NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 4: पर्वत प्रदेश में पावस – प्रश्न-अभ्यास, सार एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 4 ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ (कवि – सुमित्रानंदन पंत) का पूरा समाधान देता है – कविता का सार, भावार्थ, शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
कवि परिचय – सुमित्रानंदन पंत
सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई 1900 को उत्तराखंड के कौसानी (अल्मोड़ा) नामक रमणीय पर्वतीय गाँव में हुआ था। प्रकृति की गोद में पले-बढ़े पंत जी ने बचपन से ही कविता लिखना आरंभ कर दिया था। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। उनकी आरंभिक कविताओं में प्रकृति-प्रेम और रहस्यवाद की झलक मिलती है; बाद में वे मार्क्स, गांधी और अरविंद के दर्शन से प्रभावित हुए। आकाशवाणी से जुड़कर तथा ‘लोकायतन’ जैसी सांस्कृतिक संस्था की स्थापना कर उन्होंने साहित्य की सेवा की। उन्हें ‘कला और बूढ़ा चाँद’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार (1960), ‘चिदंबरा’ पर ज्ञानपीठ पुरस्कार (1969) तथा पद्मभूषण सम्मान मिला; वे हिंदी के पहले ज्ञानपीठ विजेता थे। ‘वीणा’, ‘पल्लव’, ‘ग्राम्या’, ‘युगवाणी’, ‘स्वर्णकिरण’ और ‘लोकायतन’ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। 28 दिसंबर 1977 को उनका निधन हुआ।
कविता का सार
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत ने वर्षा ऋतु (पावस) में पर्वतीय प्रदेश के क्षण-क्षण बदलते मनोहारी सौंदर्य का सजीव चित्र खींचा है। कवि कहते हैं कि पावस ऋतु में प्रकृति का रूप पल-पल बदल रहा है। विशाल मेखलाकार पर्वत अपने हजारों पुष्प रूपी नेत्रों से अपने चरणों में फैले तालाब में अपना ही विशाल प्रतिबिंब बार-बार निहार रहा है। यह तालाब दर्पण के समान स्वच्छ और विशाल है।
पर्वत से झर-झर गिरते झरने मानो पर्वत के गौरव का गान कर रहे हैं; वे मोती की लड़ियों के समान सुंदर और फेन से भरे प्रतीत होते हैं। पर्वत के हृदय से उठते ऊँचे-ऊँचे वृक्ष अपनी ऊँची आकांक्षाओं के साथ शांत आकाश की ओर एकटक, अटल, किंतु कुछ चिंतित भाव से ताक रहे हैं – मानो वे भी कुछ पाने की आकांक्षा रखते हों।
तभी अचानक वर्षा और कोहरे के कारण दृश्य बदल जाता है। पर्वत मानो आँखों से ओझल हो जाता है और ऐसा लगता है जैसे वह पारे के समान उज्ज्वल पंख फड़फड़ाकर उड़ गया हो। अब केवल झरनों का शब्द शेष रह जाता है। घने बादल इस प्रकार छा जाते हैं मानो आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। बादलों और कोहरे में डूबे ऊँचे शाल के वृक्ष ऐसे प्रतीत होते हैं मानो वे भयभीत होकर धरती में धँस गए हों। झरने का जल वाष्प बनकर उठता है तो लगता है मानो तालाब जल उठा हो और उससे धुआँ उठ रहा हो। अंत में कवि कल्पना करते हैं कि बादल रूपी विमानों में विचरण करता हुआ इंद्र मानो इंद्रजाल (जादू) का खेल खेल रहा है। इस प्रकार कविता मानवीकरण और चित्रात्मक भाषा के द्वारा पर्वतीय वर्षा का अद्भुत सौंदर्य प्रस्तुत करती है।
कविता का भावार्थ (पद्यांश-व्याख्या)
पद्यांश 1 – “पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश, / पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश। / मेखलाकार पर्वत अपार / अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़, / अवलोक रहा है बार-बार / नीचे जल में निज महाकार, / जिसके चरणों में पला ताल / दर्पण-सा फैला है विशाल!”
भावार्थ: वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश का रूप पल-पल बदल रहा है। करधनी के आकार वाला विशाल पर्वत अपने हजारों फूल रूपी नेत्रों को खोलकर अपने नीचे फैले तालाब में अपने ही विशाल प्रतिबिंब को बार-बार देख रहा है। पर्वत के चरणों में दर्पण के समान स्वच्छ एवं विशाल तालाब फैला हुआ है।
पद्यांश 2 – “गिरि का गौरव गाकर झर-झर / मद में नस-नस उत्तेजित कर / मोती की लड़ियों-से सुंदर / झरते हैं झाग भरे निर्झर! / गिरिवर के उर से उठ-उठ कर / उच्चाकांक्षाओं से तरुवर / हैं झाँक रहे नीरव नभ पर / अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।”
भावार्थ: झर-झर बहते झरने मानो मस्ती में पर्वत के गौरव का गान करते हुए, फेन से भरे और मोती की लड़ियों के समान सुंदर प्रतीत होते हैं। पर्वत के हृदय से उठते ऊँचे-ऊँचे वृक्ष ऊँची आकांक्षाओं को लिए शांत आकाश की ओर एकटक, अटल और कुछ चिंतित भाव से ताक रहे हैं।
पद्यांश 3 – “उड़ गया, अचानक लो, भूधर / फड़का अपार वारिद के पर! / रव-शेष रह गए हैं निर्झर! / है टूट पड़ा भू पर अंबर! / धँस गए धरा में सभय शाल! / उठ रहा धुआँ, जल गया ताल! / —यों जलद-यान में विचर-विचर / था इंद्र खेलता इंद्रजाल।”
भावार्थ: अचानक बादल और कोहरा छा जाने से पर्वत आँखों से ओझल हो जाता है, मानो बादलों के पंख फड़फड़ाकर वह उड़ गया हो। अब केवल झरनों का शब्द शेष रह जाता है। ऐसा लगता है मानो आकाश धरती पर टूट पड़ा हो। ऊँचे शाल के वृक्ष कोहरे में डूबकर मानो भयभीत होकर धरती में धँस गए हों। झरने का जल वाष्प बनकर उठता है तो लगता है तालाब जल उठा हो और धुआँ उठ रहा हो। ऐसा प्रतीत होता है मानो बादल रूपी विमान में घूमता हुआ इंद्र इंद्रजाल (जादू) का खेल खेल रहा हो।
शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पावस | वर्षा ऋतु |
| प्रकृति-वेश | प्रकृति का रूप/परिधान |
| मेखलाकार | करधनी (मेखला) के आकार की पहाड़ की ढाल |
| अपार | विशाल, असीम |
| सहस्र | हजार |
| दृग-सुमन | पुष्प रूपी आँखें |
| अवलोक | देखना, निहारना |
| निज | अपना |
| महाकार | विशाल आकार |
| ताल | तालाब |
| दर्पण | आईना |
| गिरि / गिरिवर | पर्वत / श्रेष्ठ पर्वत |
| मद | मस्ती |
| निर्झर | झरना |
| झाग | फेन |
| उर | हृदय |
| उच्चाकांक्षा | ऊँचा उठने की कामना |
| तरुवर | श्रेष्ठ वृक्ष, पेड़ |
| नीरव नभ | शांत आकाश |
| अनिमेष | एकटक, बिना पलक झपकाए |
| अटल | स्थिर, अडिग |
| चिंतापर | चिंतित, चिंता में डूबा हुआ |
| भूधर | पहाड़ |
| वारिद के पर | बादल रूपी पंख |
| रव-शेष | केवल शब्द/आवाज़ का शेष रह जाना |
| अंबर | आकाश |
| सभय | भय के साथ, भयभीत |
| शाल | एक प्रकार का ऊँचा वृक्ष |
| जलद-यान | बादल रूपी विमान |
| विचर | घूमना, विचरण करना |
| इंद्रजाल | जादूगरी, माया |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
1. पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
2. ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
3. ‘सहस्र दृग-सुमन’ से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
4. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
5. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
6. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
7. झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए—
1. “है टूट पड़ा भू पर अंबर!”
2. “—यों जलद-यान में विचर-विचर / था इंद्र खेलता इंद्रजाल।”
3. “गिरिवर के उर से उठ-उठ कर / उच्चाकांक्षाओं से तरुवर / हैं झाँक रहे नीरव नभ पर / अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।”
कविता का सौंदर्य
1. इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
2. आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है— (क) अनेक शब्दों की आवृत्ति पर। (ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर। (ग) कविता की संगीतात्मकता पर।
3. कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (30–40 शब्द)
1. कविता ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ का मूल भाव/उद्देश्य क्या है?
2. कविता में किस ऋतु और किस स्थान का वर्णन है?
3. ‘पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
4. ‘उड़ गया, अचानक लो, भूधर’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
5. यह कविता किस काव्य-धारा से संबंधित है और इसकी एक प्रमुख विशेषता क्या है?
दीर्घ उत्तरीय (100–120 शब्द)
6. ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता में निहित प्रकृति-सौंदर्य का सविस्तार वर्णन कीजिए।
7. इस कविता के माध्यम से कवि ने मनुष्य की आकांक्षाओं के विषय में क्या संदेश दिया है? स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के कवि कौन हैं?
(क) जयशंकर प्रसाद
(ख) सुमित्रानंदन पंत
(ग) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(घ) महादेवी वर्मा
2. ‘पावस’ शब्द का अर्थ है—
(क) ग्रीष्म ऋतु
(ख) शीत ऋतु
(ग) वर्षा ऋतु
(घ) वसंत ऋतु
3. कवि ने तालाब की तुलना किससे की है?
(क) मोती से
(ख) दर्पण से
(ग) आकाश से
(घ) झरने से
4. ‘मेखलाकार’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
(क) तालाब
(ख) झरना
(ग) पर्वत
(घ) बादल
5. झरनों की तुलना किससे की गई है?
(क) दर्पण की लड़ियों से
(ख) मोती की लड़ियों से
(ग) फूलों की मालाओं से
(घ) तारों से
6. ‘सहस्र दृग-सुमन’ से तात्पर्य है—
(क) हजारों तारे
(ख) हजारों फूल रूपी आँखें
(ग) हजारों झरने
(घ) हजारों बूँदें
7. ‘नीरव नभ’ का अर्थ है—
(क) काला आकाश
(ख) शांत आकाश
(ग) ऊँचा पर्वत
(घ) गहरा तालाब
8. ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर किस भाव से ताक रहे हैं?
(क) प्रसन्न और निश्चिंत
(ख) एकटक, अटल और कुछ चिंतित
(ग) भयभीत और कंपित
(घ) क्रोधित और उग्र
9. कविता के अंत में किस देवता की कल्पना की गई है?
(क) वरुण
(ख) इंद्र
(ग) अग्नि
(घ) वायु
10. इस कविता में प्रमुख रूप से कौन-सा अलंकार प्रयुक्त हुआ है?
(क) श्लेष
(ख) मानवीकरण
(ग) यमक
(घ) वक्रोक्ति
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): कवि ने तालाब को दर्पण के समान कहा है।
कारण (R): तालाब का जल स्वच्छ एवं शांत है, जिसमें पर्वत का प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है।
2. अभिकथन (A): कविता में पर्वत, वृक्ष और झरनों का मानवीकरण किया गया है।
कारण (R): कवि ने निर्जीव प्रकृति को मनुष्य की भाँति भावनाओं एवं क्रियाओं से युक्त दिखाया है।
3. अभिकथन (A): शाल के वृक्ष भयभीत होकर सचमुच धरती में धँस गए।
कारण (R): वर्षा के समय शाल के वृक्ष कोहरे में ढककर दिखाई देना बंद हो गए थे।
4. अभिकथन (A): ‘पावस’ शब्द वर्षा ऋतु के लिए प्रयुक्त हुआ है।
कारण (R): यह कविता वसंत ऋतु के सौंदर्य का वर्णन करती है।
5. अभिकथन (A): कविता के अंत में इंद्र को इंद्रजाल खेलते हुए कल्पित किया गया है।
कारण (R): पर्वतीय वर्षा के पल-पल बदलते दृश्य जादू (माया) के समान विचित्र प्रतीत होते हैं।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ वाले प्रश्नों में पहले पंक्ति का सरल अर्थ लिखें, फिर उसमें छिपे गूढ़ भाव और अलंकार का उल्लेख करें।
- मानवीकरण के उदाहरण याद रखें – पर्वत का देखना, झरनों का गान, वृक्षों का झाँकना, शाल का धँसना। परीक्षा में अलंकार पर प्रश्न अवश्य पूछा जाता है।
- कठिन शब्दों के अर्थ (मेखलाकार, दृग-सुमन, निर्झर, जलद-यान, अनिमेष) रटें नहीं, अर्थ समझकर याद करें।
- उत्तर में जहाँ संभव हो, कविता की मूल पंक्ति उद्धृत करें – इससे अधिक अंक मिलते हैं।
सामान्य गलतियाँ
- ‘पावस’ को वसंत या ग्रीष्म ऋतु समझ लेना – यह वर्षा ऋतु है।
- शाल के वृक्षों का सचमुच धरती में धँस जाना मान लेना – यह केवल कवि की कल्पना (मानवीकरण) है।
- ‘दृग-सुमन’ का अर्थ केवल ‘फूल’ या केवल ‘आँखें’ लिखना – इसका सही अर्थ है ‘फूल रूपी आँखें’।
- देवनागरी में मात्राओं की अशुद्धि – जैसे ‘निर्झर’, ‘गिरिवर’, ‘उच्चाकांक्षा’ की वर्तनी सावधानी से लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत हैं, जो हिंदी के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता थे।
इस कविता में किस ऋतु का वर्णन है?
इस कविता में वर्षा ऋतु (पावस) में पर्वतीय प्रदेश के पल-पल बदलते प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन है।
इस कविता में प्रमुख रूप से कौन-सा अलंकार प्रयुक्त हुआ है?
इस कविता में प्रमुख रूप से मानवीकरण अलंकार प्रयुक्त हुआ है, जिसमें पर्वत, वृक्ष और झरनों को मनुष्य की भाँति सजीव एवं भावनाशील दिखाया गया है।
प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
