NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 9: डायरी का एक पन्ना – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 9 ‘डायरी का एक पन्ना’ (लेखक – सीताराम सेकसरिया) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के सभी उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 9 लेखक: सीताराम सेकसरिया विधा: डायरी (गद्य) सत्र: 2026–27

लेखक परिचय – सीताराम सेकसरिया

सीताराम सेकसरिया का जन्म सन् 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ था, किंतु उनका अधिकांश जीवन कलकत्ता (कोलकाता) में बीता। व्यापार-व्यवसाय से जुड़े होने के साथ-साथ वे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा नारी-शिक्षण संस्थाओं के प्रेरक, संस्थापक एवं संचालक रहे। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर सम्मिलित हुए और सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जेल भी गए। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के वे निकट रहे। भारत सरकार ने सन् 1962 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया। विशेष बात यह है कि उन्हें विद्यालयी शिक्षा का अवसर नहीं मिला; स्वाध्याय से ही उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा। स्मृतिकण, मन की बात, बीता युग, नयी याद तथा दो भागों में एक कार्यकर्ता की डायरी उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं। सन् 1982 में उनका निधन हुआ।

पाठ का सार

‘डायरी का एक पन्ना’ लेखक सीताराम सेकसरिया की निजी डायरी का 26 जनवरी 1931 का लेखा-जोखा है। यह वह दिन है जब सन् 1930 में पहली बार गुलाम भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था और 1931 में दूसरी बार इसे उत्साह से मनाने की तैयारी हुई। लेखक ने इसे ‘अमर दिन’ कहा है। इस वर्ष कलकत्ता (कोलकाता) के लोगों ने केवल प्रचार में दो हज़ार रुपये खर्च किए तथा घर-घर जाकर कार्यकर्ताओं को समझाया गया।

बड़े बाज़ार के प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था और कई मकान ऐसे सजाए गए थे मानो स्वतंत्रता मिल गई हो। शहर के हर भाग में झंडे लगाए गए थे। दूसरी ओर पुलिस अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त दे रही थी; मोटर लारियों में गोरखे और सारजेंट हर मोड़ पर तैनात थे। पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को सवेरे से ही घेर लिया था। मोनुमेंट के नीचे जहाँ शाम को सभा होनी थी, पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था कि अमुक धारा के अनुसार कोई सभा नहीं हो सकती, जबकि कौंसिल की ओर से नोटिस था कि ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।

ठीक चार बजकर दस मिनट पर सुभाष बाबू जुलूस लेकर आए। भीड़ की अधिकता के कारण पुलिस उन्हें रोक नहीं सकी। मैदान के मोड़ पर पहुँचते ही पुलिस ने लाठियाँ चलानी शुरू कीं; बहुत-से लोग घायल हुए और सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे जोर-जोर से ‘वंदे मातरम्’ बोलते आगे बढ़ते रहे। इसी बीच स्त्रियाँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा रही थीं और घोषणा पढ़ रही थीं। सुभाष बाबू को पकड़कर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

उसके बाद स्त्रियों ने जुलूस निकाला, जिस पर पुलिस ने फिर डंडे चलाए; धर्मतल्ले के मोड़ पर जुलूस टूट गया और लगभग पचास-साठ स्त्रियाँ वहीं बैठ गईं, जिन्हें पकड़कर लालबाज़ार भेज दिया गया। कुल मिलाकर 105 स्त्रियाँ गिरफ्तार हुईं, जिन्हें रात नौ बजे छोड़ दिया गया। अस्पतालों में लगभग 160 घायल पहुँचे और दो सौ के करीब लोग घायल हुए। बंगाल या कलकत्ता पर यह कलंक था कि यहाँ आंदोलन का काम नहीं हो रहा – वह इस दिन काफी हद तक धुल गया। लेखक के अनुसार आज जो कुछ हुआ वह अपूर्व था, क्योंकि कलकत्ता में अब तक इतनी स्त्रियाँ एक साथ कभी गिरफ्तार नहीं हुई थीं।

मूलभाव

यह पाठ हमारे क्रांतिकारियों और विशेषकर महिला कार्यकर्ताओं की कुर्बानियों की याद दिलाता है। यह उजागर करता है कि यदि समाज संगठित और कृतसंकल्प हो तो ऐसा कोई काम नहीं जिसे वह न कर सके। 26 जनवरी 1930 को मनाया गया पहला स्वतंत्रता दिवस और उसके बाद हर वर्ष की पुनरावृत्ति इस बात का प्रतीक है कि भौतिक रूप से दबे होने पर भी भारतीयों का मन आज़ाद हो चुका था। दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन (अध्यक्ष – जवाहरलाल नेहरू) में ‘पूर्ण स्वराज्य’ का प्रस्ताव पास हुआ और 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान की प्रतिज्ञा की। आज़ादी मिलने के बाद यही दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ

शब्दअर्थ
पुनरावृत्तिफिर से आना/दोहराया जाना
गश्तपुलिस कर्मचारी का पहरे के लिए घूमना
सारजेंटसेना/पुलिस में एक पद
मोनुमेंटस्मारक
कौंसिलपरिषद्
चौरंगीकलकत्ता (कोलकाता) शहर में एक स्थान का नाम
वालंटियरस्वयंसेवक
संगीनगंभीर
मदालसाजानकीदेवी एवं जमनालाल बजाज की पुत्री का नाम
लॉकअपहवालात, बंदीगृह
अपूर्वजो पहले कभी न हुआ हो, अनोखा
अलख जगानाचेतना/जागृति उत्पन्न करना
न्योछावरबलिदान/कुर्बान करना
तत्परतैयार, उद्यत
कानून भंगकानून तोड़ना (सविनय अवज्ञा)
ओपन लड़ाईखुली/प्रत्यक्ष चुनौती भरी लड़ाई
प्रतिज्ञादृढ़ संकल्प, प्रण
दफ़ा/धाराकानून का कोई खंड या उपबंध
जोश-खरोशउत्साह एवं उमंग
कलंकदाग, धब्बा, बदनामी
कुर्बानीबलिदान, त्याग
कृतसंकल्पदृढ़ निश्चय वाला

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

मौखिक – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए

1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्त्वपूर्ण था?

उत्तर26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्ता वासियों के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि इस दिन उन्हें दूसरी बार स्वतंत्रता दिवस मनाना था और मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराकर स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़नी थी। पुलिस की मनाही के बावजूद नागरिकों ने इसे खुली चुनौती के रूप में मनाने का निश्चय किया था।

2. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?

उत्तरसुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था, जो यह प्रबंध कर चुका था।

3. विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तरश्रद्धानंद पार्क में बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जब झंडा गाड़ा, तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया तथा अन्य लोगों को मारा या वहाँ से हटा दिया।

4. लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?

उत्तरलोग राष्ट्रीय झंडा फहराकर यह संकेत देना चाहते थे कि अब वे स्वयं को स्वतंत्र अनुभव करते हैं तथा अंग्रेजी शासन के प्रति उनके मन में विद्रोह और स्वतंत्रता प्राप्त करने की प्रबल इच्छा है।

5. पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?

उत्तरपुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को इसलिए घेर लिया था ताकि वहाँ लोग एकत्र होकर सभा न कर सकें और स्वतंत्रता दिवस के आयोजन को रोका जा सके।

लिखित (क) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं?

उत्तरइस दिन को अमर बनाने के लिए केवल प्रचार में दो हज़ार रुपये खर्च किए गए, घर-घर जाकर कार्यकर्ताओं को समझाया गया, बड़े बाज़ार के मकानों एवं शहर के हर भाग में राष्ट्रीय झंडे लगाए-सजाए गए तथा मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराने और प्रतिज्ञा पढ़ने का आयोजन किया गया।

2. ‘आज जो बात थी वह निराली थी’—किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस दिन की निरालापन इन बातों से स्पष्ट थी – मकानों एवं शहर भर में राष्ट्रीय झंडे फहरा रहे थे, लोगों में अपूर्व उत्साह और नवीनता थी, हज़ारों की भीड़ टोलियाँ बनाकर मैदान में घूम रही थी और पुलिस की भारी मनाही के बावजूद लोग खुली चुनौती देकर सभा करने पर अड़े हुए थे।

3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?

उत्तरपुलिस कमिश्नर का नोटिस था कि अमुक-अमुक धारा के अनुसार कोई सभा नहीं हो सकती और भाग लेने वाले दोषी समझे जाएँगे। इसके विपरीत कौंसिल का नोटिस था कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा, स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी और सर्वसाधारण उपस्थित रहें।

4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

उत्तरस्त्रियों के जुलूस पर पुलिस बार-बार डंडे चला रही थी; भीड़ अधिक होने के कारण बहुत-से लोग घायल हो गए। इसी मार-पीट और दमन के कारण धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस टूट गया और लगभग पचास-साठ स्त्रियाँ वहीं मोड़ पर बैठ गईं।

5. डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरघायल लोगों के फोटो खींचने की वजह यह हो सकती थी कि पुलिस के अत्याचार और दमन का प्रमाण सुरक्षित रहे। इन फोटो के द्वारा देश-विदेश में अंग्रेजी शासन की क्रूरता को उजागर किया जा सकता था और जनता में आंदोलन के प्रति उत्साह तथा सहानुभूति बढ़ाई जा सकती थी।

लिखित (ख) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

1. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

उत्तरस्त्री समाज ने इस आंदोलन में अग्रणी एवं साहसी भूमिका निभाई। जगह-जगह से स्त्रियाँ अपना जुलूस निकालकर ठीक स्थान पर पहुँचने का प्रयास कर रही थीं। वे बड़ी संख्या में मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा रही थीं और घोषणा पढ़ रही थीं। पुलिस की लाठियाँ और गिरफ्तारियाँ सहकर भी वे पीछे नहीं हटीं; कुल 105 स्त्रियाँ गिरफ्तार हुईं – जो कलकत्ता में अब तक का अपूर्व दृश्य था।

2. जुलूस के लालबाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

उत्तरजुलूस के लालबाज़ार आने पर पुलिस ने फिर डंडे चलाने शुरू कर दिए, जिससे बहुत-से लोग घायल हो गए। बहुतों को लालबाज़ार लॉकअप में बंद कर दिया गया और बहुत-सी स्त्रियाँ जेल भेज दी गईं। कई लोगों के सिर फट गए, खून बहने लगा; लगभग दो सौ लोग घायल हुए और अस्पतालों में लगभग 160 लोग पहुँचे। फिर भी जनता का उत्साह कम नहीं हुआ।

3. ‘जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तरयहाँ अंग्रेज सरकार के पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू उस कानून (निषेधाज्ञा/धारा) को भंग करने की बात कही गई है, जिसके अनुसार किसी भी प्रकार की सभा करना मना था।यह कानून भंग करना पूरी तरह उचित था, क्योंकि यह कानून भारतीयों की स्वतंत्रता एवं अभिव्यक्ति के अधिकार को कुचलने के लिए बनाया गया अन्यायपूर्ण कानून था। अन्यायपूर्ण कानून का विरोध हर नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। शांतिपूर्वक झंडा फहराना और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा करना कोई अपराध नहीं था, अतः इस कानून को भंग करना देशहित में उचित एवं न्यायसंगत था।

4. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरयह दिन अनेक कारणों से अपूर्व था। कलकत्ता में अब तक इतनी बड़ी संख्या में (105) स्त्रियाँ एक साथ कभी गिरफ्तार नहीं हुई थीं। पुलिस के भीषण दमन, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों के बावजूद जनता में अपूर्व जोश, एकता और निर्भयता थी। स्त्रियाँ अग्रणी होकर आंदोलन में कूद पड़ी थीं। जिस कलकत्ता पर आंदोलन न करने का कलंक था, वह इस दिन धुल गया और लोगों को विश्वास हो गया कि यहाँ भी बहुत-सा काम हो सकता है। इसी अद्वितीय साहस और संगठित बलिदान के कारण यह दिन अपूर्व बन गया।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए

1. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है, वह आज बहुत अंश में धुल गया।

आशयअब तक यह आरोप लगता था कि बंगाल या कलकत्ता में स्वतंत्रता आंदोलन ढीला है और यहाँ कोई बड़ा काम नहीं हो रहा – यही उनके नाम पर कलंक (दाग) था। किंतु 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता के लोगों ने, विशेषकर स्त्रियों ने जिस जोश, साहस और संगठन के साथ पुलिस के दमन का सामना किया तथा बड़ी संख्या में गिरफ्तारियाँ दीं, उससे यह कलंक काफी हद तक मिट गया और सिद्ध हो गया कि कलकत्ता आंदोलन में पीछे नहीं है।

2. खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।

आशयइसका आशय यह है कि पुलिस कमिश्नर द्वारा सभा पर रोक के स्पष्ट नोटिस के बावजूद जनता ने खुलेआम घोषणा करके सभा करने का निश्चय किया। यह सरकारी आदेश को सीधी एवं प्रत्यक्ष चुनौती (ओपन चैलेंज) थी। इससे पहले इस प्रकार खुली चुनौती देकर, परिणामों की परवाह किए बिना, ऐसी बड़ी सभा कभी नहीं की गई थी – यही इस दिन को विशेष और अपूर्व बनाता है।

भाषा अध्ययन

1. रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं—सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य, मिश्र वाक्य। निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए—

उत्तर(क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार गया और वहाँ पर गिरफ्तार हो गया।
सरल वाक्य – दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार जाकर गिरफ्तार हो गया।
(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
सरल वाक्य – मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने पर लोग टोलियाँ बना-बनाकर घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में भेज दिया गया।
सरल वाक्य – सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

II. ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।

उत्तर (नमूना)सरल वाक्य – (1) मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे। (2) मैं अपनी कॉपी पर चित्र बनाया करता था।संयुक्त वाक्य – (1) भाई साहब बड़े अध्ययनशील थे और हर समय किताब खोले बैठे रहते थे। (2) मैं खेलना चाहता था, पर भाई साहब का भय मुझे रोक लेता था।मिश्र वाक्य – (1) जब भी मैं फेल होता, तब भाई साहब मुझे डाँटते। (2) उन्होंने कहा कि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिलती। (विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक से उपयुक्त वाक्य छाँटकर लिख सकते हैं।)

3. निम्नलिखित शब्दों की संधि कीजिए—

उत्तर1. श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद (दीर्घ स्वर संधि)2. प्रति + एक = प्रत्येक (यण स्वर संधि)3. पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम (गुण स्वर संधि)4. झंडा + उत्सव = झंडोत्सव (गुण स्वर संधि)5. पुनः + आवृत्ति = पुनरावृत्ति (विसर्ग संधि)6. ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय (विसर्ग संधि)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय (30-40 शब्द)

1. लेखक ने 26 जनवरी के दिन को ‘अमर दिन’ क्यों कहा है?

उत्तरलेखक ने इसे ‘अमर दिन’ इसलिए कहा है क्योंकि इसी दिन सन् 1930 में पहली बार गुलाम भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया और देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा की। यह दिन देशवासियों के त्याग, बलिदान और स्वतंत्रता-संकल्प का प्रतीक होने के कारण सदा अमर रहेगा।

2. इस आंदोलन में पुलिस का व्यवहार कैसा था?

उत्तरपुलिस का व्यवहार अत्यंत क्रूर और दमनकारी था। उसने पार्कों-मैदानों को घेर लिया, जगह-जगह तैनाती की, जुलूसों पर बार-बार लाठियाँ-डंडे चलाए, अनेक लोगों के सिर फोड़ दिए तथा सैकड़ों स्त्री-पुरुषों को पकड़कर लॉकअप और जेल भेज दिया।

3. मदालसा और जानकीदेवी कौन थीं?

उत्तरमदालसा, जानकीदेवी और जमनालाल बजाज की पुत्री थीं तथा जानकीदेवी प्रसिद्ध समाजसेविका थीं। ये दोनों आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रही थीं। मारवाड़ी बालिका विद्यालय के झंडोत्सव में भी ये दोनों उपस्थित थीं। मदालसा भी पकड़ी गई थी।

4. वृजलाल गोयनका के साहस का उदाहरण दीजिए।

उत्तरवृजलाल गोयनका झंडा लेकर ‘वंदे मातरम्’ बोलते हुए इतने जोश से मोनुमेंट की ओर दौड़ा कि स्वयं ही गिर पड़ा। उसे लाठी मारकर छोड़ दिया गया, फिर भी वह रुका नहीं; अंत में वह दो सौ आदमियों का जुलूस बनाकर लालबाज़ार गया और गिरफ्तार हो गया। यह उसके अद्वितीय साहस का परिचायक है।

5. इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तरइस पाठ से हमें प्रेरणा मिलती है कि यदि समाज संगठित और कृतसंकल्प हो तो वह बड़े-से-बड़े दमन का सामना कर सकता है। देशप्रेम, निर्भयता, बलिदान और एकता के बल पर ही स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है। स्त्रियों का साहस यह सिखाता है कि किसी भी संघर्ष में नारी-शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

दीर्घ उत्तरीय (100-120 शब्द)

6. ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ के आधार पर 26 जनवरी 1931 के दिन कलकत्ता में हुई घटनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में दूसरा स्वतंत्रता दिवस अपूर्व जोश से मनाया गया। बड़े बाज़ार सहित शहर भर के मकानों पर राष्ट्रीय झंडे फहराए गए। पुलिस ने पार्कों-मैदानों को घेरकर पूरी ताकत से गश्त दी। मोनुमेंट के नीचे सभा करने का कौंसिल का नोटिस था, जबकि पुलिस कमिश्नर ने सभा पर रोक लगा रखी थी।चार बजकर दस मिनट पर सुभाष बाबू जुलूस लेकर आए; पुलिस ने लाठीचार्ज किया, फिर भी वे ‘वंदे मातरम्’ बोलते आगे बढ़ते रहे और गिरफ्तार कर लिए गए। स्त्रियाँ सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराती रहीं। बार-बार लाठीचार्ज में लगभग दो सौ लोग घायल हुए और 105 स्त्रियों समेत अनेक लोग गिरफ्तार हुए। संगठित साहस और बलिदान के कारण यह दिन सचमुच अपूर्व बन गया।

7. इस पाठ में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका और साहस पर प्रकाश डालिए।

उत्तरइस पाठ में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका सर्वाधिक प्रेरक एवं साहसपूर्ण है। पुरुषों के साथ-साथ स्त्रियाँ भी जगह-जगह से जुलूस निकालकर निर्धारित स्थानों पर पहुँचीं। मारवाड़ी बालिका विद्यालय की लड़कियों ने झंडोत्सव मनाया, जिसमें जानकीदेवी और मदालसा भी सम्मिलित थीं।स्त्रियाँ बड़ी संख्या में मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराती और घोषणा पढ़ती रहीं। पुलिस की लाठियों और बार-बार की गिरफ्तारियों से भी वे विचलित नहीं हुईं; विमल प्रतिभा जैसी नेत्रियों के नेतृत्व में जुलूस आगे बढ़ता रहा। कुल 105 स्त्रियाँ गिरफ्तार हुईं – कलकत्ता में इतनी स्त्रियों का एक साथ गिरफ्तार होना अपूर्व था। यह सिद्ध करता है कि स्वतंत्रता संग्राम में नारी-शक्ति का योगदान अद्वितीय था।

8. ‘एक संगठित समाज कृतसंकल्प हो तो ऐसा कुछ भी नहीं जो वह न कर सके।’ इस कथन को पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।

उत्तरइस पाठ की घटनाएँ इस कथन को पूर्णतः सिद्ध करती हैं। पुलिस कमिश्नर ने सभा पर पूरी तरह रोक लगा दी थी, पार्क-मैदान घेर लिए गए थे और भारी पुलिस-बल तैनात था। फिर भी कलकत्ता की संगठित जनता पीछे नहीं हटी।स्त्री-पुरुष सभी कृतसंकल्प होकर सामने आए, खुली चुनौती देकर सभा की, झंडा फहराया और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी। लाठीचार्ज, घायल होने और गिरफ्तारियों के बावजूद उनका जोश कम नहीं हुआ। बड़ी संख्या में स्त्रियों का गिरफ्तार होना और जनता का अटूट उत्साह यह दर्शाता है कि जब समाज संगठित और दृढ़-संकल्प हो जाए, तो कोई भी सत्ता या दमन उसे अपने लक्ष्य से नहीं रोक सकता।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ के लेखक कौन हैं?

(क) महात्मा गांधी

(ख) सीताराम सेकसरिया

(ग) सुभाषचंद्र बोस

(घ) जवाहरलाल नेहरू

उत्तर(ख) सीताराम सेकसरिया।

2. यह डायरी किस तिथि की है?

(क) 15 अगस्त 1947

(ख) 26 जनवरी 1930

(ग) 26 जनवरी 1931

(घ) 2 अक्तूबर 1931

उत्तर(ग) 26 जनवरी 1931।

3. ये घटनाएँ किस शहर की हैं?

(क) दिल्ली

(ख) मुंबई

(ग) लाहौर

(घ) कलकत्ता (कोलकाता)

उत्तर(घ) कलकत्ता (कोलकाता)।

4. सुभाष बाबू को पकड़कर कहाँ भेजा गया?

(क) श्रद्धानंद पार्क

(ख) लालबाज़ार लॉकअप

(ग) मोनुमेंट

(घ) चौरंगी

उत्तर(ख) लालबाज़ार लॉकअप।

5. इस दिन कुल कितनी स्त्रियाँ गिरफ्तार की गईं?

(क) 67

(ख) 103

(ग) 105

(घ) 160

उत्तर(ग) 105।

6. केवल प्रचार में कितने रुपये खर्च किए गए थे?

(क) एक हज़ार

(ख) दो हज़ार

(ग) पाँच हज़ार

(घ) दस हज़ार

उत्तर(ख) दो हज़ार।

7. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?

(क) अविनाश बाबू

(ख) हरिश्चंद्र सिंह

(ग) पूर्णोदास

(घ) ज्योतिर्मय गांगुली

उत्तर(ग) पूर्णोदास।

8. कौंसिल के नोटिस के अनुसार झंडा कितने बजे फहराया जाना था?

(क) ठीक चार बजे

(ख) चार बजकर दस मिनट

(ग) चार बजकर चौबीस मिनट

(घ) पाँच बजे

उत्तर(ग) चार बजकर चौबीस मिनट।

9. मदालसा किसकी पुत्री थीं?

(क) सुभाषचंद्र बोस

(ख) जानकीदेवी एवं जमनालाल बजाज

(ग) सीताराम सेकसरिया

(घ) अविनाश बाबू

उत्तर(ख) जानकीदेवी एवं जमनालाल बजाज।

10. लेखक के अनुसार इस दिन का स्वरूप कैसा था?

(क) साधारण

(ख) निराशाजनक

(ग) अपूर्व एवं निराला

(घ) असफल

उत्तर(ग) अपूर्व एवं निराला।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(घ), 4-(ख), 5-(ग), 6-(ख), 7-(ग), 8-(ग), 9-(ख), 10-(ग)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): 26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्ता के लिए अपूर्व था।

कारण (R): इस दिन कलकत्ता में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में (105) स्त्रियाँ एक साथ गिरफ्तार हुईं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को सवेरे से ही घेर लिया था।

कारण (R): पुलिस लोगों के साथ झंडोत्सव मनाना चाहती थी।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – पुलिस ने मैदान इसलिए घेरे थे ताकि लोग सभा न कर सकें, न कि झंडोत्सव मनाने के लिए।

3. अभिकथन (A): सुभाष बाबू पर लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे ‘वंदे मातरम्’ बोलते आगे बढ़ते रहे।

कारण (R): वे निर्भीक एवं दृढ़-संकल्प देशभक्त नेता थे।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): स्त्री समाज ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कारण (R): स्त्रियाँ केवल घरेलू कार्यों तक सीमित रहना चाहती थीं।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – स्त्रियाँ साहसपूर्वक जुलूस, झंडारोहण और गिरफ्तारी में सक्रिय रहीं।

5. अभिकथन (A): डॉ. दासगुप्ता घायल लोगों के फोटो उतरवा रहे थे।

कारण (R): पुलिस के अत्याचार का प्रमाण सुरक्षित रखकर उसे जनता के सामने लाया जा सके।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
अभिकथन-कारण उत्तर-कुंजी: 1-(क), 2-(ग), 3-(क), 4-(ग), 5-(क)

परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • तिथियाँ और संख्याएँ याद रखें – 26 जनवरी 1930 (पहला स्वतंत्रता दिवस), 1931 (इस डायरी का दिन), 105 स्त्रियों की गिरफ्तारी, 4 बजकर 24 मिनट पर झंडारोहण।
  • पात्रों के नाम और भूमिका जोड़कर याद करें – सुभाष बाबू, पूर्णोदास, अविनाश बाबू, मदालसा, जानकीदेवी, विमल प्रतिभा, डॉ. दासगुप्ता।
  • आशय-स्पष्टीकरण में पहले वाक्य का सरल अर्थ लिखें, फिर पाठ के संदर्भ से जोड़ें।
  • विधा ‘डायरी’ है – उत्तरों में दिनांकित घटना-क्रम और व्यक्तिगत अनुभव-शैली का उल्लेख करें।

सामान्य गलतियाँ

  • लेखक को सुभाषचंद्र बोस या गांधी जी लिख देना – लेखक ‘सीताराम सेकसरिया’ हैं।
  • 26 जनवरी 1930 और 1931 की घटनाओं को आपस में मिला देना।
  • संधि-विच्छेद के उत्तर में संधि का प्रकार न लिखना।
  • आशय-स्पष्टीकरण को केवल वाक्य की पुनरावृत्ति बना देना – व्याख्या आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

‘डायरी का एक पन्ना’ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया (1892–1982) हैं, जिन्हें सन् 1962 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

यह डायरी किस दिन की है और इसमें किस घटना का वर्णन है?

यह डायरी 26 जनवरी 1931 की है। इसमें कलकत्ता (कोलकाता) में दूसरी बार मनाए गए स्वतंत्रता दिवस, झंडारोहण, पुलिस के दमन तथा विशेषकर महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों का वर्णन है।

इस दिन को ‘अपूर्व’ क्यों कहा गया है?

क्योंकि कलकत्ता में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में (105) स्त्रियाँ एक साथ गिरफ्तार हुईं और पुलिस के भीषण दमन के बावजूद जनता ने संगठित होकर अपूर्व साहस व जोश दिखाया, जिससे आंदोलन न होने का कलंक धुल गया।

प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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