत्तरलेखक की माँ हर जीव-वस्तु के प्रति करुणा सिखाती थीं। वे शाम को पेड़ों के पत्ते और दीया-बत्ती के समय फूल तोड़ने से मना करती थीं, दरिया को सलाम करने को कहती थीं तथा कबूतर और मुर्गे को न सताने की सीख देती थीं। उनके लिए हर प्राणी आदर का पात्र था।

4. इस्लाम में कुत्ते को लेकर नूह की कथा क्या संदेश देती है?

उत्तरघायल कुत्ते को दुत्कारने पर कुत्ते ने कहा कि न वह अपनी मरज़ी से कुत्ता है, न मनुष्य अपनी पसंद से इंसान; बनाने वाला तो सबका एक ही है। इस उत्तर ने नूह को झकझोर दिया और वे जीवन-भर पश्चाताप में रोते रहे। यह कथा संदेश देती है कि सभी प्राणी ईश्वर की रचना हैं और किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।

5. महाभारत में कुत्ते का उल्लेख लेखक ने किस संदर्भ में किया है?

उत्तरलेखक ने बताया है कि महाभारत में युधिष्ठिर का अंत तक साथ निभाने वाला, प्रतीकात्मक रूप में, एक कुत्ता ही था। जब सब साथ छोड़ गए, तब केवल वही उनके एकांत को शांत कर रहा था। इससे पशु की स्वामिभक्ति और मनुष्य-पशु के आत्मीय संबंध का पता चलता है।

दीर्घ उत्तरीय (3)

6. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के माध्यम से लेखक मानव-समाज को क्या संदेश देना चाहता है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तरलेखक यह संदेश देना चाहता है कि मनुष्य को अपनी स्वार्थपरता त्यागकर प्रकृति और सभी जीवों के प्रति संवेदनशील बनना चाहिए। धरती सबकी साझी है।सुलेमान, शेख अयाज़ के पिता और नूह के उदाहरणों से वह दिखाता है कि पहले लोग छोटे-से जीव का दुख भी अनुभव करते थे।समुद्र द्वारा जहाज़ फेंकने और कबूतरों के बेघर होने जैसे उदाहरणों से वह चेताता है कि प्रकृति का दोहन और जीवों के प्रति निर्दयता अंततः मनुष्य के ही विनाश का कारण बनती है। अतः हमें करुणा, सहअस्तित्व और प्रकृति-संरक्षण को अपनाना चाहिए।

7. इस पाठ में लेखक ने अतीत और वर्तमान की संवेदनशीलता की तुलना किस प्रकार की है?

उत्तरअतीत में मनुष्य अत्यंत संवेदनशील था – सुलेमान जीव-जंतुओं के रखवाले थे, शेख अयाज़ के पिता चींटे को उसके घर छोड़ने जाते थे, नूह कुत्ते को दुत्कारने पर जीवन-भर रोते रहे और लेखक की माँ अंडे टूटने पर रोज़ा रखती थीं।वर्तमान में मनुष्य स्वार्थी और संवेदनहीन हो गया है – वह समुद्र को पीछे धकेलता, पेड़ काटता और पक्षियों को बेघर करता है। कबूतरों के दुख को अब कोई नहीं समझता। इस तुलना से लेखक करुणा के ह्रास पर गहरी पीड़ा व्यक्त करता है।

8. ‘मनुष्य और प्रकृति के असंतुलन’ का वर्णन पाठ के आधार पर कीजिए और बताइए कि इसे कैसे रोका जा सकता है।

उत्तरपाठ के अनुसार मनुष्य ने पेड़ काटे, समुद्र की ज़मीन हथियाई, प्रदूषण फैलाया और पक्षियों को भगा दिया, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया।इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक गर्मी, बेमौसम बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नए रोग उत्पन्न हुए। समुद्र का जहाज़ फेंकना इसी असंतुलन का नमूना था।इसे रोकने के लिए हमें अधिक-से-अधिक पेड़ लगाने चाहिए, प्रदूषण घटाना चाहिए, वन्य जीवों का आवास सुरक्षित रखना चाहिए और प्रकृति के प्रति संवेदनशील एवं संयमित जीवन अपनाना चाहिए।

अभ्यास MCQ

1. ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) प्रेमचंद

(ख) निदा फ़ाज़ली

(ग) यशपाल

(घ) रवींद्र केलेकर

2. यह पाठ निदा फ़ाज़ली की किस पुस्तक से लिया गया है?

(क) लफ़्ज़ों का पुल

(ख) खोया हुआ-सा कुछ

(ग) तमाशा मेरे आगे

(घ) दीवारों के बीच

3. बाइबिल के सोलोमन को कुरआन में किस नाम से जाना जाता है?

(क) नूह

(ख) सुलेमान

(ग) लश्कर

(घ) शेख अयाज़

4. पैगंबर नूह का असली नाम क्या था?

(क) सुलेमान

(ख) सोलोमन

(ग) लश्कर

(घ) अयाज़

5. शेख अयाज़ के पिता ने भोजन क्यों छोड़ दिया?

(क) भोजन अच्छा नहीं था

(ख) उनकी तबीयत खराब थी

(ग) बाजू पर रेंगते च्योंटे को उसके घर छोड़ने के लिए

(घ) उन्हें भूख नहीं थी

6. समुद्र ने क्रोध में आकर लहरों पर क्या उठाकर फेंका?

(क) नावें

(ख) तीन जहाज़

(ग) मकान

(घ) पेड़

7. लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा किसलिए रखा?

(क) कबूतर का अंडा टूट जाने के प्रायश्चित में

(ख) किसी पर्व के कारण

(ग) बीमारी से ठीक होने के लिए

(घ) मन्नत पूरी होने पर

8. लेखक का बचपन किस शहर में बीता?

(क) दिल्ली

(ख) बंबई

(ग) ग्वालियर

(घ) वर्सोवा

9. ‘ज़लज़ले’ शब्द का अर्थ है–

(क) बाढ़

(ख) भूकंप

(ग) तूफ़ान

(घ) सूखा

10. महाभारत में युधिष्ठिर का अंत तक साथ निभाने वाला प्रतीकात्मक प्राणी कौन था?

(क) घोड़ा

(ख) हाथी

(ग) कुत्ता

(घ) चींटी

उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(ग), 3–(ख), 4–(ग), 5–(ग), 6–(ख), 7–(क), 8–(ग), 9–(ख), 10–(ग)।

अभिकथन-कारण

निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): समुद्र ने एक रात तीन जहाज़ों को उठाकर तीन दिशाओं में फेंक दिया।

कारण (R): बिल्डरों द्वारा लगातार ज़मीन हथियाए जाने से सिमटते-सिमटते समुद्र को क्रोध आ गया था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): शेख अयाज़ के पिता भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए।

कारण (R): उन्हें भोजन अच्छा नहीं लगा था।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – वे एक च्योंटे को उसके घर वापस छोड़ने के लिए उठे थे, भोजन की कोई बात नहीं थी।

3. अभिकथन (A): अरब में लश्कर को नूह के नाम (लकब) से याद किया जाता है।

कारण (R): वे एक घायल कुत्ते को दुत्कारने के पश्चाताप में जीवन-भर रोते रहे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): लेखक की पत्नी ने खिड़की में जाली लगवा दी।

कारण (R): कबूतरों के रोज़-रोज़ आने-जाने से होने वाली परेशानी से वह तंग आ गई थी।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): धरती केवल मनुष्य की संपत्ति है।

कारण (R): मनुष्य ने अपनी बुद्धि से सबसे बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर ली हैं।

उत्तर(घ) A गलत है – धरती पर सभी जीवों का समान अधिकार है; R सही है।

परीक्षा-युक्तियाँ व सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • लेखक का नाम (निदा फ़ाज़ली), पुस्तक (‘तमाशा मेरे आगे’) और जन्म-निधन वर्ष (1938–2016) कंठस्थ रखें।
  • सुलेमान, शेख अयाज़ के पिता, नूह और लेखक की माँ – इन चार उदाहरणों को क्रम से याद रखें; निबंध इन्हीं पर केंद्रित है।
  • समुद्र द्वारा तीन जहाज़ फेंकने वाली घटना और तीनों स्थानों (वर्ली, बांद्रा, गेट-वे-ऑफ़-इंडिया) के नाम अक्सर पूछे जाते हैं।
  • उर्दू-मूल के शब्दों (ज़लज़ले, सैलाब, अज़ान, मज़ार) में नुक़्ते का सही प्रयोग करें।
  • आशय/व्याख्या वाले प्रश्नों में पंक्ति का भाव अपने शब्दों में स्पष्ट करें, केवल पंक्ति न दोहराएँ।

सामान्य गलतियाँ

  • लेखक को कवि मानकर पाठ को कविता बता देना – यह संस्मरणात्मक गद्य निबंध है।
  • नूह और शेख अयाज़ के पिता की कथाओं को आपस में गड्डमड्ड कर देना।
  • नुक़्ता छोड़ देने से अर्थ बदल जाना (सज़ा/सजा, ज़रा/जरा) पर ध्यान न देना।
  • उत्तर में ‘पर्यावरण असंतुलन के परिणाम’ के स्थान पर केवल कारण लिख देना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक उर्दू के प्रसिद्ध कवि एवं गद्यकार निदा फ़ाज़ली हैं। यह अंश उनकी पुस्तक ‘तमाशा मेरे आगे’ से लिया गया है।

इस पाठ का मूल भाव क्या है?

पाठ का मूल भाव है कि मनुष्य की बढ़ती स्वार्थपरता ने प्रकृति और जीवों के प्रति उसकी संवेदनशीलता समाप्त कर दी है। धरती सभी जीवों की साझी है, इसलिए हमें करुणा, सहअस्तित्व और प्रकृति-संरक्षण अपनाना चाहिए।

समुद्र ने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

लगातार ज़मीन छिनने से क्रोधित होकर समुद्र ने एक रात अपनी लहरों पर तीन जहाज़ों को उठाकर तीन दिशाओं में – वर्ली, बांद्रा और गेट-वे-ऑफ़-इंडिया की ओर – फेंक दिया।

प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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