NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 9: डायरी का एक पन्ना – प्रश्न-उत्तर, सार एवं शब्दार्थ (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 9 ‘डायरी का एक पन्ना’ (लेखक – सीताराम सेकसरिया) का पूरा समाधान देता है – प्रश्न-अभ्यास के सभी उत्तर, पाठ का सार, शब्दार्थ, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण।
लेखक परिचय – सीताराम सेकसरिया
सीताराम सेकसरिया का जन्म सन् 1892 में राजस्थान के नवलगढ़ में हुआ था, किंतु उनका अधिकांश जीवन कलकत्ता (कोलकाता) में बीता। व्यापार-व्यवसाय से जुड़े होने के साथ-साथ वे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक तथा नारी-शिक्षण संस्थाओं के प्रेरक, संस्थापक एवं संचालक रहे। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर सम्मिलित हुए और सत्याग्रह आंदोलन के दौरान जेल भी गए। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के वे निकट रहे। भारत सरकार ने सन् 1962 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया। विशेष बात यह है कि उन्हें विद्यालयी शिक्षा का अवसर नहीं मिला; स्वाध्याय से ही उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा। स्मृतिकण, मन की बात, बीता युग, नयी याद तथा दो भागों में एक कार्यकर्ता की डायरी उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ हैं। सन् 1982 में उनका निधन हुआ।
पाठ का सार
‘डायरी का एक पन्ना’ लेखक सीताराम सेकसरिया की निजी डायरी का 26 जनवरी 1931 का लेखा-जोखा है। यह वह दिन है जब सन् 1930 में पहली बार गुलाम भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था और 1931 में दूसरी बार इसे उत्साह से मनाने की तैयारी हुई। लेखक ने इसे ‘अमर दिन’ कहा है। इस वर्ष कलकत्ता (कोलकाता) के लोगों ने केवल प्रचार में दो हज़ार रुपये खर्च किए तथा घर-घर जाकर कार्यकर्ताओं को समझाया गया।
बड़े बाज़ार के प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था और कई मकान ऐसे सजाए गए थे मानो स्वतंत्रता मिल गई हो। शहर के हर भाग में झंडे लगाए गए थे। दूसरी ओर पुलिस अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त दे रही थी; मोटर लारियों में गोरखे और सारजेंट हर मोड़ पर तैनात थे। पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को सवेरे से ही घेर लिया था। मोनुमेंट के नीचे जहाँ शाम को सभा होनी थी, पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था कि अमुक धारा के अनुसार कोई सभा नहीं हो सकती, जबकि कौंसिल की ओर से नोटिस था कि ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।
ठीक चार बजकर दस मिनट पर सुभाष बाबू जुलूस लेकर आए। भीड़ की अधिकता के कारण पुलिस उन्हें रोक नहीं सकी। मैदान के मोड़ पर पहुँचते ही पुलिस ने लाठियाँ चलानी शुरू कीं; बहुत-से लोग घायल हुए और सुभाष बाबू पर भी लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे जोर-जोर से ‘वंदे मातरम्’ बोलते आगे बढ़ते रहे। इसी बीच स्त्रियाँ मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा रही थीं और घोषणा पढ़ रही थीं। सुभाष बाबू को पकड़कर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।
उसके बाद स्त्रियों ने जुलूस निकाला, जिस पर पुलिस ने फिर डंडे चलाए; धर्मतल्ले के मोड़ पर जुलूस टूट गया और लगभग पचास-साठ स्त्रियाँ वहीं बैठ गईं, जिन्हें पकड़कर लालबाज़ार भेज दिया गया। कुल मिलाकर 105 स्त्रियाँ गिरफ्तार हुईं, जिन्हें रात नौ बजे छोड़ दिया गया। अस्पतालों में लगभग 160 घायल पहुँचे और दो सौ के करीब लोग घायल हुए। बंगाल या कलकत्ता पर यह कलंक था कि यहाँ आंदोलन का काम नहीं हो रहा – वह इस दिन काफी हद तक धुल गया। लेखक के अनुसार आज जो कुछ हुआ वह अपूर्व था, क्योंकि कलकत्ता में अब तक इतनी स्त्रियाँ एक साथ कभी गिरफ्तार नहीं हुई थीं।
मूलभाव
यह पाठ हमारे क्रांतिकारियों और विशेषकर महिला कार्यकर्ताओं की कुर्बानियों की याद दिलाता है। यह उजागर करता है कि यदि समाज संगठित और कृतसंकल्प हो तो ऐसा कोई काम नहीं जिसे वह न कर सके। 26 जनवरी 1930 को मनाया गया पहला स्वतंत्रता दिवस और उसके बाद हर वर्ष की पुनरावृत्ति इस बात का प्रतीक है कि भौतिक रूप से दबे होने पर भी भारतीयों का मन आज़ाद हो चुका था। दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन (अध्यक्ष – जवाहरलाल नेहरू) में ‘पूर्ण स्वराज्य’ का प्रस्ताव पास हुआ और 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान की प्रतिज्ञा की। आज़ादी मिलने के बाद यही दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पुनरावृत्ति | फिर से आना/दोहराया जाना |
| गश्त | पुलिस कर्मचारी का पहरे के लिए घूमना |
| सारजेंट | सेना/पुलिस में एक पद |
| मोनुमेंट | स्मारक |
| कौंसिल | परिषद् |
| चौरंगी | कलकत्ता (कोलकाता) शहर में एक स्थान का नाम |
| वालंटियर | स्वयंसेवक |
| संगीन | गंभीर |
| मदालसा | जानकीदेवी एवं जमनालाल बजाज की पुत्री का नाम |
| लॉकअप | हवालात, बंदीगृह |
| अपूर्व | जो पहले कभी न हुआ हो, अनोखा |
| अलख जगाना | चेतना/जागृति उत्पन्न करना |
| न्योछावर | बलिदान/कुर्बान करना |
| तत्पर | तैयार, उद्यत |
| कानून भंग | कानून तोड़ना (सविनय अवज्ञा) |
| ओपन लड़ाई | खुली/प्रत्यक्ष चुनौती भरी लड़ाई |
| प्रतिज्ञा | दृढ़ संकल्प, प्रण |
| दफ़ा/धारा | कानून का कोई खंड या उपबंध |
| जोश-खरोश | उत्साह एवं उमंग |
| कलंक | दाग, धब्बा, बदनामी |
| कुर्बानी | बलिदान, त्याग |
| कृतसंकल्प | दृढ़ निश्चय वाला |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
मौखिक – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए
1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्त्वपूर्ण था?
2. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?
3. विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
4. लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?
5. पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?
लिखित (क) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए
1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं?
2. ‘आज जो बात थी वह निराली थी’—किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
5. डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
लिखित (ख) – निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए
1. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
2. जुलूस के लालबाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
3. ‘जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
4. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए
1. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है, वह आज बहुत अंश में धुल गया।
2. खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।
भाषा अध्ययन
1. रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार के होते हैं—सरल वाक्य, संयुक्त वाक्य, मिश्र वाक्य। निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए—
सरल वाक्य – दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार जाकर गिरफ्तार हो गया।(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
सरल वाक्य – मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने पर लोग टोलियाँ बना-बनाकर घूमने लगे।(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में भेज दिया गया।
सरल वाक्य – सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।
II. ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।
3. निम्नलिखित शब्दों की संधि कीजिए—
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय (30-40 शब्द)
1. लेखक ने 26 जनवरी के दिन को ‘अमर दिन’ क्यों कहा है?
2. इस आंदोलन में पुलिस का व्यवहार कैसा था?
3. मदालसा और जानकीदेवी कौन थीं?
4. वृजलाल गोयनका के साहस का उदाहरण दीजिए।
5. इस पाठ से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
दीर्घ उत्तरीय (100-120 शब्द)
6. ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ के आधार पर 26 जनवरी 1931 के दिन कलकत्ता में हुई घटनाओं का वर्णन कीजिए।
7. इस पाठ में महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका और साहस पर प्रकाश डालिए।
8. ‘एक संगठित समाज कृतसंकल्प हो तो ऐसा कुछ भी नहीं जो वह न कर सके।’ इस कथन को पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. ‘डायरी का एक पन्ना’ पाठ के लेखक कौन हैं?
(क) महात्मा गांधी
(ख) सीताराम सेकसरिया
(ग) सुभाषचंद्र बोस
(घ) जवाहरलाल नेहरू
2. यह डायरी किस तिथि की है?
(क) 15 अगस्त 1947
(ख) 26 जनवरी 1930
(ग) 26 जनवरी 1931
(घ) 2 अक्तूबर 1931
3. ये घटनाएँ किस शहर की हैं?
(क) दिल्ली
(ख) मुंबई
(ग) लाहौर
(घ) कलकत्ता (कोलकाता)
4. सुभाष बाबू को पकड़कर कहाँ भेजा गया?
(क) श्रद्धानंद पार्क
(ख) लालबाज़ार लॉकअप
(ग) मोनुमेंट
(घ) चौरंगी
5. इस दिन कुल कितनी स्त्रियाँ गिरफ्तार की गईं?
(क) 67
(ख) 103
(ग) 105
(घ) 160
6. केवल प्रचार में कितने रुपये खर्च किए गए थे?
(क) एक हज़ार
(ख) दो हज़ार
(ग) पाँच हज़ार
(घ) दस हज़ार
7. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?
(क) अविनाश बाबू
(ख) हरिश्चंद्र सिंह
(ग) पूर्णोदास
(घ) ज्योतिर्मय गांगुली
8. कौंसिल के नोटिस के अनुसार झंडा कितने बजे फहराया जाना था?
(क) ठीक चार बजे
(ख) चार बजकर दस मिनट
(ग) चार बजकर चौबीस मिनट
(घ) पाँच बजे
9. मदालसा किसकी पुत्री थीं?
(क) सुभाषचंद्र बोस
(ख) जानकीदेवी एवं जमनालाल बजाज
(ग) सीताराम सेकसरिया
(घ) अविनाश बाबू
10. लेखक के अनुसार इस दिन का स्वरूप कैसा था?
(क) साधारण
(ख) निराशाजनक
(ग) अपूर्व एवं निराला
(घ) असफल
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): 26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्ता के लिए अपूर्व था।
कारण (R): इस दिन कलकत्ता में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में (105) स्त्रियाँ एक साथ गिरफ्तार हुईं।
2. अभिकथन (A): पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को सवेरे से ही घेर लिया था।
कारण (R): पुलिस लोगों के साथ झंडोत्सव मनाना चाहती थी।
3. अभिकथन (A): सुभाष बाबू पर लाठियाँ पड़ीं, फिर भी वे ‘वंदे मातरम्’ बोलते आगे बढ़ते रहे।
कारण (R): वे निर्भीक एवं दृढ़-संकल्प देशभक्त नेता थे।
4. अभिकथन (A): स्त्री समाज ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कारण (R): स्त्रियाँ केवल घरेलू कार्यों तक सीमित रहना चाहती थीं।
5. अभिकथन (A): डॉ. दासगुप्ता घायल लोगों के फोटो उतरवा रहे थे।
कारण (R): पुलिस के अत्याचार का प्रमाण सुरक्षित रखकर उसे जनता के सामने लाया जा सके।
परीक्षा-युक्तियाँ & सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- तिथियाँ और संख्याएँ याद रखें – 26 जनवरी 1930 (पहला स्वतंत्रता दिवस), 1931 (इस डायरी का दिन), 105 स्त्रियों की गिरफ्तारी, 4 बजकर 24 मिनट पर झंडारोहण।
- पात्रों के नाम और भूमिका जोड़कर याद करें – सुभाष बाबू, पूर्णोदास, अविनाश बाबू, मदालसा, जानकीदेवी, विमल प्रतिभा, डॉ. दासगुप्ता।
- आशय-स्पष्टीकरण में पहले वाक्य का सरल अर्थ लिखें, फिर पाठ के संदर्भ से जोड़ें।
- विधा ‘डायरी’ है – उत्तरों में दिनांकित घटना-क्रम और व्यक्तिगत अनुभव-शैली का उल्लेख करें।
सामान्य गलतियाँ
- लेखक को सुभाषचंद्र बोस या गांधी जी लिख देना – लेखक ‘सीताराम सेकसरिया’ हैं।
- 26 जनवरी 1930 और 1931 की घटनाओं को आपस में मिला देना।
- संधि-विच्छेद के उत्तर में संधि का प्रकार न लिखना।
- आशय-स्पष्टीकरण को केवल वाक्य की पुनरावृत्ति बना देना – व्याख्या आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
‘डायरी का एक पन्ना’ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक सीताराम सेकसरिया (1892–1982) हैं, जिन्हें सन् 1962 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
यह डायरी किस दिन की है और इसमें किस घटना का वर्णन है?
यह डायरी 26 जनवरी 1931 की है। इसमें कलकत्ता (कोलकाता) में दूसरी बार मनाए गए स्वतंत्रता दिवस, झंडारोहण, पुलिस के दमन तथा विशेषकर महिला कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों का वर्णन है।
इस दिन को ‘अपूर्व’ क्यों कहा गया है?
क्योंकि कलकत्ता में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में (105) स्त्रियाँ एक साथ गिरफ्तार हुईं और पुलिस के भीषण दमन के बावजूद जनता ने संगठित होकर अपूर्व साहस व जोश दिखाया, जिससे आंदोलन न होने का कलंक धुल गया।
प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
