NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit (Shemushi) पाठः 2: बुद्धिर्बलवती सदा (NCERT 2026–27)
This page gives the complete solution for Class 10 Sanskrit Shemushi (शेमुषी, द्वितीयो भागः) पाठः 2 ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ – a witty कथा (gadya) adapted from the famous tale-collection शुकसप्ततिः, in which a clever woman बुद्धिमती frightens away a tiger by her presence of mind – with its original पाठ-परिचय, सार (Hindi summary), the two श्लोक with अन्वय एवं भावार्थ, शब्दार्थ table, and exam-ready answers to every question of the अभ्यासः, plus extra questions, 10 MCQs, अभिकथन-कारण (Assertion–Reason) and FAQs (NCERT 2026–27).
पाठ-परिचय (Chapter Introduction)
शेमुषी (द्वितीयो भागः) का द्वितीय पाठ ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ प्रसिद्ध कथाग्रन्थ ‘शुकसप्ततिः’ से सम्पादन करके संगृहीत किया गया है। इस पाठांश में अपने दो छोटे-छोटे पुत्रों के साथ जंगल के मार्ग से पिता के घर की ओर जाती हुई बुद्धिमती नामक महिला का मतिकौशल (बुद्धि-चातुर्य) दर्शाया गया है। वह सामने आए हुए सिंह (बाघ) को भी डराकर भगा देती है। यह कथा नीतिनिपुण शुक एवं सारिका के संवाद के माध्यम से सद्वृत्ति (अच्छे आचरण) के विकास के लिए प्रेरित करती है। पाठ का केन्द्रीय सन्देश यह है कि बुद्धि सदा बलवती (बलशालिनी) होती है – बुद्धि के बल पर मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट से भी मुक्त हो सकता है।
सार (Hindi Summary)
‘बुद्धिर्बलवती सदा’ पाठ ‘शुकसप्ततिः’ नामक कथाग्रन्थ से लिया गया है। देउल नामक गाँव में राजसिंह नामक राजपुत्र रहता था। एक बार किसी आवश्यक कार्यवश उसकी पत्नी बुद्धिमती अपने दोनों पुत्रों के साथ पिता के घर की ओर चली। मार्ग के घने जंगल में उसने एक बाघ देखा। बाघ को आता देख उसने धृष्टतापूर्वक अपने दोनों पुत्रों को थप्पड़ मारते हुए कहा – ‘एक ही बाघ के लिए तुम दोनों क्यों झगड़ रहे हो? इस एक को बाँटकर खा लो; बाद में दूसरा कोई दिखाई देगा।’
यह सुनकर बाघ को लगा कि यह कोई बाघ को मारने वाली (व्याघ्रमारी) स्त्री है। वह भयभीत होकर भाग गया। भागते हुए बाघ को देखकर एक धूर्त शृगाल (जम्बुक) ने हँसते हुए पूछा कि वह किस भय से भाग रहा है। बाघ ने सारी बात बताई। तब शृगाल ने उसका विश्वास दिलाया कि वह स्त्री धूर्त है और उसे साथ ले चलने को कहा। बाघ को डर था कि कहीं शृगाल उसे धोखा न दे, इसलिए उसने शृगाल को अपने गले में बँधवा लिया।
शृगाल के साथ लौटते हुए बाघ को दूर से देखकर बुद्धिमती ने तुरन्त बुद्धि का प्रयोग किया। उसने जम्बुक (शृगाल) पर आक्षेप करते हुए, अँगुली से तर्जना करते हुए कहा – ‘अरे धूर्त! तूने तो पहले मुझे तीन बाघ देने का वचन दिया था; अब विश्वास दिलाकर केवल एक को लाकर कैसे जा रहा है, अभी बता!’ यह सुनते ही भयंकर व्याघ्रमारी (बुद्धिमती) तेजी से दौड़ी और गले में शृगाल बँधा हुआ बाघ भी अचानक भाग गया। इस प्रकार बुद्धिमती बुद्धि के बल पर पुनः बाघ के भय से मुक्त हो गई। अतः कहा गया है – बुद्धिर्बलवती सदा – हे सुन्दरि! सभी कार्यों में सदा बुद्धि ही बलवती होती है।
श्लोक अन्वय एवं भावार्थ
अन्योऽपि बुद्धिमाँल्लोके मुच्यते महतो भयात्॥
अन्वयः – सा भामिनी निजबुद्ध्या व्याघ्रस्य भयात् विमुक्ता। लोके अन्यः अपि बुद्धिमान् महतः भयात् मुच्यते।
व्याघ्रोऽपि सहसा नष्टः गलबद्धशृगालकः॥
एवं प्रकारेण बुद्धिमती व्याघ्रजाद् भयात् पुनरपि मुक्ताऽभवत्। अत एव उच्यते –
बुद्धिर्बलवती तन्वि सर्वकार्येषु सर्वदा॥
अन्वयः – इति उक्त्वा भयङ्करा व्याघ्रमारी तूर्णं धाविता। गलबद्धशृगालकः व्याघ्रः अपि सहसा नष्टः। हे तन्वि! सर्वदा सर्वकार्येषु बुद्धिः बलवती (भवति)।
शब्दार्थ (Word Meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | अर्थः (हिन्दी) | Meaning (English) |
|---|---|---|
| पुत्रद्वयोपेता | दोनों पुत्रों के साथ | With both sons |
| कानने | जंगल में, वन में | In the forest |
| ददर्श | देखा | Saw |
| धाष्ट्यार्त् | ढिठाई से, धृष्टतापूर्वक | With audacity |
| चपेटया | थप्पड़ से | With a slap |
| प्रहृत्य | मारकर, प्रहार करके | After striking |
| जगाद | कहा, बोली | Said |
| कलहः | झगड़ा, विवाद | Quarrel |
| विभज्य | बाँटकर, अलग-अलग करके | Having divided |
| व्याघ्रमारी | बाघ को मारने वाली स्त्री | Tiger-killer lady |
| नष्टः | भाग गया | Ran away / fled |
| भामिनी | कोपवती/सुन्दर स्त्री | Furious / fair woman |
| जम्बुकः | शृगाल, सियार | Jackal |
| गूढप्रदेशम् | गुप्त स्थान में | To a hidden place |
| आवेदितम् | बताया, सूचित किया | Revealed / informed |
| प्रत्यक्षम् | सामने, आँखों के समक्ष | In front of the eyes |
| अत्तुम् | खाने के लिए | To eat |
| ईक्षते | देखती है | Sees / looks |
| वेला | समय; (यहाँ) शर्त | Time / condition |
| आक्षिपन्ती | आक्षेप/भर्त्सना करती हुई | Scolding / reproaching |
| तर्जयन्ती | धमकाती हुई, डाँटती हुई | Threatening |
| तूर्णम् | शीघ्र, जल्दी | Quickly |
| गलबद्धशृगालकः | गले में शृगाल बँधा हुआ | With a jackal tied to neck |
अभ्यासः के उत्तर (Exercise Solutions)
1. एकपदेन उत्तरं लिखत —
(क) बुद्धिमती कुत्र व्याघ्रं ददर्श?
(ख) भामिनी कया विमुक्ता?
(ग) सर्वदा सर्वकार्येषु का बलवती?
(घ) व्याघ्रः कस्मात् बिभेति?
(ङ) प्रत्युत्पन्नमतिः बुद्धिमती किम् आक्षिपन्ती उवाच?
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत —
(क) बुद्धिमती केन उपेता पितृगृहं प्रति चलिता?
(ख) व्याघ्रः किं विचार्य पलायितः?
(ग) लोके महतो भयात् कः मुच्यते?
(घ) जम्बुकः किं वदन् व्याघ्रस्य उपहासं करोति?
(ङ) बुद्धिमती शृगालं किम् उक्तवती?
3. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
(क) तत्र राजसिंहो नाम राजपुत्रः वसति स्म।
(ख) बुद्धिमती चपेटया पुत्रौ प्रहृतवती।
(ग) व्याघ्रं दृष्ट्वा धूर्तः शृगालः अवदत्।
(घ) त्वं मानुषात् बिभेषि।
(ङ) पुरा त्वया मह्यं व्याघ्रत्रयं दत्तम्।
4. अधोलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमानुसारेण योजयत —
(दिए गए वाक्य) (क) व्याघ्रः व्याघ्रमारी इयमिति मत्वा पलायितः। (ख) प्रत्युत्पन्नमतिः सा शृगालम् आक्षिपन्ती उवाच। (ग) जम्बुककृतोत्साहः व्याघ्रः पुनः काननम् आगच्छत्। (घ) मार्गे सा एकं व्याघ्रम् अपश्यत्। (ङ) व्याघ्रं दृष्ट्वा सा पुत्रौ ताडयन्ती उवाच – अधुना एकमेव व्याघ्रः विभज्य भुज्यताम्। (च) बुद्धिमती पुत्रद्वयेन उपेता पितृगृहं प्रति चलिता। (छ) ‘त्वं व्याघ्रत्रयम् आनेतुम्’ प्रतिज्ञाय एकमेव आनीतवान्। (ज) गलबद्धशृगालकः व्याघ्रः पुनः पलायितः।
5. सन्धिं/सन्धिविच्छेदं वा कुरुत —
| पदम् | सन्धिः / विच्छेदः (उत्तर) |
|---|---|
| (क) पितृगृहम् | पितुः + गृहम् |
| (ख) एकैकः | एक + एकः |
| (ग) अन्योऽपि | अन्यः + अपि |
| (घ) इत्युक्त्वा | इति + उक्त्वा |
| (ङ) यत्रास्ते | यत्र + आस्ते |
6. अधोलिखितानां पदानाम् अर्थं कोष्ठकात् चित्वा लिखत —
| पदम् | विकल्पाः | उत्तर |
|---|---|---|
| (क) ददर्श | (दर्शितवान्, दृष्टवान्) | दृष्टवान् |
| (ख) जगाद | (अकथयत्, अगच्छत्) | अकथयत् |
| (ग) ययौ | (याचितवान्, गतवान्) | गतवान् |
| (घ) अत्तुम् | (खादितुम्, आविष्कर्तुम्) | खादितुम् |
| (ङ) मुच्यते | (मुक्तो भवति, मग्नो भवति) | मुक्तो भवति |
| (च) ईक्षते | (पश्यति, इच्छति) | पश्यति |
7. (अ) पाठात् चित्वा पर्यायपदं लिखत —
| पदम् | पर्यायपदम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) वनम् | काननम् |
| (ख) शृगालः | जम्बुकः |
| (ग) शीघ्रम् | तूर्णम् |
| (घ) पत्नी | भार्या (भामिनी) |
| (ङ) गच्छसि | यासि |
7. (आ) पाठात् चित्वा विपरीतार्थकं पदं लिखत —
| पदम् | विपरीतार्थकं पदम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) प्रथमः | द्वितीयः |
| (ख) उक्त्वा | श्रुत्वा |
| (ग) अधुना | पुरा |
| (घ) अवेला | वेला |
| (ङ) बुद्धिहीना | बुद्धिमती |
परियोजनाकार्यम् — बुद्धिमत्याः स्थाने आत्मानं परिकल्प्य तद्भावनां स्वभाषया लिखत।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. यह कथा किस ग्रन्थ से ली गई है तथा उसमें क्या दर्शाया गया है?
2. बुद्धिमती ने बाघ को देखकर क्या किया?
3. शृगाल ने बाघ को पुनः लौटने के लिए कैसे राज़ी किया?
4. बुद्धिमती ने दूसरी बार बुद्धि का प्रयोग कैसे किया?
5. पाठ का केन्द्रीय सन्देश क्या है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ कथा का सार अपने शब्दों में लिखिए।
7. इस कथा से हमें क्या-क्या शिक्षाएँ मिलती हैं? विस्तार से लिखिए।
8. बाघ के भयभीत होकर भागने के क्या-क्या कारण थे?
MCQ एवं अभिकथन-कारण
1. यह कथा किस ग्रन्थ से ली गई है?
(क) पञ्चतन्त्रम्
(ख) शुकसप्ततिः
(ग) हितोपदेशः
(घ) कथासरित्सागरः
2. बुद्धिमती किसकी पत्नी थी?
(क) जम्बुकस्य
(ख) राजसिंहस्य
(ग) व्याघ्रस्य
(घ) हरिदत्तस्य
3. बुद्धिमती किसके साथ पिता के घर जा रही थी?
(क) पतिना सह
(ख) सख्या सह
(ग) पुत्रद्वयेन सह
(घ) एकाकिनी
4. ‘जम्बुकः’ पद का अर्थ है —
(क) सिंहः
(ख) शृगालः
(ग) गजः
(घ) मृगः
5. बाघ ने स्वयं को धोखे से बचाने के लिए शृगाल को कहाँ बँधवाया?
(क) पुच्छे
(ख) गले में (गले)
(ग) पादे
(घ) उदरे
6. बुद्धिमती ने अपने पुत्रों को किससे मारा?
(क) दण्डेन
(ख) चपेटया
(ग) पाषाणेन
(घ) रज्ज्वा
7. बुद्धिमती ने शृगाल पर क्या आरोप लगाया?
(क) एक बाघ देने का वचन देकर तीन लाया
(ख) तीन बाघ देने का वचन देकर केवल एक लाया
(ग) बाघ चुरा लिया
(घ) पुत्रों को मार डाला
8. ‘तूर्णम्’ पद का अर्थ है —
(क) धीरे
(ख) शीघ्र
(ग) सदा
(घ) कदाचित्
9. इस पाठ के अनुसार सदा बलवती कौन होती है?
(क) शक्तिः
(ख) बुद्धिः
(ग) सम्पत्तिः
(घ) सेना
10. श्लोक के अनुसार बुद्धिमान् मनुष्य किससे मुक्त हो जाता है?
(क) धनात्
(ख) महतो भयात्
(ग) सुखात्
(घ) कार्यात्
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): बाघ बुद्धिमती को देखकर भयभीत होकर भाग गया।
कारण (R): बाघ ने बुद्धिमती को बाघों को मारकर खाने वाली (व्याघ्रमारी) समझ लिया।
2. अभिकथन (A): बाघ ने शृगाल को अपने गले में बँधवा लिया।
कारण (R): बाघ को भय था कि कहीं शृगाल मार्ग में उसे धोखा देकर भाग न जाए।
3. अभिकथन (A): बुद्धिमती बुद्धि के बल पर बाघ के भय से मुक्त हो गई।
कारण (R): शारीरिक बल बुद्धि-बल से सदा श्रेष्ठ होता है।
4. अभिकथन (A): शृगाल ने हँसते हुए बाघ का उपहास किया।
कारण (R): शृगाल को आश्चर्य था कि बाघ मनुष्य से भी भयभीत हो रहा है।
5. अभिकथन (A): दूसरी बार भी बाघ शृगाल समेत भाग गया।
कारण (R): बुद्धिमती ने ऐसा दिखाया मानो शृगाल उसके साथ मिलकर बाघ को लाया हो।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ (Exam Tips)
- कथा का घटनाक्रम (sequence) क्रम से याद रखें – घटनाक्रम-योजना (प्रश्न 4) का सीधा प्रश्न आता है।
- दोनों श्लोक अन्वय सहित कण्ठस्थ करें – भावार्थ एवं अन्वय के प्रश्न इन्हीं से आते हैं।
- शब्दार्थ हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें – चपेटया, तूर्णम्, जम्बुकः, ददर्श आदि।
- सन्धि-विच्छेद में ‘इत्युक्त्वा = इति + उक्त्वा’, ‘अन्योऽपि = अन्यः + अपि’ का अभ्यास करें।
- ‘एकपदेन उत्तरम्’ में एक ही शब्द लिखें तथा संस्कृत-उत्तर में सही विभक्ति का प्रयोग करें।
सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)
- ‘जम्बुकः’ (शृगाल/सियार) को बाघ या सिंह समझ लेना।
- घटनाक्रम में दूसरी बार के भागने को पहले रख देना।
- संयुक्ताक्षर लिखने में भूल – ‘व्याघ्रः’, ‘शृगालः’, ‘गलबद्धशृगालकः’ शुद्ध लिखें।
- शृगाल को कौन ले गया – इसमें भ्रम; वास्तव में बाघ ने स्वयं उसे गले में बँधवाया।
- प्रश्ननिर्माण में स्थूलपद के अनुसार गलत प्रश्नवाचक (कः/कौ/किम्/कस्मात्) का चयन करना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शेमुषी कक्षा 10 का दूसरा पाठ ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ किस ग्रन्थ से लिया गया है और इसका मुख्य भाव क्या है?
यह पाठ प्रसिद्ध कथाग्रन्थ ‘शुकसप्ततिः’ से सम्पादित कर संकलित किया गया है। इसका मुख्य भाव है – ‘बुद्धिर्बलवती सदा’ अर्थात् बुद्धि सदा बलवती होती है। बुद्धिमती नामक स्त्री अपनी बुद्धि से बलवान् बाघ को भी डराकर भगा देती है।
बुद्धिमती ने बाघ को किस प्रकार दो बार भगाया?
पहली बार उसने पुत्रों को थप्पड़ मारते हुए बाघ को बाँटकर खाने की बात कही, जिससे बाघ उसे व्याघ्रमारी समझकर भाग गया। दूसरी बार लौटते बाघ को देख उसने शृगाल पर तीन बाघ देने का झूठा वादा करने का आरोप लगाया, जिससे बाघ शृगाल समेत भाग गया।
इस कथा से क्या शिक्षा मिलती है?
इस कथा से शिक्षा मिलती है कि बुद्धि शारीरिक बल से श्रेष्ठ है तथा संकट के समय धैर्य एवं प्रत्युत्पन्नमति (समयसूचकता) से काम लेना चाहिए। बुद्धि के बल पर मनुष्य बड़े-से-बड़े भय एवं विपत्ति से भी बच सकता है।
कथा-अंश, श्लोक, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT शेमुषी (द्वितीयो भागः) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
