NCERT Solutions for Class 10 Sanskrit (Shemushi) पाठः 4: जननी तुल्यवत्सला (NCERT 2026–27)
This page gives the complete solution for Class 10 Sanskrit Shemushi (शेमुषी, द्वितीयो भागः) Chapter 4 ‘जननी तुल्यवत्सला’ – a gद्य (prose) कथा drawn from the वनपर्व of महर्षि वेदव्यास’s महाभारत, in which गोमाता सुरभि and देवराज इन्द्र converse to show that a mother loves all her offspring equally, yet has greater compassion for the weak – with original सार/भावार्थ, शब्दार्थ, exam-ready answers to every question of the अभ्यासः, plus extra questions, MCQs, अभिकथन-कारण and FAQs (NCERT 2026–27).
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
शेमुषी (द्वितीयो भागः) कक्षा 10 का चतुर्थ पाठ ‘जननी तुल्यवत्सला’ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रन्थ महाभारत के वनपर्व से लिया गया एक गद्यांश है। यह कथा सभी प्राणियों के प्रति समदृष्टि-भावना का बोध कराती है। एक किसान दो बैलों से खेत जोत रहा था; उनमें से एक दुर्बल बैल थककर भूमि पर गिर पड़ा। किसान उसे तोदन (कष्ट) देकर बार-बार उठाने का प्रयत्न करता रहा। अपने इस पुत्र (बैल) की दीन दशा देखकर समस्त गौओं की माता सुरभि की आँखों से आँसू बहने लगे। देवराज इन्द्र के पूछने पर सुरभि ने उत्तर दिया कि यद्यपि उसके सहस्रों पुत्र हैं, फिर भी इस दुर्बल पुत्र के प्रति उसका वात्सल्य अधिक है; क्योंकि जननी सभी सन्तानों के प्रति समान रूप से वत्सल होती है, किन्तु दीन (दुर्बल) पुत्र पर माता की कृपा स्वभावतः ही अधिक होती है। पाठ का केन्द्रीय भाव यही मातृ-वात्सल्य एवं समदृष्टि है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
प्रस्तुत पाठ महर्षि वेदव्यास विरचित महाभारत के वनपर्व से उद्धृत है। महाभारत में अनेक ऐसे प्रसंग हैं जो आज भी उपादेय हैं। इस कथा में व्यासजी ने धृतराष्ट्र को यह सन्देश देने का प्रयास किया है कि एक पिता होने के नाते अपने पुत्रों के साथ-साथ अपने भतीजों (पाण्डवों) के हित का ध्यान रखना भी उचित है। इसी प्रसंग में गाय के मातृत्व की चर्चा करते हुए गोमाता सुरभि एवं देवराज इन्द्र (वासव/कौशिक/आखण्डल) के संवाद के माध्यम से बताया गया है कि माता के लिए सभी सन्तानें बराबर होती हैं, उसके हृदय में सबके लिए समान स्नेह होता है, फिर भी जो सन्तान दुर्बल होती है उसके प्रति माता का प्रेम अधिक प्रगाढ़ हो जाता है। कथा का आधार महाभारत के वनपर्व (दशम अध्याय, श्लोक 8 से 16 तक) में है।
सार एवं भावार्थ (Summary)
एक किसान दो बैलों से खेत की जुताई कर रहा था। उन दोनों बैलों में से एक बैल शरीर से दुर्बल था और तेज़ गति से चलने में असमर्थ था। अतः किसान उस दुर्बल बैल को तोदन (कष्टप्रद आघात) देकर, धकेलते हुए चला रहा था। वह दुर्बल बैल हल को ढोते-ढोते चलने में असमर्थ होकर खेत में गिर पड़ा। क्रुद्ध किसान ने उसे उठाने के लिए बहुत बार प्रयत्न किया, फिर भी वह बैल नहीं उठा।
भूमि पर गिरे अपने इस पुत्र (बैल) को देखकर समस्त गौओं की माता सुरभि की दोनों आँखों से आँसू बहने लगे। सुरभि की यह अवस्था देखकर देवराज इन्द्र ने पूछा – ‘हे शुभे! तुम इस प्रकार क्यों रो रही हो? बताओ।’ तब सुरभि बोली – ‘हे देवराज! आपको कहीं कोई विपत्ति तो नहीं दिखती; किन्तु मैं तो अपने पुत्र के लिए शोक करती हूँ, इसी कारण रो रही हूँ, हे कौशिक! हे वासव! अपने पुत्र की दीन दशा देखकर मैं रो रही हूँ। वह किसान इसे दीन जानते हुए भी बहुत प्रकार से पीड़ित कर रहा है। वह कठिनाई से भार उठा रहा है। दूसरे बैल के समान जुए (धुरा) को ढोने में यह असमर्थ है। क्या आप यह नहीं देख रहे?’
भावार्थ: इन्द्र ने आश्चर्य से पूछा – ‘हे भद्रे! तुम्हारे तो हज़ारों पुत्र हैं; फिर भी इसी एक पुत्र में तुम्हारा ऐसा वात्सल्य क्यों है?’ तब सुरभि ने उत्तर दिया – ‘हे देव! यदि मेरा वात्सल्य सहस्र पुत्रों में सर्वत्र समान भी है, तो भी दीन सन्तान पर स्वभाव से ही अधिक कृपा होती है। यह सत्य है कि मेरी अनेक सन्तानें हैं, फिर भी मैं इस पुत्र में विशेष रूप से आत्म-वेदना का अनुभव करती हूँ; क्योंकि यह दूसरों से दुर्बल है। समस्त सन्तानों में माता समान रूप से वत्सल ही होती है, फिर भी दुर्बल पुत्र पर माता की कृपा सहज ही अधिक होती है।’ सुरभि के ये वचन सुनकर इन्द्र का हृदय भी द्रवित हो गया। उन्होंने उसे सान्त्वना देते हुए कहा – ‘जाओ वत्से! सब कल्याण होगा।’ शीघ्र ही प्रचण्ड वायु एवं मेघ-गर्जना के साथ घनघोर वर्षा होने लगी और लोगों के देखते-देखते सर्वत्र जल-प्रलय जैसी स्थिति हो गई। तब किसान हर्ष के अतिरेक से जुताई का काम छोड़कर दोनों बैलों को लेकर घर लौट गया। इस प्रकार यह कथा सिद्ध करती है कि जननी सभी सन्तानों के प्रति समान वत्सल होती है, परन्तु दीन पुत्र के प्रति वही माता और भी अधिक करुणार्द्र-हृदय हो जाती है।
पुत्रे दीने तु सा माता कृपाऽऽर्द्रहृदया भवेत् ॥
— महाभारत (वनपर्व)
शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | अर्थः (हिन्दी) | English meaning |
|---|---|---|
| बलीवर्दाभ्याम् | दो बैलों से | By two bullocks / oxen |
| क्षेत्रकर्षणम् | खेत की जुताई | Ploughing the field |
| जवेन | तीव्र गति से | With speed |
| तोदनेन | कष्ट/आघात देने से | By goading / torturing |
| नुदन् | धकेलते हुए, बलात् प्रेरित करते हुए | Pushing / pulling |
| हलमूढ्वा | हल को उठाकर/ढोकर | Carrying the plough (yoke) |
| पपात | गिर पड़ा | Fell down |
| कृषीवलः | किसान | Farmer |
| उत्थापयितुम् | उठाने के लिए | To raise / uplift |
| वृषः | बैल | Bullock / ox |
| धेनूनाम् | गौओं की | Of the cows |
| नेत्राभ्याम् | दोनों आँखों से | From both eyes |
| अश्रूणि | आँसू | Tears |
| आविरासन् | प्रकट हुए, बह निकले | Appeared / flowed |
| सुराधिपः | देवताओं का राजा (इन्द्र) | King of the gods (Indra) |
| वासवः | इन्द्र, देवराज | Indra |
| कृच्छ्रेण | कठिनाई से | With difficulty |
| धुरम् | जुआ, धुरा | Yoke |
| वोढुम् | ढोने के लिए | To carry / bear |
| प्रत्यवोचत् | उत्तर दिया | Replied |
| नूनम् | निश्चय ही | Certainly |
| सहस्रम् | हज़ार | A thousand |
| वात्सल्यम् | स्नेह, ममता | Affection |
| अपत्यानि | सन्तानें | Offspring / children |
| विशिष्य | विशेष रूप से | Specially |
| तुल्यवत्सला | समान रूप से स्नेह करने वाली | Equally affectionate |
| असान्त्वयत् | सान्त्वना दी | Consoled |
| अचिरात् | शीघ्र ही | Soon |
| चण्डवातेन | प्रचण्ड (तीव्र) वायु से | By a swift / fierce wind |
| मेघरवैः | बादलों की गर्जना से | By thundering of clouds |
| प्रवर्षः | घनघोर वर्षा | Heavy rain |
| जलोपप्लवः | जल-प्रलय, जल द्वारा तबाही | Flood / deluge |
| त्रिदशाधिपः | देवताओं का राजा (इन्द्र) | King of the gods (Indra) |
अभ्यासः के उत्तर (Exercise Solutions)
1. एकपदेन उत्तरं लिखत —
(क) वृषभः दीनः इति जानन्नपि कः तं नुदन् आसीत् ?
(ख) वृषभः कुत्र पपात ?
(ग) दुर्बले सुते कस्याः अधिका कृपा भवति ?
(घ) कयोः एकः शरीरेण दुर्बलः आसीत् ?
(ङ) चण्डवातेन मेघरवैश्च सह कः समजायत ?
2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत —
(क) कृषकः किं करोति स्म ?
(ख) माता सुरभिः किमर्थम् अश्रूणि मुञ्चति स्म ?
(ग) सुरभिः इन्द्रस्य प्रश्नस्य किमुत्तरं ददाति ?
(घ) मातुः अधिका कृपा कस्मिन् भवति ?
(ङ) इन्द्रः दुर्बलवृषभस्य कष्टानि अपाकर्तुं किं कृतवान् ?
(च) जननी कीदृशी भवति ?
(छ) पाठेऽस्मिन् कयोः संवादः विद्यते ?
3. ‘क’ स्तम्भे दत्तानां पदानां मेलनं ‘ख’ स्तम्भे दत्तैः समानार्थकपदैः कुरुत —
| ‘क’ स्तम्भः | ‘ख’ स्तम्भः (विकल्पाः) |
|---|---|
| (क) कृच्छ्रेण | (i) वृषभः |
| (ख) चक्षुर्भ्याम् | (ii) वासवः |
| (ग) जवेन | (iii) नेत्राभ्याम् |
| (घ) इन्द्रः | (iv) अचिरम् |
| (ङ) पुत्रः | (v) द्रुतगत्या |
| (च) शीघ्रम् | (vi) काठिन्येन |
| (छ) बलीवर्दः | (vii) सुतः |
4. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
(क) सः कृच्छ्रेण भारम् उद्वहति ।
(ख) सुराधिपः तम् अपृच्छत् ।
(ग) अयम् अन्येभ्यः दुर्बलः ।
(घ) धेनूनाम् माता सुरभिः आसीत् ।
(ङ) सहस्राधिकेषु पुत्रेषु सत्स्वपि सा दुःखी आसीत् ।
5. रेखाङ्कितपदे यथास्थानं सन्धिं विच्छेदं वा कुरुत —
(क) कृषकः क्षेत्रकर्षणं कुर्वन्+आसीत् ।
(ख) तयोरेकः वृषभः दुर्बलः आसीत् ।
(ग) तथापि वृषः न+उत्थितः ।
(घ) सत्स्वपि बहुषु पुत्रेषु अस्मिन् वात्सल्यं कथम् ?
(ङ) तथा+अपि+अहम्+एतस्मिन् स्नेहम् अनुभवामि ।
(च) मम बहूनि+अपत्यानि सन्ति ।
(छ) सर्वत्र जलोपप्लवः सञ्जातः ।
6. अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितं सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम् —
(क) सा च अवदत् – भोः वासव! अहम् भृशं दुःखिता अस्मि ।
(ख) पुत्रस्य दैन्यं दृष्ट्वा अहम् रोदिमि ।
(ग) सः दीनः इति जानन् अपि कृषकः तं पीडयति ।
(घ) मम बहूनि अपत्यानि सन्ति । (‘मम’)
(ङ) सः च ताम् एवम् असान्त्वयत् ।
(च) सहस्रेषु पुत्रेषु सत्स्वपि तव अस्मिन् प्रीतिः अस्ति ।
7. ‘क’ स्तम्भे विशेषणपदं लिखितम्, ‘ख’ स्तम्भे पुनः विशेष्यपदम् । तयोः मेलनं कुरुत —
| ‘क’ स्तम्भः (विशेषणम्) | ‘ख’ स्तम्भः (विशेष्यम्) |
|---|---|
| (क) कश्चित् | (i) वृषभम् |
| (ख) दुर्बलम् | (ii) कृपा |
| (ग) क्रुद्धः | (iii) कृषीवलः |
| (घ) सहस्राधिकेषु | (iv) आखण्डलः |
| (ङ) अभ्यधिका | (v) जननी |
| (च) विस्मितः | (vi) पुत्रेषु |
| (छ) तुल्यवत्सला | (vii) कृषकः |
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. यह पाठ किस ग्रन्थ से लिया गया है और इसके रचयिता कौन हैं?
2. किसान दुर्बल बैल के साथ क्या व्यवहार कर रहा था?
3. सुरभि के रोने का क्या कारण था?
4. इन्द्र को सुरभि की किस बात पर आश्चर्य हुआ?
5. अन्त में किसान ने जुताई का काम क्यों छोड़ दिया?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. ‘जननी तुल्यवत्सला’ पाठ का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
7. सुरभि एवं इन्द्र के संवाद का सार लिखिए।
8. इस कथा से हमें क्या शिक्षा मिलती है? महाभारत के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।
MCQ एवं अभिकथन-कारण
1. ‘जननी तुल्यवत्सला’ पाठ किस ग्रन्थ से लिया गया है?
(क) रामायणस्य अयोध्याकाण्डात्
(ख) महाभारतस्य वनपर्वणः
(ग) पञ्चतन्त्रात्
(घ) हितोपदेशात्
2. इस पाठ के रचयिता कौन हैं?
(क) वाल्मीकिः
(ख) कालिदासः
(ग) वेदव्यासः
(घ) विष्णुशर्मा
3. कृषकः कति बलीवर्दैः क्षेत्रकर्षणं कुर्वन् आसीत् ?
(क) एकेन
(ख) द्वाभ्याम्
(ग) त्रिभिः
(घ) चतुर्भिः
4. समस्त धेनूनां माता का आसीत् ?
(क) नन्दिनी
(ख) कामधेनुः
(ग) सुरभिः
(घ) शबला
5. सुरभेः नेत्राभ्याम् किम् आविरासन् ?
(क) तेजः
(ख) अश्रूणि
(ग) हास्यम्
(घ) ज्योतिः
6. सुरभिम् ‘अयि शुभे! किमेवं रोदिषि?’ इति कः अपृच्छत् ?
(क) कृषकः
(ख) इन्द्रः (सुराधिपः)
(ग) यमः
(घ) वरुणः
7. इन्द्रस्य कः पर्यायः पाठे न प्रयुक्तः ?
(क) वासवः
(ख) कौशिकः
(ग) त्रिदशाधिपः
(घ) धनदः
8. ‘कृषीवलः’ इति पदस्य अर्थः कः ?
(क) देवः
(ख) किसान (कृषकः)
(ग) बैल
(घ) राजा
9. मातुः अधिका कृपा कस्मिन् सुते भवति ?
(क) बलवति
(ख) दीने (दुर्बले)
(ग) ज्येष्ठे
(घ) धनिके
10. अन्ते इन्द्रः किं कृत्वा वृषभस्य कष्टम् अपाकरोत् ?
(क) वज्रप्रहारेण
(ख) प्रवर्षेण (वृष्ट्या)
(ग) अग्निना
(घ) धनदानेन
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): गोमाता सुरभि अपने दुर्बल पुत्र (बैल) के लिए रो रही थी।
कारण (R): किसान उस दीन बैल को तोदन देकर बार-बार पीड़ित कर रहा था।
2. अभिकथन (A): दुर्बल सन्तान पर माता की कृपा अधिक होती है।
कारण (R): माता अपनी बलवान् सन्तानों से सदा द्वेष करती है।
3. अभिकथन (A): यह कथा महाभारत के वनपर्व से ली गयी है।
कारण (R): व्यासजी ने इसके द्वारा धृतराष्ट्र को समदृष्टि का सन्देश दिया।
4. अभिकथन (A): अन्त में इन्द्र ने घनघोर वर्षा करायी।
कारण (R): वर्षा से जल-प्रलय होने पर किसान जुताई छोड़कर बैलों को लेकर घर लौट गया, जिससे दुर्बल बैल का कष्ट दूर हुआ।
5. अभिकथन (A): ‘वासव’, ‘कौशिक’ एवं ‘त्रिदशाधिप’ इन्द्र के पर्यायवाची हैं।
कारण (R): इन्द्र देवताओं के राजा हैं, अतः उनके अनेक नाम प्रचलित हैं।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ (Exam Tips)
- कथा का क्रम याद रखें – जुताई → दुर्बल बैल का गिरना → सुरभि का रोना → इन्द्र-संवाद → वर्षा → किसान का घर लौटना।
- इन्द्र के पर्यायवाची (वासव, कौशिक, सुराधिप, त्रिदशाधिप, आखण्डल) तथा किसान के पर्याय (कृषक, कृषीवल) अवश्य याद करें।
- श्लोक ‘अपत्येषु च सर्वेषु जननी तुल्यवत्सला…’ कण्ठस्थ कर लें – यह पाठ का सार-श्लोक है।
- शब्दार्थ हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद करें – तोदनेन, कृच्छ्रेण, धुरम्, वोढुम्, प्रवर्षः आदि।
- सन्धि-विच्छेद एवं प्रश्ननिर्माण में कारक एवं विभक्ति का सही प्रयोग करें (कथम्, कः, केभ्यः, कासाम्, कीदृशी)।
सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)
- ‘बलीवर्द’ का अर्थ ‘बैल’ है – इसे ‘गाय’ समझ लेना गलत है।
- सुरभि को साधारण गाय मान लेना – वह समस्त गौओं की माता (गोमाता) है।
- संयुक्ताक्षर लिखने में भूल – ‘कृच्छ्रेण’, ‘वात्सल्यम्’, ‘जलोपप्लवः’ शुद्ध लिखें।
- सन्धि में ‘न+उत्थितः = नोत्थितः’ तथा ‘कुर्वन्+आसीत् = कुर्वन्नासीत्’ को उलट देना।
- पाठ को ‘रामायण’ से जोड़ देना – यह महाभारत (वनपर्व) से है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शेमुषी कक्षा 10 का चौथा पाठ ‘जननी तुल्यवत्सला’ किस ग्रन्थ से लिया गया है?
यह पाठ महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत के ‘वनपर्व’ से उद्धृत एक गद्यांश (कथा) है। इसमें गोमाता सुरभि एवं देवराज इन्द्र के संवाद के माध्यम से मातृ-वात्सल्य की महिमा बतायी गयी है।
‘जननी तुल्यवत्सला’ का अर्थ क्या है?
‘जननी तुल्यवत्सला’ का अर्थ है – माता अपनी सभी सन्तानों के प्रति समान रूप से स्नेह करने वाली होती है। फिर भी जो सन्तान दुर्बल एवं दीन होती है, उस पर माता की कृपा स्वभाव से ही अधिक होती है।
सुरभि क्यों रो रही थी और इन्द्र ने क्या किया?
सुरभि अपने दुर्बल पुत्र (बैल) को किसान द्वारा पीड़ित होते देखकर रो रही थी। उसकी करुणा से इन्द्र का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने घनघोर वर्षा करायी, जिससे किसान जुताई छोड़कर बैलों को लेकर घर लौट गया और बैल का कष्ट दूर हुआ।
कथा, प्रश्न एवं अभ्यास-शीर्षक NCERT शेमुषी (द्वितीयो भागः) पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; सार, भावार्थ एवं उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार किए गए हैं।
