NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 6: कर चले हम फ़िदा – प्रश्न-अभ्यास, सार एवं भावार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 6 ‘कर चले हम फ़िदा’ (कवि – कैफ़ी आज़मी) का पूरा समाधान देता है। इसमें कविता का सार, भावार्थ, कठिन शब्दार्थ, पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।
कवि परिचय – कैफ़ी आज़मी
कैफ़ी आज़मी का जन्म 19 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मिजवाँ गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अतहर हुसैन रिज़वी था, किंतु अदब (साहित्य) की दुनिया में वे ‘कैफ़ी आज़मी’ नाम से प्रसिद्ध हुए। उनकी गणना प्रगतिशील उर्दू कवियों की पहली पंक्ति में की जाती है। उनकी कविताओं में एक ओर सामाजिक तथा राजनैतिक जागरूकता है, तो दूसरी ओर हृदय की कोमलता भी झलकती है। युवावस्था में मुशायरों में वाह-वाही पाने वाले कैफ़ी ने फ़िल्मों के लिए भी सैकड़ों बेहतरीन गीत लिखे। उनके प्रमुख कविता-संग्रह हैं – झंकार, आख़िर-ए-शब, आवारा सजदे, सरमाया तथा फ़िल्मी गीतों का संग्रह मेरी आवाज़ सुनो। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 10 मई 2002 को उनका निधन हुआ।
कविता का सार
‘कर चले हम फ़िदा’ कैफ़ी आज़मी द्वारा रचित एक ओजपूर्ण देशभक्ति गीत है, जिसे युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था। यह गीत उन वीर सैनिकों के हृदय की आवाज़ है, जो देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं और मरते समय देश की बागडोर अपने देशवासियों को सौंप जाते हैं।
कवि कहता है कि सैनिक देश पर अपनी जान कुर्बान करके जा रहे हैं और अब वतन की रक्षा का भार साथियों (देशवासियों) के हवाले है। साँसें थमती रहीं, नब्ज़ जमती रही, फिर भी सैनिकों ने आगे बढ़ते कदमों को रुकने नहीं दिया। शीश कट जाने का उन्हें कोई दुख नहीं, क्योंकि उन्होंने हिमालय रूपी देश के मस्तक (सम्मान) को कभी झुकने नहीं दिया।
कवि बलिदान को सर्वोपरि मानते हुए कहता है कि जीने के लिए तो बहुत मौसम हैं, पर जान देने का अवसर रोज़ नहीं आता। उस जवानी पर लज्जा है जो देश के लिए ख़ून में नहाने को तैयार नहीं। बलिदान के क्षण को कवि सुहाग की रात मानता है – आज धरती दुल्हन बनी हुई है। वह देशवासियों से आग्रह करता है कि बलिदानों की राह कभी सूनी न हो, इसे नए काफ़िलों से सजाते रहना। एक मोर्चा फ़तह हुआ है, पर अभी विजय का असली जश्न आगे है।
अंत में कवि देश पर मंडराते शत्रु को रावण और देश की अस्मिता को सीता मानते हुए कहता है – अपने ख़ून से ज़मीन पर ऐसी लकीर खींच दो कि कोई रावण (शत्रु) इस ओर न आ सके; यदि कोई हाथ उठे, तो उसे तोड़ देना ताकि कोई सीता (देश की मर्यादा) के दामन को छू न सके। कवि देशवासियों को ही राम और लक्ष्मण मानकर देश की रक्षा का दायित्व सौंपता है। इस प्रकार यह गीत त्याग, बलिदान, देशप्रेम और कर्तव्य-बोध का अमर संदेश देता है।
भावार्थ (मूलभाव सहित)
मूलभाव – यह गीत सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान की भावना को प्रकट करता है। सैनिक मातृभूमि की रक्षा के लिए हँसते-हँसते प्राण देते हैं और देशवासियों को यह संदेश देते हैं कि अब देश की रक्षा तुम्हारा कर्तव्य है। देश की आन-बान-शान बनाए रखना ही सच्ची देशभक्ति है।
“साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई / फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया” – मृत्यु निकट होने पर भी, साँसें टूटने और शरीर ठंडा पड़ने पर भी सैनिकों ने अपने बढ़ते कदम नहीं रोके; अर्थात् प्राणों की चिंता किए बिना वे शत्रु की ओर बढ़ते रहे।
“कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं / सर हिमालय का हमने न झुकने दिया” – सिर कट जाने (बलिदान) का दुख नहीं, क्योंकि सैनिकों ने हिमालय रूपी देश के गौरव और मस्तक को कभी झुकने नहीं दिया।
“खींच दो अपने ख़ूँ से ज़मीं पर लकीर / इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई” – जैसे लक्ष्मण-रेखा ने सीता की रक्षा की थी, वैसे ही अपने रक्त से ऐसी सीमा-रेखा खींच दो कि शत्रु रूपी कोई रावण देश की सीमा में प्रवेश न कर सके।
कठिन शब्द-अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| फ़िदा | न्योछावर, कुर्बान |
| जान-ओ-तन | प्राण और शरीर |
| हवाले | सौंपना, सुपुर्द करना |
| वतन | देश, मातृभूमि |
| नब्ज़ | नाड़ी |
| जमती गई | ठंडी/जड़ होती गई (रुकती गई) |
| बाँकपन | तिरछापन, अकड़, सजीलापन, जवानी की शान |
| रुत | ऋतु, मौसम |
| हुस्न | सुंदरता |
| इश्क़ | प्रेम |
| रुसवा | बदनाम, अपमानित |
| ख़ूँ | ख़ून, रक्त |
| क़ाफ़िले | यात्रियों का समूह; यहाँ बलिदानियों की परंपरा |
| फ़तह | जीत, विजय |
| जश्न | उत्सव, खुशी मनाना |
| क़ुर्बानियों | बलिदान, त्याग |
| वीरान | सूना, उजाड़ |
| क़फ़न | शव को ढकने का वस्त्र; यहाँ – बलिदान के लिए तैयार रहना |
| लकीर | रेखा (यहाँ – सीमा-रेखा / लक्ष्मण-रेखा) |
| रावन / सीता | शत्रु का प्रतीक / देश की मर्यादा-अस्मिता का प्रतीक |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
1. क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?
2. ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’, इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?
3. इस गीत में धरती को दुलहन क्यों कहा गया है?
4. गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह जाते हैं?
5. कवि ने ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?
6. कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?
7. इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?
8. इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए—
1. साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया
2. खींच दो अपने ख़ूँ से ज़मीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाए न रावन कोई
3. छू न पाए सीता का दामन कोई
राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो
भाषा अध्ययन
1. इस गीत में कुछ विशिष्ट प्रयोग हुए हैं। गीत के संदर्भ में उनका आशय स्पष्ट करते हुए अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए—कट गए सर, नब्ज़ जमती गई, जान देने की रुत, हाथ उठने लगे
वाक्य प्रयोग: देश की रक्षा करते हुए सैनिकों के सर कट गए, पर उन्होंने देश का सम्मान झुकने नहीं दिया। (ख) नब्ज़ जमती गई – आशय: नाड़ी की गति का रुकना, अर्थात् मृत्यु का निकट आना।
वाक्य प्रयोग: घायल योद्धा की नब्ज़ जमती गई, फिर भी उसने हथियार नहीं छोड़ा। (ग) जान देने की रुत – आशय: बलिदान देने का सुअवसर/उपयुक्त समय।
वाक्य प्रयोग: देश पर संकट आने पर ही जान देने की रुत आती है, जिसे सच्चे वीर हाथ से नहीं जाने देते। (घ) हाथ उठने लगे – आशय: देश पर हमला करने या उसका अहित करने का प्रयास होना।
वाक्य प्रयोग: यदि देश के सम्मान की ओर हाथ उठने लगें, तो उन हाथों को रोक देना हर नागरिक का कर्तव्य है।
2. ध्यान दीजिए, संबोधन में बहुवचन ‘शब्द रूप’ पर अनुस्वार का प्रयोग नहीं होता; जैसे—भाइयो, बहिनो, देवियो, सज्जनो आदि।
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था और इसके कवि कौन हैं?
2. सैनिक मृत्यु से क्यों नहीं डरते?
3. कवि किस प्रकार की जवानी को लज्जाजनक मानता है?
4. ‘राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो’ पंक्ति से कवि क्या कहना चाहता है?
5. इस गीत में रामायण के किन प्रतीकों का प्रयोग हुआ है और क्यों?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के माध्यम से कवि देशवासियों को क्या संदेश देना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।
7. इस कविता में निहित बलिदान एवं वीर-रस की भावना का सोदाहरण वर्णन कीजिए।
8. कविता में ‘धरती को दुलहन’ तथा ‘फ़तह के जश्न’ की कल्पना किस भाव को प्रकट करती है? विस्तार से लिखिए।
अभ्यास MCQ
1. ‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के रचयिता कौन हैं?
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) कैफ़ी आज़मी
(ग) मैथिलीशरण गुप्त
(घ) सुमित्रानंदन पंत
2. यह गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था?
(क) हक़ीक़त
(ख) उपकार
(ग) हम दोनों
(घ) शहीद
3. ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’ में हिमालय किसका प्रतीक है?
(क) ऊँचाई का
(ख) ठंड का
(ग) देश के गौरव और सम्मान का
(घ) बर्फ़ का
4. कवि ने इस गीत में धरती को किसके समान बताया है?
(क) माता
(ख) दुलहन
(ग) देवी
(घ) बहन
5. कवि के अनुसार किस प्रकार की जवानी रुसवा (लज्जाजनक) है?
(क) जो पढ़ाई नहीं करती
(ख) जो ख़ून में नहीं नहाती (बलिदान नहीं देती)
(ग) जो खेल नहीं खेलती
(घ) जो प्रेम नहीं करती
6. गीत में ‘रावन’ किसका प्रतीक है?
(क) मित्र
(ख) शत्रु
(ग) राजा
(घ) सैनिक
7. ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
(क) केवल कवियों के लिए
(ख) सैनिक साथियों एवं देशवासियों के लिए
(ग) केवल बच्चों के लिए
(घ) शत्रुओं के लिए
8. ‘सर पर कफ़न बाँधना’ का आशय क्या है?
(क) बीमार होना
(ख) मृत्यु के लिए सदा तैयार रहना
(ग) सो जाना
(घ) युद्ध से भागना
9. कविता में ‘नब्ज़’ शब्द का अर्थ है—
(क) साँस
(ख) नाड़ी
(ग) हृदय
(घ) मस्तक
10. इस गीत का मुख्य भाव (प्रतिपाद्य) क्या है?
(क) प्रेम और सौंदर्य
(ख) प्रकृति-चित्रण
(ग) देशभक्ति, त्याग एवं बलिदान
(घ) हास्य-व्यंग्य
अभिकथन-कारण
निर्देश – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): सैनिकों ने मृत्यु के निकट होने पर भी अपने बढ़ते कदम नहीं रोके।
कारण (R): देश की रक्षा करना उनके लिए सर्वोपरि कर्तव्य था।
2. अभिकथन (A): इस गीत में हिमालय को देश के गौरव का प्रतीक बताया गया है।
कारण (R): हिमालय भारत की दक्षिणी सीमा पर स्थित सबसे छोटा पर्वत है।
3. अभिकथन (A): कवि ने धरती को दुलहन कहा है।
कारण (R): बलिदान का क्षण सैनिकों के लिए सुहाग की रात के समान शुभ एवं गौरवपूर्ण है।
4. अभिकथन (A): गीत में ‘रावन’ और ‘सीता’ जैसे प्रतीक प्रयुक्त हुए हैं।
कारण (R): रावन शत्रु का तथा सीता देश की मर्यादा-अस्मिता का प्रतीक है।
5. अभिकथन (A): यह गीत फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था।
कारण (R): कैफ़ी आज़मी ने केवल कविता-संग्रह लिखे, कभी कोई फ़िल्मी गीत नहीं लिखा।
परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- कवि का नाम कैफ़ी आज़मी, गीत का नाम ‘कर चले हम फ़िदा’ तथा फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ – ये तीनों तथ्य याद रखें; ये अक्सर पूछे जाते हैं।
- प्रतीकों को स्पष्ट रूप से जोड़कर लिखें – हिमालय = देश का गौरव, दुलहन = बलिदान का शुभ क्षण, रावन = शत्रु, सीता = देश की मर्यादा, राम-लक्ष्मण = देशवासी/रक्षक।
- ‘भाव स्पष्ट कीजिए’ प्रश्न में पहले पंक्ति का सरल अर्थ, फिर उसमें छिपा संदेश लिखें।
- उत्तर में ‘देशभक्ति, त्याग और बलिदान’ जैसे मूल भाव-शब्द अवश्य प्रयोग करें।
सामान्य गलतियाँ
- फ़िल्म का नाम भूलकर गलत लिख देना – सही फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ है।
- हिमालय को केवल पर्वत बताना; इसे देश के सम्मान/गौरव का प्रतीक बताना चाहिए।
- संबोधन के बहुवचन रूप पर अनुस्वार लगा देना – ‘साथियों’ नहीं, शुद्ध रूप ‘साथियो’ है।
- उर्दू शब्दों की नुक़्ता-सहित वर्तनी की उपेक्षा करना – जैसे फ़िदा, नब्ज़, फ़तह, ख़ूँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘कर चले हम फ़िदा’ गीत के कवि कौन हैं?
इस गीत के रचयिता प्रसिद्ध प्रगतिशील उर्दू कवि एवं गीतकार कैफ़ी आज़मी हैं।
यह गीत किस फ़िल्म के लिए लिखा गया था?
यह गीत सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हक़ीक़त’ के लिए लिखा गया था।
इस गीत में हिमालय किसका प्रतीक है?
इस गीत में हिमालय भारत देश के गौरव, सम्मान, स्वाभिमान और अखंडता का प्रतीक है, जिसे सैनिकों ने कभी झुकने नहीं दिया।
प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
