NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit (Shemushi) पाठः 4: जननी तुल्यवत्सला (NCERT 2026–27)

This page gives the complete solution for Class 10 Sanskrit Shemushi (शेमुषी, द्वितीयो भागः) Chapter 4 ‘जननी तुल्यवत्सला’ – a gद्य (prose) कथा drawn from the वनपर्व of महर्षि वेदव्यास’s महाभारत, in which गोमाता सुरभि and देवराज इन्द्र converse to show that a mother loves all her offspring equally, yet has greater compassion for the weak – with original सार/भावार्थ, शब्दार्थ, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः, plus extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs (NCERT 2026–27).

कक्षा (Class): 10 विषय (Subject): संस्कृत (Sanskrit) पुस्तक (Book): Shemushi 2 (शेमुषी द्वितीयो भागः) पाठः (Chapter): 4 पाठ-नाम: जननी तुल्यवत्सला सत्र (Session): 2026–27

पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)

शेमुषी (द्वितीयो भागः) कक्षा 10 का चतुर्थ पाठ ‘जननी तुल्यवत्सला’ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रन्थ महाभारत के वनपर्व से लिया गया एक गद्यांश है। यह कथा सभी प्राणियों के प्रति समदृष्टि-भावना का बोध कराती है। एक किसान दो बैलों से खेत जोत रहा था; उनमें से एक दुर्बल बैल थककर भूमि पर गिर पड़ा। किसान उसे तोदन (कष्ट) देकर बार-बार उठाने का प्रयत्न करता रहा। अपने इस पुत्र (बैल) की दीन दशा देखकर समस्त गौओं की माता सुरभि की आँखों से आँसू बहने लगे। देवराज इन्द्र के पूछने पर सुरभि ने उत्तर दिया कि यद्यपि उसके सहस्रों पुत्र हैं, फिर भी इस दुर्बल पुत्र के प्रति उसका वात्सल्य अधिक है; क्योंकि जननी सभी सन्तानों के प्रति समान रूप से वत्सल होती है, किन्तु दीन (दुर्बल) पुत्र पर माता की कृपा स्वभावतः ही अधिक होती है। पाठ का केन्द्रीय भाव यही मातृ-वात्सल्य एवं समदृष्टि है।

पाठ-परिचय / प्रसंग

प्रस्तुत पाठ महर्षि वेदव्यास विरचित महाभारत के वनपर्व से उद्धृत है। महाभारत में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो आज भी उपादेय हैं। इस कथा में व्यासजी ने धृतराष्ट्र को यह सन्देश देने का प्रयास किया है कि एक पिता होने के नाते अपने पुत्रों के साथ-साथ अपने भतीजों (पाण्डवों) के हित का ध्यान रखना भी उचित है। इसी प्रसंग में गाय के मातृत्व की चर्चा करते हुए गोमाता सुरभि एवं देवराज इन्द्र (वासव/कौशिक/आखण्डल) के संवाद के माध्यम से बताया गया है कि माता के लिए सभी सन्तानें बराबर होती हैं, उसके हृदय में सबके लिए समान स्नेह होता है, फिर भी जो सन्तान दुर्बल होती है उसके प्रति माता का प्रेम अधिक प्रगाढ़ हो जाता है। कथा का आधार महाभारत के वनपर्व (दशम अध्याय, श्लोक 8 से 16 तक) में है।

सार एवं भावार्थ (Summary)

एक किसान दो बैलों से खेत की जुताई कर रहा था। उन दोनों बैलों में से एक बैल शरीर से दुर्बल था और तेज़ गति से चलने में असमर्थ था। अतः किसान उस दुर्बल बैल को तोदन (कष्टप्रद आघात) देकर, धकेलते हुए चला रहा था। वह दुर्बल बैल हल को ढोते-ढोते चलने में असमर्थ होकर खेत में गिर पड़ा। क्रुद्ध किसान ने उसे उठाने के लिए बहुत बार प्रयत्न किया, फिर भी वह बैल नहीं उठा।

भूमि पर गिरे अपने इस पुत्र (बैल) को देखकर समस्त गौओं की माता सुरभि की दोनों आँखों से आँसू बहने लगे। सुरभि की यह अवस्था देखकर देवराज इन्द्र ने पूछा – ‘हे शुभे! तुम इस प्रकार क्यों रो रही हो? बताओ।’ तब सुरभि बोली – ‘हे देवराज! आपको कहीं कोई विपत्ति तो नहीं दिखती; किन्तु मैं तो अपने पुत्र के लिए शोक करती हूँ, इसी कारण रो रही हूँ, हे कौशिक! हे वासव! अपने पुत्र की दीन दशा देखकर मैं रो रही हूँ। वह किसान इसे दीन जानते हुए भी बहुत प्रकार से पीड़ित कर रहा है। वह कठिनाई से भार उठा रहा है। दूसरे बैल के समान जुए (धुरा) को ढोने में यह असमर्थ है। क्या आप यह नहीं देख रहे?’

भावार्थ: इन्द्र ने आश्चर्य से पूछा – ‘हे भद्रे! तुम्हारे तो हज़ारों पुत्र हैं; फिर भी इसी एक पुत्र में तुम्हारा ऐसा वात्सल्य क्यों है?’ तब सुरभि ने उत्तर दिया – ‘हे देव! यदि मेरा वात्सल्य सहस्र पुत्रों में सर्वत्र समान भी है, तो भी दीन सन्तान पर स्वभाव से ही अधिक कृपा होती है। यह सत्य है कि मेरी अनेक सन्तानें हैं, फिर भी मैं इस पुत्र में विशेष रूप से आत्म-वेदना का अनुभव करती हूँ; क्योंकि यह दूसरों से दुर्बल है। समस्त सन्तानों में माता समान रूप से वत्सल ही होती है, फिर भी दुर्बल पुत्र पर माता की कृपा सहज ही अधिक होती है।’ सुरभि के ये वचन सुनकर इन्द्र का हृदय भी द्रवित हो गया। उन्होंने उसे सान्त्वना देते हुए कहा – ‘जाओ वत्से! सब कल्याण होगा।’ शीघ्र ही प्रचण्ड वायु एवं मेघ-गर्जना के साथ घनघोर वर्षा होने लगी और लोगों के देखते-देखते सर्वत्र जल-प्रलय जैसी स्थिति हो गई। तब किसान हर्ष के अतिरेक से जुताई का काम छोड़कर दोनों बैलों को लेकर घर लौट गया। इस प्रकार यह कथा सिद्ध करती है कि जननी सभी सन्तानों के प्रति समान वत्सल होती है, परन्तु दीन पुत्र के प्रति वही माता और भी अधिक करुणार्द्र-हृदय हो जाती है।

अपत्येषु च सर्वेषु जननी तुल्यवत्सला ।
पुत्रे दीने तु सा माता कृपाऽऽर्द्रहृदया भवेत् ॥
— महाभारत (वनपर्व)

शब्दार्थ (Word-meanings)

शब्दः (Sanskrit)अर्थः (हिन्दी)English meaning
बलीवर्दाभ्याम्दो बैलों सेBy two bullocks / oxen
क्षेत्रकर्षणम्खेत की जुताईPloughing the field
जवेनतीव्र गति सेWith speed
तोदनेनकष्ट/आघात देने सेBy goading / torturing
नुदन्धकेलते हुए, बलात् प्रेरित करते हुएPushing / pulling
हलमूढ्वाहल को उठाकर/ढोकरCarrying the plough (yoke)
पपातगिर पड़ाFell down
कृषीवलःकिसानFarmer
उत्थापयितुम्उठाने के लिएTo raise / uplift
वृषःबैलBullock / ox
धेनूनाम्गौओं कीOf the cows
नेत्राभ्याम्दोनों आँखों सेFrom both eyes
अश्रूणिआँसूTears
आविरासन्प्रकट हुए, बह निकलेAppeared / flowed
सुराधिपःदेवताओं का राजा (इन्द्र)King of the gods (Indra)
वासवःइन्द्र, देवराजIndra
कृच्छ्रेणकठिनाई सेWith difficulty
धुरम्जुआ, धुराYoke
वोढुम्ढोने के लिएTo carry / bear
प्रत्यवोचत्उत्तर दियाReplied
नूनम्निश्चय हीCertainly
सहस्रम्हज़ारA thousand
वात्सल्यम्स्नेह, ममताAffection
अपत्यानिसन्तानेंOffspring / children
विशिष्यविशेष रूप सेSpecially
तुल्यवत्सलासमान रूप से स्नेह करने वालीEqually affectionate
असान्त्वयत्सान्त्वना दीConsoled
अचिरात्शीघ्र हीSoon
चण्डवातेनप्रचण्ड (तीव्र) वायु सेBy a swift / fierce wind
मेघरवैःबादलों की गर्जना सेBy thundering of clouds
प्रवर्षःघनघोर वर्षाHeavy rain
जलोपप्लवःजल-प्रलय, जल द्वारा तबाहीFlood / deluge
त्रिदशाधिपःदेवताओं का राजा (इन्द्र)King of the gods (Indra)

अभ्यासः के उत्तर (Exercise Solutions)

1. एकपदेन उत्तरं लिखत —

(क) वृषभः दीनः इति जानन्नपि कः तं नुदन् आसीत् ?

उत्तरकृषकः (कृषीवलः) ।

(ख) वृषभः कुत्र पपात ?

उत्तरक्षेत्रे

(ग) दुर्बले सुते कस्याः अधिका कृपा भवति ?

उत्तरमातुः (जनन्याः) ।

(घ) कयोः एकः शरीरेण दुर्बलः आसीत् ?

उत्तरबलीवर्दयोः (वृषभयोः) ।

(ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह कः समजायत ?

उत्तरप्रवर्षः

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत —

(क) कृषकः किं करोति स्म ?

उत्तरकृषकः बलीवर्दाभ्यां क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत् । (अर्थात् किसान दो बैलों से खेत जोत रहा था।)

(ख) माता सुरभिः किमर्थम् अश्रूणि मुञ्चति स्म ?

उत्तरमाता सुरभिः स्वपुत्रस्य (दुर्बलवृषभस्य) दीनाम् अवस्थां दृष्ट्वा अश्रूणि मुञ्चति स्म । (अपने दीन पुत्र की दशा देखकर वह आँसू बहा रही थी।)

(ग) सुरभिः इन्द्रस्य प्रश्नस्य किमुत्तरं ददाति ?

उत्तरसुरभिः प्रत्यवोचत् – ‘यद्यपि सहस्रेषु पुत्रेषु मम वात्सल्यं समानम् अस्ति, तथापि दीने सुते मातुः अधिका कृपा सहजा एव भवति’ इति । (अर्थात् दुर्बल पुत्र पर माता की कृपा स्वभाव से ही अधिक होती है।)

(घ) मातुः अधिका कृपा कस्मिन् भवति ?

उत्तरमातुः अधिका कृपा दीने (दुर्बले) सुते भवति । (माता की अधिक कृपा दुर्बल पुत्र पर होती है।)

(ङ) इन्द्रः दुर्बलवृषभस्य कष्टानि अपाकर्तुं किं कृतवान् ?

उत्तरइन्द्रः चण्डवातेन मेघरवैः सह प्रवर्षम् अकरोत्, येन सर्वत्र जलोपप्लवः समजायत । (इन्द्र ने प्रचण्ड वायु एवं मेघ-गर्जना सहित घनघोर वर्षा की, जिससे किसान जुताई छोड़कर बैलों को लेकर घर लौट गया।)

(च) जननी कीदृशी भवति ?

उत्तरजननी सर्वेषु अपत्येषु तुल्यवत्सला भवति, दीने सुते च कृपार्द्रहृदया भवति । (माता सभी सन्तानों पर समान स्नेह करने वाली तथा दीन पुत्र पर करुणार्द्र होती है।)

(छ) पाठेऽस्मिन् कयोः संवादः विद्यते ?

उत्तरपाठेऽस्मिन् सुरभेः (गोमातुः) इन्द्रस्य (वासवस्य) च संवादः विद्यते ।

3. ‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तैः समानार्थकपदैः कुरुत —

‘क’ स्तम्भः‘ख’ स्तम्भः (विकल्पाः)
(क) कृच्छ्रेण(i) वृषभः
(ख) चक्षुर्भ्याम्(ii) वासवः
(ग) जवेन(iii) नेत्राभ्याम्
(घ) इन्द्रः(iv) अचिरम्
(ङ) पुत्रः(v) द्रुतगत्या
(च) शीघ्रम्(vi) काठिन्येन
(छ) बलीवर्दः(vii) सुतः
सही मेलनम् (उत्तर) (क) कृच्छ्रेण → (vi) काठिन्येन (ख) चक्षुर्भ्याम् → (iii) नेत्राभ्याम् (ग) जवेन → (v) द्रुतगत्या (घ) इन्द्रः → (ii) वासवः (ङ) पुत्रः → (vii) सुतः (च) शीघ्रम् → (iv) अचिरम् (छ) बलीवर्दः → (i) वृषभः

4. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —

(क) सः कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति ।

उत्तरसः कथम् भारम् उद्वहति ?

(ख) सुराधिपः तम् अपृच्छत् ।

उत्तरकः तम् अपृच्छत् ?

(ग) अयम् अन्येभ्यः दुर्बलः ।

उत्तरअयम् केभ्यः दुर्बलः ?

(घ) धेनूनाम् माता सुरभिः आसीत् ।

उत्तरकासाम् माता सुरभिः आसीत् ?

(ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा दुःखी आसीत् ।

उत्तरसहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा कीदृशी आसीत् ?

5. रेखाङ्कितपदे यथास्थानं सन्धिं विच्छेदं वा कुरुत —

(क) कृषकः क्षेत्रकर्षणं कुर्वन्+आसीत्

उत्तर (सन्धिः)कुर्वन्+आसीत् = कुर्वन्नासीत्

(ख) तयोरेकः वृषभः दुर्बलः आसीत् ।

उत्तर (विच्छेदः)तयोरेकः = तयोः + एकः

(ग) तथापि वृषः न+उत्थितः

उत्तर (सन्धिः)न+उत्थितः = नोत्थितः

(घ) सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम् ?

उत्तरवात्सल्यम् + कथम् → (पदद्वयं यथावत्) वात्सल्यं कथम् (अनुस्वार-रूपेण मकारस्य परसवर्णः) ।

(ङ) तथा+अपि+अहम्+एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि ।

उत्तर (सन्धिः)तथा+अपि+अहम्+एतस्मिन् = तथाप्यहमेतस्मिन्

(च) मम बहूनि+अपत्यानि सन्ति ।

उत्तर (सन्धिः)बहूनि+अपत्यानि = बहून्यपत्यानि

(छ) सर्वत्र जलोपप्लवः सञ्जातः ।

उत्तर (विच्छेदः)जलोपप्लवः = जल + उपप्लवः

6. अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम् —

(क) सा च अवदत् – भोः वासव! अहम् भृशं दुःखिता अस्मि ।

उत्तरसासुरभये (गोमात्रे) प्रयुक्तम् ।

(ख) पुत्रस्य दैन्यं दृष्ट्वा अहम् रोदिमि ।

उत्तरअहम्सुरभये (गोमात्रे) प्रयुक्तम् ।

(ग) सः दीनः इति जानन् अपि कृषकः तं पीडयति ।

उत्तरतम्दुर्बलवृषभाय (वृषभाय) प्रयुक्तम् ।

(घ) मम बहूनि अपत्यानि सन्ति । (‘मम’)

उत्तरममसुरभये (गोमात्रे) प्रयुक्तम् ।

(ङ) सः च ताम् एवम् असान्त्वयत् ।

उत्तरताम्सुरभये (गोमात्रे) प्रयुक्तम् ।

(च) सहस्रेषु पुत्रेषु सत्स्वपि तव अस्मिन् प्रीतिः अस्ति ।

उत्तरतवसुरभये (गोमात्रे) प्रयुक्तम् ।

7. ‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं लिखितम्, ‘ख’ स्तम्भे पुनः विशेष्यपदम् । तयोः मेलनं कुरुत —

‘क’ स्तम्भः (विशेषणम्)‘ख’ स्तम्भः (विशेष्यम्)
(क) कश्चित्(i) वृषभम्
(ख) दुर्बलम्(ii) कृपा
(ग) क्रुद्धः(iii) कृषीवलः
(घ) सहस्राधिकेषु(iv) आखण्डलः
(ङ) अभ्यधिका(v) जननी
(च) विस्मितः(vi) पुत्रेषु
(छ) तुल्यवत्सला(vii) कृषकः
सही मेलनम् (उत्तर) (क) कश्चित् → (iii) कृषीवलः (ख) दुर्बलम् → (i) वृषभम् (ग) क्रुद्धः → (vii) कृषकः (घ) सहस्राधिकेषु → (vi) पुत्रेषु (ङ) अभ्यधिका → (ii) कृपा (च) विस्मितः → (iv) आखण्डलः (छ) तुल्यवत्सला → (v) जननी

अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. यह पाठ किस ग्रन्थ से लिया गया है और इसके रचयिता कौन हैं?

उत्तरयह पाठ ‘जननी तुल्यवत्सला’ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रन्थ महाभारत के वनपर्व से उद्धृत है। इसमें गोमाता सुरभि एवं देवराज इन्द्र के संवाद के माध्यम से मातृ-वात्सल्य की महिमा दर्शायी गयी है।

2. किसान दुर्बल बैल के साथ क्या व्यवहार कर रहा था?

उत्तरकिसान उस दुर्बल बैल को तोदन (आघात) देकर बलात् धकेलते हुए चला रहा था। जब वह बैल हल ढोते हुए खेत में गिर पड़ा, तब क्रुद्ध किसान ने उसे बार-बार उठाने का प्रयत्न किया, फिर भी वह नहीं उठा।

3. सुरभि के रोने का क्या कारण था?

उत्तरभूमि पर गिरे अपने दुर्बल पुत्र (बैल) की दीन दशा देखकर तथा किसान द्वारा उसे पीड़ित होते देखकर समस्त गौओं की माता सुरभि की आँखों से आँसू बह निकले; वह पुत्र-शोक से रो रही थी।

4. इन्द्र को सुरभि की किस बात पर आश्चर्य हुआ?

उत्तरइन्द्र को इस बात पर आश्चर्य हुआ कि सुरभि के सहस्रों पुत्र होते हुए भी वह इसी एक दुर्बल पुत्र के लिए इतना अधिक वात्सल्य एवं शोक प्रकट कर रही है।

5. अन्त में किसान ने जुताई का काम क्यों छोड़ दिया?

उत्तरइन्द्र की कृपा से प्रचण्ड वायु एवं मेघ-गर्जना सहित घनघोर वर्षा होने लगी और सर्वत्र जल-प्रलय जैसी स्थिति हो गयी। इसी कारण किसान हर्ष के अतिरेक से जुताई छोड़कर दोनों बैलों को लेकर घर लौट गया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. ‘जननी तुल्यवत्सला’ पाठ का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तरइस पाठ का केन्द्रीय भाव मातृ-वात्सल्य एवं समदृष्टि है। महाभारत के वनपर्व से ली गयी यह कथा बताती है कि माता के हृदय में अपनी सभी सन्तानों के प्रति समान स्नेह होता है; परन्तु जो सन्तान दुर्बल एवं असहाय होती है, उसके प्रति माता की कृपा स्वभाव से ही अधिक हो जाती है।गोमाता सुरभि अपने दुर्बल पुत्र (बैल) को किसान द्वारा पीड़ित देखकर रोने लगती है। इन्द्र के पूछने पर वह कहती है कि सहस्रों पुत्र होने पर भी इस दीन पुत्र में उसका विशेष वात्सल्य है। यह कथा यह सन्देश देती है कि माता-पिता को अपने सभी सन्तानों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, और विशेषकर दुर्बल के प्रति अधिक करुणा रखनी चाहिए। यही मानवीय मूल्यों की पराकाष्ठा है।

7. सुरभि एवं इन्द्र के संवाद का सार लिखिए।

उत्तरअपने दुर्बल पुत्र को रोते-बिलखते देखकर सुरभि की आँखों से आँसू बहने लगे। इन्द्र ने पूछा – ‘हे शुभे! तुम क्यों रो रही हो?’ सुरभि ने उत्तर दिया कि वह अपने दीन पुत्र के कष्ट देखकर शोक कर रही है, जिसे किसान बार-बार पीड़ित कर रहा है और जो दूसरे बैल के समान जुआ नहीं ढो पा रहा।इन्द्र को आश्चर्य हुआ कि सहस्रों पुत्र होने पर भी सुरभि को इसी एक पुत्र से इतना मोह क्यों है। सुरभि ने कहा कि यद्यपि उसका वात्सल्य सब पुत्रों में समान है, फिर भी दीन सन्तान पर माता की कृपा स्वभाव से ही अधिक होती है। यह सुनकर इन्द्र का हृदय भी द्रवित हो गया और उसने वर्षा कराकर बैल को कष्ट से मुक्त कर दिया। इस संवाद से सिद्ध होता है कि माता दीन सन्तान पर अधिक करुणार्द्र होती है।

8. इस कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है? महाभारत के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तरइस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि माता के लिए सभी सन्तानें समान होती हैं, किन्तु दुर्बल एवं असहाय सन्तान के प्रति उसका प्रेम स्वभाव से ही अधिक प्रगाढ़ होता है। यह कथा समस्त प्राणियों के प्रति समदृष्टि-भावना का भी बोध कराती है।महाभारत के सन्दर्भ में व्यासजी ने इस कथा के माध्यम से धृतराष्ट्र को यह सन्देश दिया कि एक पिता को अपने पुत्रों के साथ-साथ अपने अनाथ भतीजों (पाण्डवों) के हित का भी समान ध्यान रखना चाहिए। दुर्बल एवं अनाथ के प्रति विशेष करुणा रखना ही धर्म एवं मानवता का मूल है। इस प्रकार यह छोटी-सी कथा वात्सल्य, समदृष्टि एवं न्यायप्रिय व्यवहार की महान् शिक्षा देती है।

MCQ एवं अभिकथन-कारण

1. ‘जननी तुल्यवत्सला’ पाठ किस ग्रन्थ से लिया गया है?

(क) रामायणस्य अयोध्याकाण्डात्

(ख) महाभारतस्य वनपर्वणः

(ग) पञ्चतन्त्रात्

(घ) हितोपदेशात्

उत्तर(ख) महाभारतस्य वनपर्वणः।

2. इस पाठ के रचयिता कौन हैं?

(क) वाल्मीकिः

(ख) कालिदासः

(ग) वेदव्यासः

(घ) विष्णुशर्मा

उत्तर(ग) वेदव्यासः।

3. कृषकः कति बलीवर्दैः क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत् ?

(क) एकेन

(ख) द्वाभ्याम्

(ग) त्रिभिः

(घ) चतुर्भिः

उत्तर(ख) द्वाभ्याम्। (बलीवर्दाभ्याम्)

4. समस्त धेनूनां माता का आसीत् ?

(क) नन्दिनी

(ख) कामधेनुः

(ग) सुरभिः

(घ) शबला

उत्तर(ग) सुरभिः।

5. सुरभेः नेत्राभ्याम् किम् आविरासन् ?

(क) तेजः

(ख) अश्रूणि

(ग) हास्यम्

(घ) ज्योतिः

उत्तर(ख) अश्रूणि।

6. सुरभिम् ‘अयि शुभे! किमेवं रोदिषि?’ इति कः अपृच्छत् ?

(क) कृषकः

(ख) इन्द्रः (सुराधिपः)

(ग) यमः

(घ) वरुणः

उत्तर(ख) इन्द्रः (सुराधिपः)।

7. इन्द्रस्य कः पर्यायः पाठे न प्रयुक्तः ?

(क) वासवः

(ख) कौशिकः

(ग) त्रिदशाधिपः

(घ) धनदः

उत्तर(घ) धनदः। (धनदः = कुबेरः; शेष इन्द्र के पर्याय हैं)

8. ‘कृषीवलः’ इति पदस्य अर्थः कः ?

(क) देवः

(ख) किसान (कृषकः)

(ग) बैल

(घ) राजा

उत्तर(ख) किसान (कृषकः)।

9. मातुः अधिका कृपा कस्मिन् सुते भवति ?

(क) बलवति

(ख) दीने (दुर्बले)

(ग) ज्येष्ठे

(घ) धनिके

उत्तर(ख) दीने (दुर्बले)।

10. अन्ते इन्द्रः किं कृत्वा वृषभस्य कष्टम् अपाकरोत् ?

(क) वज्रप्रहारेण

(ख) प्रवर्षेण (वृष्ट्या)

(ग) अग्निना

(घ) धनदानेन

उत्तर(ख) प्रवर्षेण (वृष्ट्या)।
उत्तर-कुंजी: 1-(ख), 2-(ग), 3-(ख), 4-(ग), 5-(ख), 6-(ख), 7-(घ), 8-(ख), 9-(ख), 10-(ख)

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): गोमाता सुरभि अपने दुर्बल पुत्र (बैल) के लिए रो रही थी।

कारण (R): किसान उस दीन बैल को तोदन देकर बार-बार पीड़ित कर रहा था।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

2. अभिकथन (A): दुर्बल सन्तान पर माता की कृपा अधिक होती है।

कारण (R): माता अपनी बलवान् सन्तानों से सदा द्वेष करती है।

उत्तर(ग) A सही है, किन्तु R गलत है – माता सभी सन्तानों पर समान वत्सल होती है, दुर्बल पर केवल कृपा अधिक होती है, द्वेष नहीं।

3. अभिकथन (A): यह कथा महाभारत के वनपर्व से ली गयी है।

कारण (R): व्यासजी ने इसके द्वारा धृतराष्ट्र को समदृष्टि का सन्देश दिया।

उत्तर(ख) A और R दोनों सही हैं, किन्तु R, A की सीधी व्याख्या नहीं है (वह कथा का प्रयोजन बताता है)।

4. अभिकथन (A): अन्त में इन्द्र ने घनघोर वर्षा करायी।

कारण (R): वर्षा से जल-प्रलय होने पर किसान जुताई छोड़कर बैलों को लेकर घर लौट गया, जिससे दुर्बल बैल का कष्ट दूर हुआ।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

5. अभिकथन (A): ‘वासव’, ‘कौशिक’ एवं ‘त्रिदशाधिप’ इन्द्र के पर्यायवाची हैं।

कारण (R): इन्द्र देवताओं के राजा हैं, अतः उनके अनेक नाम प्रचलित हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ (Exam Tips)

  • कथा का क्रम याद रखें – जुताई → दुर्बल बैल का गिरना → सुरभि का रोना → इन्द्र-संवाद → वर्षा → किसान का घर लौटना।
  • इन्द्र के पर्यायवाची (वासव, कौशिक, सुराधिप, त्रिदशाधिप, आखण्डल) तथा किसान के पर्याय (कृषक, कृषीवल) अवश्य याद करें।
  • श्लोक ‘अपत्येषु च सर्वेषु जननी तुल्यवत्सला…’ कण्ठस्थ कर लें – यह पाठ का सार-श्लोक है।
  • शब्दार्थ हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें – तोदनेन, कृच्छ्रेण, धुरम्, वोढुम्, प्रवर्षः आदि।
  • सन्धि-विच्छेद एवं प्रश्ननिर्माण में कारक एवं विभक्ति का सही प्रयोग करें (कथम्, कः, केभ्यः, कासाम्, कीदृशी)।

सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)

  • ‘बलीवर्द’ का अर्थ ‘बैल’ है – इसे ‘गाय’ समझ लेना गलत है।
  • सुरभि को साधारण गाय मान लेना – वह समस्त गौओं की माता (गोमाता) है।
  • संयुक्ताक्षर लिखने में भूल – ‘कृच्छ्रेण’, ‘वात्सल्यम्’, ‘जलोपप्लवः’ शुद्ध लिखें।
  • सन्धि में ‘न+उत्थितः = नोत्थितः’ तथा ‘कुर्वन्+आसीत् = कुर्वन्नासीत्’ को उलट देना।
  • पाठ को ‘रामायण’ से जोड़ देना – यह महाभारत (वनपर्व) से है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शेमुषी कक्षा 10 का चौथा पाठ ‘जननी तुल्यवत्सला’ किस ग्रन्थ से लिया गया है?

यह पाठ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत के ‘वनपर्व’ से उद्धृत एक गद्यांश (कथा) है। इसमें गोमाता सुरभि एवं देवराज इन्द्र के संवाद के माध्यम से मातृ-वात्सल्य की महिमा बतायी गयी है।

‘जननी तुल्यवत्सला’ का अर्थ क्या है?

‘जननी तुल्यवत्सला’ का अर्थ है – माता अपनी सभी सन्तानों के प्रति समान रूप से स्नेह करने वाली होती है। फिर भी जो सन्तान दुर्बल एवं दीन होती है, उस पर माता की कृपा स्वभाव से ही अधिक होती है।

सुरभि क्यों रो रही थी और इन्द्र ने क्या किया?

सुरभि अपने दुर्बल पुत्र (बैल) को किसान द्वारा पीड़ित होते देखकर रो रही थी। उसकी करुणा से इन्द्र का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने घनघोर वर्षा करायी, जिससे किसान जुताई छोड़कर बैलों को लेकर घर लौट गया और बैल का कष्ट दूर हुआ।

कथा, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT शेमुषी (द्वितीयो भागः) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।

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