NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 2: पद (मीरा) – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 2 ‘पद’ (कवयित्री – मीरा / मीराबाई) का पूरा एवं सरल समाधान देता है। इसमें दोनों पद, उनका भावार्थ, सार, कठिन शब्दार्थ, पुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।
कवयित्री परिचय – मीराबाई
मीराबाई का जन्म जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में सन् 1503 के आसपास माना जाता है। तेरह वर्ष की आयु में मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुँवर भोजराज से उनका विवाह हुआ। उनका जीवन दुखों की छाया में ही बीता – बचपन में ही माँ का देहांत हो गया, विवाह के कुछ वर्ष बाद पति, फिर पिता और एक युद्ध के दौरान ससुर का भी देहांत हो गया। भौतिक जीवन से निराश होकर मीरा ने घर-परिवार त्याग दिया और वृंदावन में रहकर पूरी तरह गिरधर गोपाल कृष्ण के प्रति समर्पित हो गईं। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की कवयित्रियों में उनका विशिष्ट स्थान है। उनके पद उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, बिहार और बंगाल तक प्रचलित हैं। संत रैदास की शिष्या मानी जाने वाली मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्य-भाव की है; उनके पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मधुर मिश्रण मिलता है।
पद (मूल पाठ)
नीचे दोनों पद NCERT स्पर्श पुस्तक के अनुसार दिए गए हैं।
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखो जी।
चाकर रह्स्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिंदरावन री कुंज गली में, गोविंद लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला।
बिंदरावन में धेनु चरावै, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावाँ बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण दीज्यो, जमुनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥
संदर्भ – मीराँ ग्रंथावली–2, कल्याण सिंह शेखावत।
पदों का सार
स्पर्श में संकलित मीरा के दोनों पद उनके आराध्य गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) को संबोधित हैं। पहले पद में मीरा अपने प्रभु से प्रार्थना करती हैं कि वे अपने भक्तों के समान उनका भी कष्ट दूर करें। इसके लिए वे श्रीकृष्ण द्वारा पूर्व में किए गए भक्त-रक्षा के प्रसंगों को स्मरण कराती हैं – भरी सभा में चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज रखी, भक्त प्रह्लाद के लिए नरसिंह रूप धारण किया, और गज (हाथी) को ग्राह (मगरमच्छ) के संकट से उबारा। इन उदाहरणों के सहारे मीरा अपने आराध्य को उनके भक्त-वत्सल स्वभाव का स्मरण कराती हैं और स्वयं को ‘दासी मीरा’ कहकर अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।
दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण की चाकर (सेविका) बनकर उनके निकट रहना चाहती हैं। वे कहती हैं कि चाकरी करते हुए वे बाग लगाएँगी, नित्य प्रभु के दर्शन पाएँगी, वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीला का गान करेंगी। इस सेवा से उन्हें एक साथ तीन लाभ मिलेंगे – दर्शन, स्मरण (नाम-रूपी संपत्ति) और भाव-भक्ति रूपी जागीर। आगे वे श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करती हैं – सिर पर मोरमुकुट, शरीर पर पीतांबर, गले में वैजयंती माला, हाथ में मुरली; वृंदावन में गायें चराने वाला मोहन। अंत में वे ऊँचे महल बनवाकर, कुसुंबी (केसरिया) साड़ी पहनकर यमुना-तट पर आधी रात को प्रभु के दर्शन की कामना करती हैं और अपने व्याकुल हृदय की दशा प्रकट करती हैं। इस प्रकार दोनों पद मीरा के अनन्य प्रेम, दैन्य-भाव और एकनिष्ठ भक्ति को प्रकट करते हैं।
पदों का भावार्थ
पद (1) – ‘हरि आप हरो जन री भीर’
मीरा प्रभु से कहती हैं – हे हरि! आप अपने भक्तों के दुख दूर करते आए हैं, अतः मेरी पीड़ा भी हर लीजिए। जब दुःशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर खींचा, तब आपने उसका चीर बढ़ाकर उसकी लाज रखी। भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए आपने नरसिंह (नरहरि) का रूप धारण किया। डूबते हुए गजराज को आपने ग्राह के चंगुल से बचाकर उसका कष्ट दूर किया। इसी प्रकार, हे गिरधर! आपकी दासी मीरा भी संकट में है – मेरी पीड़ा भी दूर कीजिए।
पद (2) – ‘स्याम म्हाने चाकर राखो जी’
मीरा श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि हे श्याम! हे गिरधारी लाल! मुझे अपना चाकर (सेवक) बना लीजिए। चाकर बनकर मैं बाग लगाऊँगी, प्रतिदिन उठकर आपके दर्शन करूँगी और वृंदावन की कुंज-गलियों में आपकी लीलाओं का गान करूँगी। इस सेवा से मुझे दर्शन, नाम-स्मरण और भाव-भक्ति रूपी जागीर – तीनों वस्तुएँ प्राप्त होंगी। आपका रूप अत्यंत मनोहर है – सिर पर मोरमुकुट, तन पर पीतांबर, गले में वैजयंती माला सुशोभित है और आप मुरली बजाते हुए वृंदावन में गायें चराते हैं। मैं ऊँचे महल बनवाकर, बीच-बीच में झरोखे रखकर वहाँ से आपके दर्शन करूँगी। हे प्रभु! आधी रात को यमुना के तट पर मुझे दर्शन दीजिए, क्योंकि मीरा का हृदय आपके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है।
शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भीर | पीड़ा, कष्ट, दुख, संकट |
| री | की |
| चीर | वस्त्र, साड़ी |
| बढ़ायो | बढ़ाना (वस्त्र को बढ़ा देना) |
| नरहरि | नरसिंह अवतार (आधा नर, आधा सिंह) |
| धर्यो | धारण किया |
| सरीर | शरीर, देह |
| बूढ़तो | डूबता हुआ |
| गजराज | हाथियों का राजा, गज (हाथी) |
| कुंजर | हाथी |
| पीर | पीड़ा, कष्ट |
| चाकर | सेवक, नौकर, दास |
| दरसण / दरसन | दर्शन |
| पास्यूँ | पाऊँगी |
| बिंदरावन | वृंदावन |
| कुंज गली | लता-वृक्षों से घिरी पतली गली |
| लीला | विविध रूप, क्रीड़ा |
| सुमरण | स्मरण, याद करना (नाम-जप) |
| खरची | खर्च, पूँजी, संचित धन |
| जागीरी | जागीर, संपत्ति, साम्राज्य |
| तीनूँ बाताँ | तीनों बातें / वस्तुएँ |
| सरसी | उत्तम, सरस, अच्छी |
| मुगट | मुकुट |
| पीताम्बर | पीला वस्त्र |
| बैजंती / वैजयंती | एक प्रकार का फूल (वैजयंती माला) |
| धेनु | गाय |
| बारी | झरोखा, खिड़की |
| कुसुम्बी | कुसुंभ के रंग की (केसरिया/लाल) साड़ी |
| तीरां | किनारा, तट |
| हिवड़ो | हृदय, मन |
| घणो | बहुत, अत्यधिक |
| अधीराँ (अधीर) | व्याकुल, बेचैन होना |
| द्रौपदी री लाज राखी | दुर्योधन द्वारा द्रौपदी का चीरहरण कराने पर श्रीकृष्ण ने चीर को बढ़ाते-बढ़ाते इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन का हाथ थक गया। |
| काटी कुंजर पीर | कुंजर (गज) का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा। |
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
4. मीराबाई की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?
(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—
1. हरि आप हरो जन री भीर।द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
2. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
3. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥
भाषा-अध्ययन
1. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए— उदाहरण – भीर → पीड़ा / कष्ट / दुख; री → की
| पाठ का शब्द | प्रचलित रूप | पाठ का शब्द | प्रचलित रूप |
|---|---|---|---|
| चीर | वस्त्र / साड़ी | बूढ़तो | डूबता हुआ |
| धर्यो | धारण किया | लगास्यूँ | लगाऊँगी |
| कुंजर | हाथी | घणा | बहुत / अत्यधिक |
| बिंदरावन | वृंदावन | सरसी | उत्तम / सरस |
| रह्स्यूँ | रहूँगी | हिवड़ा | हृदय / मन |
| राखो | रखो | कुसुम्बी | कुसुंभ-रंग की (केसरिया) |
अतिरिक्त प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)
1. मीरा अपने पदों में किन प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की भक्त-वत्सलता दर्शाती हैं?
2. मीरा की भक्ति किस प्रकार की है?
3. ‘तीनूँ बाताँ सरसी’ से मीरा का क्या आशय है?
4. मीरा अपने आराध्य के दर्शन के लिए कितनी व्याकुल हैं?
5. मीरा के पदों में किन-किन भाषाओं का प्रयोग मिलता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)
6. मीरा के पहले पद का भाव अपने शब्दों में विस्तार से लिखिए।
7. दूसरे पद के आधार पर मीरा की भक्ति-भावना एवं समर्पण को स्पष्ट कीजिए।
8. मीरा द्वारा वर्णित श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का सचित्र वर्णन कीजिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण
1. स्पर्श अध्याय 2 ‘पद’ की रचयिता कौन हैं?
(क) सूरदास
(ख) मीराबाई
(ग) कबीर
(घ) रसखान
2. मीराबाई के आराध्य देव कौन हैं?
(क) राम
(ख) शिव
(ग) गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण)
(घ) विष्णु
3. पहले पद में प्रभु ने किसकी लाज भरी सभा में रखी थी?
(क) कुंती
(ख) द्रौपदी
(ग) सीता
(घ) गांधारी
4. भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रभु ने कौन-सा रूप धारण किया?
(क) वामन
(ख) वराह
(ग) नरसिंह (नरहरि)
(घ) मत्स्य
5. ‘कुंजर’ शब्द का अर्थ है—
(क) घोड़ा
(ख) हाथी
(ग) शेर
(घ) मगरमच्छ
6. दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण की क्या बनना चाहती हैं?
(क) रानी
(ख) चाकर (सेविका)
(ग) सखी
(घ) माता
7. चाकरी से मीरा को एक साथ कौन-सी तीन वस्तुएँ मिलने की बात है?
(क) धन, यश, सुख
(ख) दर्शन, स्मरण, भाव-भक्ति (जागीर)
(ग) महल, बाग, साड़ी
(घ) मुकुट, माला, मुरली
8. मीरा श्रीकृष्ण के गले में किस फूल की माला बताती हैं?
(क) कमल
(ख) गुलाब
(ग) वैजयंती
(घ) चमेली
9. मीरा किस तट पर आधी रात को प्रभु के दर्शन चाहती हैं?
(क) गंगा
(ख) यमुना (जमुना)
(ग) सरयू
(घ) नर्मदा
10. मीरा के पदों में प्रमुख रूप से कौन-सा भाव है?
(क) वीर एवं ओज
(ख) हास्य एवं व्यंग्य
(ग) दैन्य एवं माधुर्य
(घ) श्रृंगार एवं वैराग्य का विरोध
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): मीरा हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।
कारण (R): हरि ने द्रौपदी, प्रह्लाद और गजराज जैसे भक्तों के संकट दूर किए हैं।
2. अभिकथन (A): मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं।
कारण (R): वे चाकरी के बदले धन और राज्य प्राप्त करना चाहती हैं।
3. अभिकथन (A): मीरा के पदों में माधुर्य-भाव की भक्ति है।
कारण (R): वे श्रीकृष्ण को प्रियतम-रूप में मानकर अनन्य प्रेम करती हैं।
4. अभिकथन (A): मीरा की भाषा शुद्ध खड़ी बोली है।
कारण (R): उनके पदों में केवल संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग हुआ है।
5. अभिकथन (A): मीरा आधी रात को यमुना-तट पर प्रभु के दर्शन की कामना करती हैं।
कारण (R): उनका हृदय प्रभु-दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल (अधीर) है।
परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ
परीक्षा-युक्तियाँ
- दोनों पदों के मुख्य भाव – पहला पद ‘भक्त-वत्सलता एवं विनती’ तथा दूसरा पद ‘चाकरी द्वारा समर्पण’ – याद रखें।
- द्रौपदी, प्रह्लाद (नरसिंह) और गजराज – ये तीन भक्त-रक्षा के प्रसंग प्रश्नों में बार-बार पूछे जाते हैं।
- चाकरी से मिलने वाली ‘तीन वस्तुएँ’ – दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति (जागीर) – क्रम सहित लिखें।
- श्रीकृष्ण के रूप-वर्णन में मोरमुकुट, पीतांबर, वैजयंती माला और मुरली – चारों बिंदु अवश्य लिखें।
- भाषा-शैली के उत्तर में राजस्थानी (ब्रज + गुजराती मिश्रित), दैन्य-माधुर्य भाव और गेयता का उल्लेख करें।
सामान्य गलतियाँ
- मीरा को सूरदास या कबीर का समकालीन/रचना मान लेना – ये पद केवल मीराबाई के हैं।
- ‘गजराज’ और ‘कुंजर’ को अलग-अलग प्राणी समझ लेना – दोनों का अर्थ ‘हाथी’ ही है।
- चाकरी का अर्थ केवल ‘नौकरी’ लिखना – यहाँ इसका भाव ‘प्रभु की सेवा द्वारा सान्निध्य’ है।
- भाषा को ‘शुद्ध हिंदी/खड़ी बोली’ लिख देना – भाषा मुख्यतः राजस्थानी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
स्पर्श कक्षा 10 अध्याय 2 ‘पद’ की रचयिता कौन हैं?
इस अध्याय में संकलित दोनों पद भक्ति-काल की प्रसिद्ध कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित हैं, जिनके आराध्य गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) हैं।
पहले पद में मीरा हरि को किन भक्तों के उद्धार की याद दिलाती हैं?
मीरा प्रभु को तीन प्रसंगों की याद दिलाती हैं – द्रौपदी की लाज रखना, प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह रूप धारण करना और डूबते गजराज को बचाना।
मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी से क्या पाना चाहती हैं?
मीरा चाकरी से एक साथ तीन वस्तुएँ पाना चाहती हैं – प्रभु के नित्य दर्शन, नाम-स्मरण रूपी पूँजी और भाव-भक्ति रूपी जागीर।
प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।
