NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 6: कर चले हम फ़िदा – प्रश्न-अभ्यास, सार एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 6 ‘कर चले हम फ़िदा’ (कवि – कैफ़ी आज़मी) का पूरा समाधान देता है। इसमें कविता का सार, भावार्थ, कठिन शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 6 कवि: कैफ़ी आज़मी विधा: गीत (देशभक्ति गीत) सत्र: 2026–27

कवि परिचय – कैफ़ी आज़मी

कैफ़ी आज़मी का जन्म 19 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मिजवाँ गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अतहर हुसैन रिज़वी था, किंतु अदब (साहित्य) की दुनिया में वे ‘कैफ़ी आज़मी’ नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी गणना प्रगतिशील उर्दू कवियों की पहली पंक्ति में की जाती है। उनकी कविताओं में एक ओर सामाजिक तथा राजनैतिक जागरूकता है, तो दूसरी ओर हृदय की कोमलता भी झलकती है। युवावस्था में मुशायरों में वाह-वाही पाने वाले कैफ़ी ने फ़िल्मों के लिए भी सैकड़ों बेहतरीन गीत लिखे। उनके प्रमुख कविता-संग्रह हैं – झंकार, आख़िर-ए-शब, आवारा सजदे, सरमाया तथा फ़िल्मी गीतों का संग्रह मेरी आवाज़ सुनो। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 10 मई 2002 को उनका निधन हुआ।

कविता का सार

‘कर चले हम फ़िदा’ कैफ़ी आज़मी द्वारा रचित एक ओजपूर्ण देशभक्ति गीत है, जिसे युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था। यह गीत उन वीर सैनिकों के हृदय की आवाज़ है, जो देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं और मरते समय देश की बागडोर अपने देशवासियों को सौंप जाते हैं।

कवि कहता है कि सैनिक देश पर अपनी जान कुर्बान करके जा रहे हैं और अब वतन की रक्षा का भार साथियों (देशवासियों) के हवाले है। साँसें थमती रहीं, नब्ज़ जमती रही, फिर भी सैनिकों ने आगे बढ़ते कदमों को रुकने नहीं दिया। शीश कट जाने का उन्हें कोई दुख नहीं, क्योंकि उन्होंने हिमालय रूपी देश के मस्तक (सम्मान) को कभी झुकने नहीं दिया।

कवि बलिदान को सर्वोपरि मानते हुए कहता है कि जीने के लिए तो बहुत मौसम हैं, पर जान देने का अवसर रोज़ नहीं आता। उस जवानी पर लज्जा है जो देश के लिए ख़ून में नहाने को तैयार नहीं। बलिदान के क्षण को कवि सुहाग की रात मानता है – आज धरती दुल्हन बनी हुई है। वह देशवासियों से आग्रह करता है कि बलिदानों की राह कभी सूनी न हो, इसे नए काफ़िलों से सजाते रहना। एक मोर्चा फ़तह हुआ है, पर अभी विजय का असली जश्न आगे है।

अंत में कवि देश पर मंडराते शत्रु को रावण और देश की अस्मिता को सीता मानते हुए कहता है – अपने ख़ून से ज़मीन पर ऐसी लकीर खींच दो कि कोई रावण (शत्रु) इस ओर न आ सके; यदि कोई हाथ उठे, तो उसे तोड़ देना ताकि कोई सीता (देश की मर्यादा) के दामन को छू न सके। कवि देशवासियों को ही राम और लक्ष्मण मानकर देश की रक्षा का दायित्व सौंपता है। इस प्रकार यह गीत त्याग, बलिदान, देशप्रेम और कर्तव्य-बोध का अमर संदेश देता है।

भावार्थ (मूलभाव सहित)

मूलभाव – यह गीत सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की भावना को प्रकट करता है। सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए हँसते-हँसते प्राण देते हैं और देशवासियों को यह संदेश देते हैं कि अब देश की रक्षा तुम्हारा कर्तव्य है। देश की आन-बान-शान बनाए रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

“साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई / फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया” – मृत्यु निकट होने पर भी, साँसें टूटने और शरीर ठंडा पड़ने पर भी सैनिकों ने अपने बढ़ते कदम नहीं रोके; अर्थात् प्राणों की चिंता किए बिना वे शत्रु की ओर बढ़ते रहे।

“कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं / सर हिमालय का हमने न झुकने दिया” – सिर कट जाने (बलिदान) का दुख नहीं, क्योंकि सैनिकों ने हिमालय रूपी देश के गौरव और मस्तक को कभी झुकने नहीं दिया।

“खींच दो अपने ख़ूँ से ज़मीं पर लकीर / इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई” – जैसे लक्ष्मण-रेखा ने सीता की रक्षा की थी, वैसे ही अपने रक्त से ऐसी सीमा-रेखा खींच दो कि शत्रु रूपी कोई रावण देश की सीमा में प्रवेश न कर सके।

कठिन शब्द-अर्थ

शब्दअर्थ
फ़िदान्योछावर, कुर्बान
जान-ओ-तनप्राण और शरीर
हवालेसौंपना, सुपुर्द करना
वतनदेश, मातृभूमि
नब्ज़नाड़ी
जमती गईठंडी/जड़ होती गई (रुकती गई)
बाँकपनतिरछापन, अकड़, सजीलापन, जवानी की शान
रुतऋतु, मौसम
हुस्नसुंदरता
इश्क़प्रेम
रुसवाबदनाम, अपमानित
ख़ूँख़ून, रक्त
क़ाफ़िलेयात्रियों का समूह; यहाँ बलिदानियों की परंपरा
फ़तहजीत, विजय
जश्नउत्सव, खुशी मनाना
क़ुर्बानियोंबलिदान, त्याग
वीरानसूना, उजाड़
क़फ़नशव को ढकने का वस्त्र; यहाँ – बलिदान के लिए तैयार रहना
लकीररेखा (यहाँ – सीमा-रेखा / लक्ष्मण-रेखा)
रावन / सीताशत्रु का प्रतीक / देश की मर्यादा-अस्मिता का प्रतीक

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

1. क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?

उत्तरहाँ, इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था।इस युद्ध में अनेक भारतीय सैनिकों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उन्हीं वीर सैनिकों के त्याग, साहस और देशभक्ति को इस गीत में स्वर दिया गया है, इसलिए इसकी एक स्पष्ट ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मानी जाती है।

2. ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’, इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?

उत्तरइस पंक्ति में हिमालय भारत देश के गौरव, सम्मान, स्वाभिमान और अखंडता का प्रतीक है।हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर मस्तक की भाँति ऊँचा खड़ा है, इसलिए वह देश की आन-बान-शान का प्रतीक बन जाता है। सैनिक कहते हैं कि उन्होंने प्राण देकर भी देश के इस ऊँचे मस्तक (सम्मान) को कभी झुकने नहीं दिया, अर्थात् देश की मर्यादा पर कभी आँच नहीं आने दी।

3. इस गीत में धरती को दुलहन क्यों कहा गया है?

उत्तरसैनिक देश की रक्षा के लिए जिस प्रकार उत्साह और उल्लास से अपने प्राण न्योछावर करते हैं, वह उनके लिए सुहाग की रात के समान शुभ एवं गौरवपूर्ण क्षण है।जैसे दुलहन सजकर अपने प्रियतम के लिए तैयार होती है, वैसे ही बलिदान के समय धरती (मातृभूमि) सैनिकों के रक्त से सज जाती है। इसी सौभाग्यपूर्ण एवं पवित्र भाव को व्यक्त करने के लिए कवि ने धरती को दुलहन कहा है।

4. गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह जाते हैं?

उत्तरगीत में सरल, मधुर और लयबद्ध भाषा होती है, जिसे आसानी से याद किया जा सकता है।गीत भावों से भरपूर होते हैं और सीधे हृदय को छू जाते हैं; उनमें संगीत, लय और भावनाओं का संगम होता है।गीत के बोल मन में गहरी छाप छोड़ते हैं और बार-बार गुनगुनाए जाने के कारण लंबे समय तक स्मृति में बने रहते हैं। यही कारण है कि अच्छे गीत जीवन भर याद रह जाते हैं।

5. कवि ने ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?

उत्तरकवि ने ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग एक ओर सैनिक साथियों (सहयोगी सैनिकों) के लिए तथा दूसरी ओर समस्त देशवासियों के लिए किया है।बलिदान देने वाले सैनिक अपने जीवित साथियों और देशवासियों को संबोधित करके कहते हैं कि अब देश की रक्षा का भार उनके हवाले है। इस प्रकार यह संबोधन सैनिकों के साथ-साथ हम सभी देशवासियों के लिए है।

6. कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?

उत्तरकवि ने देश पर मर-मिटने वाले बलिदानियों के काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है।उसका आशय है कि देश की रक्षा के लिए कुर्बानी देने की परंपरा कभी रुकनी या सूनी नहीं चाहिए। एक सैनिक के बलिदान के बाद दूसरे देशभक्तों को आगे आकर इस राह को सजाते रहना चाहिए, ताकि देशभक्ति और त्याग की यह परंपरा सदा जीवित रहे।

7. इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?

उत्तर‘सर पर कफ़न बाँधना’ मृत्यु के लिए सदा तैयार रहने की ओर संकेत करता है।इसका आशय है कि देश की रक्षा करने वाले सैनिक हर समय अपना बलिदान देने के लिए तत्पर रहते हैं। वे मृत्यु से नहीं डरते, बल्कि देश के लिए मर-मिटने को अपना सौभाग्य मानते हैं। यह पंक्ति देशवासियों को भी देश की रक्षा हेतु प्राणों की बाज़ी लगाने के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देती है।

8. इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस कविता का प्रतिपाद्य देशभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना को जगाना है।कवि उन वीर सैनिकों की भावना को व्यक्त करता है जो देश की रक्षा करते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं और देशवासियों को देश की रक्षा का दायित्व सौंप जाते हैं।कविता यह संदेश देती है कि देश का सम्मान और अखंडता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। बलिदानियों की परंपरा को आगे बढ़ाते रहना, शत्रु से देश की मर्यादा की रक्षा करना तथा कर्तव्य-पथ पर अडिग रहना ही सच्ची देशभक्ति है।

(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए—

1. साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
   फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया

भावइन पंक्तियों में सैनिकों के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का चित्रण है।कवि कहता है कि युद्ध में लड़ते-लड़ते जब सैनिकों की साँसें रुकने लगीं और नाड़ी की गति जमने (थमने) लगी, अर्थात् मृत्यु निकट आ गई, तब भी उन्होंने अपने आगे बढ़ते कदमों को रुकने नहीं दिया।इससे यह भाव प्रकट होता है कि सच्चे सैनिक प्राणों की परवाह किए बिना अंतिम साँस तक देश की रक्षा के लिए शत्रु से जूझते रहते हैं।

2. खींच दो अपने ख़ूँ से ज़मीं पर लकीर
   इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई

भावयहाँ कवि ने रामायण की लक्ष्मण-रेखा का प्रतीक प्रयोग किया है। रावन शत्रु का प्रतीक है।कवि देशवासियों से कहता है कि वे अपने रक्त से धरती पर ऐसी अमिट सीमा-रेखा खींच दें कि शत्रु रूपी कोई भी रावण देश की सीमा में प्रवेश न कर सके।इसका आशय है कि देश की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देकर भी शत्रु को देश की सीमा में घुसने न दिया जाए और देश की पवित्रता एवं अखंडता की रक्षा की जाए।

3. छू न पाए सीता का दामन कोई
   राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो

भावइन पंक्तियों में सीता देश की मर्यादा, अस्मिता एवं स्वतंत्रता का प्रतीक है, तथा राम और लक्ष्मण उसकी रक्षा करने वाले वीरों के प्रतीक हैं।कवि कहता है कि शत्रु रूपी रावण सीता रूपी देश की मर्यादा के दामन (आँचल) को छू भी न पाए।देशवासियों को संबोधित करते हुए कवि कहता है कि अब तुम ही राम हो और तुम ही लक्ष्मण – अर्थात् देश की रक्षा और सम्मान बनाए रखने का संपूर्ण दायित्व तुम पर ही है।

भाषा अध्ययन

1. इस गीत में कुछ विशिष्ट प्रयोग हुए हैं। गीत के संदर्भ में उनका आशय स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—कट गए सर, नब्ज़ जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे

उत्तर (क) कट गए सर – आशय: देश के लिए शीश/प्राण न्योछावर कर देना (बलिदान देना)।
वाक्य प्रयोग: देश की रक्षा करते हुए सैनिकों के सर कट गए, पर उन्होंने देश का सम्मान झुकने नहीं दिया।
(ख) नब्ज़ जमती गई – आशय: नाड़ी की गति का रुकना, अर्थात् मृत्यु का निकट आना।
वाक्य प्रयोग: घायल योद्धा की नब्ज़ जमती गई, फिर भी उसने हथियार नहीं छोड़ा।
(ग) जान देने की रुत – आशय: बलिदान देने का सुअवसर/उपयुक्त समय।
वाक्य प्रयोग: देश पर संकट आने पर ही जान देने की रुत आती है, जिसे सच्चे वीर हाथ से नहीं जाने देते।
(घ) हाथ उठने लगे – आशय: देश पर हमला करने या उसका अहित करने का प्रयास होना।
वाक्य प्रयोग: यदि देश के सम्मान की ओर हाथ उठने लगें, तो उन हाथों को रोक देना हर नागरिक का कर्तव्य है।

2. ध्यान दीजिए, संबोधन में बहुवचन ‘शब्द रूप’ पर अनुस्वार का प्रयोग नहीं होता; जैसे—भाइयो, बहिनो, देवियो, सज्जनो आदि।

उत्तरयह एक भाषागत नियम है, इसका पालन करना चाहिए। संबोधन में बहुवचन रूप पर अनुस्वार (ं) नहीं लगता।शुद्ध रूप: भाइयो, बहिनो, देवियो, सज्जनो, मित्रो, बच्चो, साथियो, विद्यार्थियो, नागरिको।उदाहरण वाक्य: “प्यारे साथियो, अब देश की रक्षा का भार तुम्हारे हवाले है।” / “बहिनो और भाइयो, हमें देश के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए।”

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था और इसके कवि कौन हैं?

उत्तरयह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था। इसके रचयिता प्रसिद्ध उर्दू कवि एवं गीतकार कैफ़ी आज़मी हैं, जो प्रगतिशील कवियों में अग्रणी माने जाते हैं।

2. सैनिक मृत्यु से क्यों नहीं डरते?

उत्तरसैनिक देश की रक्षा को अपना परम कर्तव्य मानते हैं। वे जानते हैं कि देश के सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान देना सबसे बड़ा गौरव है। इसी देशभक्ति की भावना के कारण वे मृत्यु से नहीं डरते और हँसते-हँसते बलिदान दे देते हैं।

3. कवि किस प्रकार की जवानी को लज्जाजनक मानता है?

उत्तरकवि उस जवानी को लज्जाजनक (रुसवा करने वाली) मानता है, जो देश के लिए अपने ख़ून में नहाने अर्थात् बलिदान देने को तैयार नहीं होती। उसके अनुसार जो युवक मातृभूमि के काम न आ सके, उसका हुस्न और इश्क़ (सुंदरता और प्रेम) सब व्यर्थ एवं लज्जाजनक है।

4. ‘राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो’ पंक्ति से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तरइस पंक्ति से कवि कहना चाहता है कि देश पर प्राण न्योछावर करने की परंपरा कभी समाप्त या सूनी नहीं होनी चाहिए। एक बलिदानी के बाद दूसरे देशभक्तों को आगे आकर इस त्याग की राह को सजाते रहना चाहिए, ताकि देशप्रेम का यह काफ़िला निरंतर चलता रहे।

5. इस गीत में रामायण के किन प्रतीकों का प्रयोग हुआ है और क्यों?

उत्तरइस गीत में रावण, सीता, राम, लक्ष्मण तथा लक्ष्मण-रेखा (लकीर) जैसे रामायण के प्रतीकों का प्रयोग हुआ है। रावण शत्रु का, सीता देश की मर्यादा का तथा राम-लक्ष्मण देश की रक्षा करने वाले वीरों के प्रतीक हैं। इनके द्वारा कवि देशवासियों को शत्रु से देश की अस्मिता की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के माध्यम से कवि देशवासियों को क्या संदेश देना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस गीत के माध्यम से कवि कैफ़ी आज़मी देशवासियों को देशभक्ति, त्याग और कर्तव्य-पालन का संदेश देना चाहता है। बलिदान देने वाले सैनिक कहते हैं कि अब देश की रक्षा का भार देशवासियों के हवाले है।कवि का संदेश है कि देश का सम्मान, अखंडता और स्वतंत्रता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। जिस प्रकार सैनिकों ने प्राण देकर भी हिमालय रूपी देश के मस्तक को झुकने नहीं दिया, उसी प्रकार देशवासियों को भी शत्रु से देश की मर्यादा की रक्षा करनी चाहिए।कवि चाहता है कि बलिदानियों की परंपरा कभी सूनी न हो और हर पीढ़ी देश के लिए मर-मिटने को तत्पर रहे। यही सच्ची देशभक्ति है।

7. इस कविता में निहित बलिदान एवं वीर-रस की भावना का सोदाहरण वर्णन कीजिए।

उत्तरयह संपूर्ण गीत वीर-रस और बलिदान की भावना से ओतप्रोत है। आरंभ में ही सैनिक कहते हैं – ‘कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियो’, अर्थात् वे देश पर तन-मन-प्राण कुर्बान कर रहे हैं।‘साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई, फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया’ में मृत्यु के समीप होने पर भी अडिग रहने का अदम्य साहस झलकता है। ‘कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं’ में बलिदान का गौरव है।‘बाँध लो अपने सर से कफ़न साथियो’ पंक्ति वीरों को मृत्यु के लिए सदा तत्पर दिखाती है। इस प्रकार पूरी कविता त्याग, साहस और देशप्रेम से भरी हुई है, जो पाठक के हृदय में वीरता और देशभक्ति का संचार करती है।

8. कविता में ‘धरती को दुलहन’ तथा ‘फ़तह के जश्न’ की कल्पना किस भाव को प्रकट करती है? विस्तार से लिखिए।

उत्तरकवि ने बलिदान को अत्यंत गौरवपूर्ण एवं शुभ क्षण के रूप में चित्रित किया है। ‘आज धरती बनी है दुलहन साथियो’ में कवि बलिदान के क्षण को सुहाग की रात के समान मानता है।जैसे विवाह में दुलहन सजती है, वैसे ही सैनिकों के रक्त से सजी धरती दुलहन के समान सुशोभित है; अर्थात् मातृभूमि के लिए मर-मिटना उत्सव के समान आनंददायी एवं पवित्र है।‘फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है’ पंक्ति में कवि कहता है कि अभी एक मोर्चा भर जीता गया है; असली विजय का उत्सव तब होगा जब देश पूरी तरह सुरक्षित होगा। यह कल्पना बलिदान के प्रति उत्साह तथा भविष्य की पूर्ण विजय के प्रति आशा का भाव प्रकट करती है।

अभ्यास MCQ

1. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के रचयिता कौन हैं?

(क) रामधारी सिंह दिनकर

(ख) कैफ़ी आज़मी

(ग) मैथिलीशरण गुप्त

(घ) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर(ख) कैफ़ी आज़मी।

2. यह गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था?

(क) हक़ीक़त

(ख) उपकार

(ग) हम दोनों

(घ) शहीद

उत्तर(क) हक़ीक़त।

3. ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ में हिमालय किसका प्रतीक है?

(क) ऊँचाई का

(ख) ठंड का

(ग) देश के गौरव और सम्मान का

(घ) बर्फ़ का

उत्तर(ग) देश के गौरव और सम्मान का।

4. कवि ने इस गीत में धरती को किसके समान बताया है?

(क) माता

(ख) दुलहन

(ग) देवी

(घ) बहन

उत्तर(ख) दुलहन।

5. कवि के अनुसार किस प्रकार की जवानी रुसवा (लज्जाजनक) है?

(क) जो पढ़ाई नहीं करती

(ख) जो ख़ून में नहीं नहाती (बलिदान नहीं देती)

(ग) जो खेल नहीं खेलती

(घ) जो प्रेम नहीं करती

उत्तर(ख) जो ख़ून में नहीं नहाती (बलिदान नहीं देती)।

6. गीत में ‘रावन’ किसका प्रतीक है?

(क) मित्र

(ख) शत्रु

(ग) राजा

(घ) सैनिक

उत्तर(ख) शत्रु।

7. ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए हुआ है?

(क) केवल कवियों के लिए

(ख) सैनिक साथियों एवं देशवासियों के लिए

(ग) केवल बच्चों के लिए

(घ) शत्रुओं के लिए

उत्तर(ख) सैनिक साथियों एवं देशवासियों के लिए।

8. ‘सर पर कफ़न बाँधना’ का आशय क्या है?

(क) बीमार होना

(ख) मृत्यु के लिए सदा तैयार रहना

(ग) सो जाना

(घ) युद्ध से भागना

उत्तर(ख) मृत्यु के लिए सदा तैयार रहना।

9. कविता में ‘नब्ज़’ शब्द का अर्थ है—

(क) साँस

(ख) नाड़ी

(ग) हृदय

(घ) मस्तक

उत्तर(ख) नाड़ी।

10. इस गीत का मुख्य भाव (प्रतिपाद्य) क्या है?

(क) प्रेम और सौंदर्य

(ख) प्रकृति-चित्रण

(ग) देशभक्ति, त्याग एवं बलिदान

(घ) हास्य-व्यंग्य

उत्तर(ग) देशभक्ति, त्याग एवं बलिदान।
उत्तर-कुंजी: 1–(ख), 2–(क), 3–(ग), 4–(ख), 5–(ख), 6–(ख), 7–(ख), 8–(ख), 9–(ख), 10–(ग)।

अभिकथन-कारण

निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): सैनिकों ने मृत्यु के निकट होने पर भी अपने बढ़ते कदम नहीं रोके।

कारण (R): देश की रक्षा करना उनके लिए सर्वोपरि कर्तव्य था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): इस गीत में हिमालय को देश के गौरव का प्रतीक बताया गया है।

कारण (R): हिमालय भारत की दक्षिणी सीमा पर स्थित सबसे छोटा पर्वत है।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित सबसे ऊँचा पर्वत है।

3. अभिकथन (A): कवि ने धरती को दुलहन कहा है।

कारण (R): बलिदान का क्षण सैनिकों के लिए सुहाग की रात के समान शुभ एवं गौरवपूर्ण है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): गीत में ‘रावन’ और ‘सीता’ जैसे प्रतीक प्रयुक्त हुए हैं।

कारण (R): रावन शत्रु का तथा सीता देश की मर्यादा-अस्मिता का प्रतीक है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): यह गीत फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था।

कारण (R): कैफ़ी आज़मी ने केवल कविता-संग्रह लिखे, कभी कोई फ़िल्मी गीत नहीं लिखा।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – कैफ़ी आज़मी ने फ़िल्मों के लिए सैकड़ों बेहतरीन गीत लिखे थे।
उत्तर-कुंजी: 1–(क), 2–(ग), 3–(क), 4–(क), 5–(ग)।

परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • कवि का नाम कैफ़ी आज़मी, गीत का नाम ‘कर चले हम फ़िदा’ तथा फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ – ये तीनों तथ्य याद रखें; ये अक्सर पूछे जाते हैं।
  • प्रतीकों को स्पष्ट रूप से जोड़कर लिखें – हिमालय = देश का गौरव, दुलहन = बलिदान का शुभ क्षण, रावन = शत्रु, सीता = देश की मर्यादा, राम-लक्ष्मण = देशवासी/रक्षक
  • ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ प्रश्न में पहले पंक्ति का सरल अर्थ, फिर उसमें छिपा संदेश लिखें।
  • उत्तर में ‘देशभक्ति, त्याग और बलिदान’ जैसे मूल भाव-शब्द अवश्य प्रयोग करें।

सामान्य गलतियाँ

  • फ़िल्म का नाम भूलकर गलत लिख देना – सही फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ है।
  • हिमालय को केवल पर्वत बताना; इसे देश के सम्मान/गौरव का प्रतीक बताना चाहिए।
  • संबोधन के बहुवचन रूप पर अनुस्वार लगा देना – ‘साथियों’ नहीं, शुद्ध रूप ‘साथियो’ है।
  • उर्दू शब्दों की नुक़्ता-सहित वर्तनी की उपेक्षा करना – जैसे फ़िदा, नब्ज़, फ़तह, ख़ूँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के कवि कौन हैं?

इस गीत के रचयिता प्रसिद्ध प्रगतिशील उर्दू कवि एवं गीतकार कैफ़ी आज़मी हैं।

यह गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था?

यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था।

इस गीत में हिमालय किसका प्रतीक है?

इस गीत में हिमालय भारत देश के गौरव, सम्मान, स्वाभिमान और अखंडता का प्रतीक है, जिसे सैनिकों ने कभी झुकने नहीं दिया।

प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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