NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh 2) अध्याय 2: पद (मीरा) – प्रश्न-उत्तर, सार एवं व्याख्या (NCERT 2026–27)

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पुस्तक स्पर्श (भाग 2) के अध्याय 2 ‘पद’ (कवयित्री – मीरा / मीराबाई) का पूरा एवं सरल समाधान देता है। इसमें दोनों पद, उनका भावार्थ, सार, कठिन शब्दार्थ, पुस्तक के सभी प्रश्न-अभ्यास के उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न, MCQ तथा अभिकथन-कारण दिए गए हैं।

कक्षा: 10 विषय: हिंदी पुस्तक: स्पर्श (भाग 2) अध्याय: 2 – पद कवयित्री: मीरा (मीराबाई) विधा: भक्ति-काव्य (पद) सत्र: 2026–27

कवयित्री परिचय – मीराबाई

मीराबाई का जन्म जोधपुर के चोकड़ी (कुड़की) गाँव में सन् 1503 के आसपास माना जाता है। तेरह वर्ष की आयु में मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुँवर भोजराज से उनका विवाह हुआ। उनका जीवन दुखों की छाया में ही बीता – बचपन में ही माँ का देहांत हो गया, विवाह के कुछ वर्ष बाद पति, फिर पिता और एक युद्ध के दौरान ससुर का भी देहांत हो गया। भौतिक जीवन से निराश होकर मीरा ने घर-परिवार त्याग दिया और वृंदावन में रहकर पूरी तरह गिरधर गोपाल कृष्ण के प्रति समर्पित हो गईं। मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की कवयित्रियों में उनका विशिष्ट स्थान है। उनके पद उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, बिहार और बंगाल तक प्रचलित हैं। संत रैदास की शिष्या मानी जाने वाली मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्य-भाव की है; उनके पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मधुर मिश्रण मिलता है।

पद (मूल पाठ)

नीचे दोनों पद NCERT स्पर्श पुस्तक के अनुसार दिए गए हैं।

(1)
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्‌यो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
(2)
स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखो जी।
चाकर रह्स्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिंदरावन री कुंज गली में, गोविंद लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी।
मोर मुगट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला।
बिंदरावन में धेनु चरावै, मोहन मुरली वाला।
ऊँचा ऊँचा महल बणावाँ बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साड़ी।
आधी रात प्रभु दरसण दीज्यो, जमुनाजी रे तीरां।
मीराँ रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ॥

संदर्भ – मीराँ ग्रंथावली–2, कल्याण सिंह शेखावत।

पदों का सार

स्पर्श में संकलित मीरा के दोनों पद उनके आराध्य गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) को संबोधित हैं। पहले पद में मीरा अपने प्रभु से प्रार्थना करती हैं कि वे अपने भक्तों के समान उनका भी कष्ट दूर करें। इसके लिए वे श्रीकृष्ण द्वारा पूर्व में किए गए भक्त-रक्षा के प्रसंगों को स्मरण कराती हैं – भरी सभा में चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज रखी, भक्त प्रह्लाद के लिए नरसिंह रूप धारण किया, और गज (हाथी) को ग्राह (मगरमच्छ) के संकट से उबारा। इन उदाहरणों के सहारे मीरा अपने आराध्य को उनके भक्त-वत्सल स्वभाव का स्मरण कराती हैं और स्वयं को ‘दासी मीरा’ कहकर अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।

दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण की चाकर (सेविका) बनकर उनके निकट रहना चाहती हैं। वे कहती हैं कि चाकरी करते हुए वे बाग लगाएँगी, नित्य प्रभु के दर्शन पाएँगी, वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीला का गान करेंगी। इस सेवा से उन्हें एक साथ तीन लाभ मिलेंगे – दर्शन, स्मरण (नाम-रूपी संपत्ति) और भाव-भक्ति रूपी जागीर। आगे वे श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करती हैं – सिर पर मोरमुकुट, शरीर पर पीतांबर, गले में वैजयंती माला, हाथ में मुरली; वृंदावन में गायें चराने वाला मोहन। अंत में वे ऊँचे महल बनवाकर, कुसुंबी (केसरिया) साड़ी पहनकर यमुना-तट पर आधी रात को प्रभु के दर्शन की कामना करती हैं और अपने व्याकुल हृदय की दशा प्रकट करती हैं। इस प्रकार दोनों पद मीरा के अनन्य प्रेम, दैन्य-भाव और एकनिष्ठ भक्ति को प्रकट करते हैं।

पदों का भावार्थ

पद (1) – ‘हरि आप हरो जन री भीर’

मीरा प्रभु से कहती हैं – हे हरि! आप अपने भक्तों के दुख दूर करते आए हैं, अतः मेरी पीड़ा भी हर लीजिए। जब दुःशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर खींचा, तब आपने उसका चीर बढ़ाकर उसकी लाज रखी। भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए आपने नरसिंह (नरहरि) का रूप धारण किया। डूबते हुए गजराज को आपने ग्राह के चंगुल से बचाकर उसका कष्ट दूर किया। इसी प्रकार, हे गिरधर! आपकी दासी मीरा भी संकट में है – मेरी पीड़ा भी दूर कीजिए।

पद (2) – ‘स्याम म्हाने चाकर राखो जी’

मीरा श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि हे श्याम! हे गिरधारी लाल! मुझे अपना चाकर (सेवक) बना लीजिए। चाकर बनकर मैं बाग लगाऊँगी, प्रतिदिन उठकर आपके दर्शन करूँगी और वृंदावन की कुंज-गलियों में आपकी लीलाओं का गान करूँगी। इस सेवा से मुझे दर्शन, नाम-स्मरण और भाव-भक्ति रूपी जागीर – तीनों वस्तुएँ प्राप्त होंगी। आपका रूप अत्यंत मनोहर है – सिर पर मोरमुकुट, तन पर पीतांबर, गले में वैजयंती माला सुशोभित है और आप मुरली बजाते हुए वृंदावन में गायें चराते हैं। मैं ऊँचे महल बनवाकर, बीच-बीच में झरोखे रखकर वहाँ से आपके दर्शन करूँगी। हे प्रभु! आधी रात को यमुना के तट पर मुझे दर्शन दीजिए, क्योंकि मीरा का हृदय आपके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है।

शब्दार्थ एवं टिप्पणियाँ

शब्दअर्थ
भीरपीड़ा, कष्ट, दुख, संकट
रीकी
चीरवस्त्र, साड़ी
बढ़ायोबढ़ाना (वस्त्र को बढ़ा देना)
नरहरिनरसिंह अवतार (आधा नर, आधा सिंह)
धर्‌योधारण किया
सरीरशरीर, देह
बूढ़तोडूबता हुआ
गजराजहाथियों का राजा, गज (हाथी)
कुंजरहाथी
पीरपीड़ा, कष्ट
चाकरसेवक, नौकर, दास
दरसण / दरसनदर्शन
पास्यूँपाऊँगी
बिंदरावनवृंदावन
कुंज गलीलता-वृक्षों से घिरी पतली गली
लीलाविविध रूप, क्रीड़ा
सुमरणस्मरण, याद करना (नाम-जप)
खरचीखर्च, पूँजी, संचित धन
जागीरीजागीर, संपत्ति, साम्राज्य
तीनूँ बाताँतीनों बातें / वस्तुएँ
सरसीउत्तम, सरस, अच्छी
मुगटमुकुट
पीताम्बरपीला वस्त्र
बैजंती / वैजयंतीएक प्रकार का फूल (वैजयंती माला)
धेनुगाय
बारीझरोखा, खिड़की
कुसुम्बीकुसुंभ के रंग की (केसरिया/लाल) साड़ी
तीरांकिनारा, तट
हिवड़ोहृदय, मन
घणोबहुत, अत्यधिक
अधीराँ (अधीर)व्याकुल, बेचैन होना
द्रौपदी री लाज राखीदुर्योधन द्वारा द्रौपदी का चीरहरण कराने पर श्रीकृष्ण ने चीर को बढ़ाते-बढ़ाते इतना बढ़ा दिया कि दुःशासन का हाथ थक गया।
काटी कुंजर पीरकुंजर (गज) का कष्ट दूर करने के लिए मगरमच्छ को मारा।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास के उत्तर

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

1. पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?

उत्तरपहले पद में मीरा अपने आराध्य हरि (श्रीकृष्ण) से दीनभाव से प्रार्थना करती हैं कि जैसे उन्होंने अनेक भक्तों का संकट दूर किया है, वैसे ही उनकी पीड़ा भी हर लें।वे प्रभु को उनके भक्त-वत्सल कार्यों का स्मरण कराती हैं – (i) भरी सभा में चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज रखी, (ii) भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह (नरहरि) रूप धारण किया, और (iii) डूबते हुए गजराज को ग्राह से बचाकर उसका कष्ट दूर किया।इन उदाहरणों के द्वारा मीरा प्रभु को विश्वास दिलाती हैं कि जो भक्तों का दुख हरते हैं, वे उनकी ‘दासी’ का दुख भी अवश्य दूर करेंगे – इसी प्रकार वे विनम्र भाव से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।

2. दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तरमीराबाई श्याम (श्रीकृष्ण) की चाकरी (सेवा) इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि चाकर बनकर वे सदा अपने प्रभु के निकट रह सकेंगी।चाकरी करते हुए उन्हें एक साथ तीन वस्तुएँ प्राप्त होंगी – (i) नित्य प्रभु के दर्शन, (ii) नाम-स्मरण रूपी पूँजी (खरची), और (iii) भाव-भक्ति रूपी जागीर (संपत्ति)।वे चाकरी में बाग लगाना, वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीला का गान करना चाहती हैं। इस प्रकार चाकरी मीरा के लिए केवल सेवा नहीं, बल्कि अपने आराध्य के साथ निरंतर सान्निध्य पाने और प्रेम-भक्ति प्रकट करने का माध्यम है – इसीलिए वे श्याम की चाकरी करना चाहती हैं।

3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?

उत्तरमीराबाई ने दूसरे पद में श्रीकृष्ण के मनोहर रूप-सौंदर्य का सजीव चित्रण किया है।उनके अनुसार श्रीकृष्ण के सिर पर मोरपंखों का मुकुट (मोरमुकुट) सुशोभित है, शरीर पर पीला वस्त्र (पीतांबर) शोभायमान है और गले में वैजयंती फूलों की माला पड़ी है।वे हाथ में मुरली लिए हुए हैं और वृंदावन में गायें चराते हैं – इसी रूप में वे ‘मोहन मुरली वाला’ कहलाते हैं।इस प्रकार मीरा ने मुकुट, पीतांबर, माला, मुरली और गोचारण – इन सबके माध्यम से श्रीकृष्ण के सलोने, आकर्षक एवं माधुर्यपूर्ण रूप का सुंदर वर्णन किया है।

4. मीराबाई की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।

उत्तरमीराबाई की भाषा में मुख्यतः राजस्थानी का प्रयोग हुआ है, जिसमें ब्रज और गुजराती का मधुर मिश्रण मिलता है। कहीं-कहीं पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी के शब्द भी आ गए हैं।उनकी भाषा सरल, सहज, मधुर और भावपूर्ण है, जो हृदय को सीधे छू लेती है।इन पदों में दैन्य और माधुर्य भाव की प्रधानता है। गेयता (संगीतात्मकता) इनका प्रमुख गुण है, अतः ये पद गाए जा सकते हैं।शैली में प्रसाद गुण, अनुप्रास तथा दृष्टांत (उदाहरण) अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है। कुल मिलाकर मीरा की भाषा-शैली भक्ति, प्रेम और समर्पण की सरस अभिव्यक्ति करती है।

5. वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?

उत्तरमीरा श्रीकृष्ण को पाने के लिए उनकी चाकर (दासी) बनने तक को तैयार हैं। इसके लिए वे निम्नलिखित कार्य करना चाहती हैं–(i) चाकरी (सेवा) करते हुए बाग लगाएँगी(ii) नित्य प्रति उठकर प्रभु के दर्शन करेंगी।(iii) वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीलाओं का गान करेंगी।(iv) ऊँचे-ऊँचे महल बनवाकर उनमें झरोखे रखेंगी, ताकि वहाँ से प्रभु के दर्शन कर सकें।(v) कुसुंबी (केसरिया) साड़ी पहनकर यमुना-तट पर आधी रात को प्रभु के दर्शन की कामना करेंगी।इस प्रकार मीरा अपने आराध्य के सान्निध्य के लिए हर प्रकार की सेवा करने को तत्पर हैं।

(ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—

1. हरि आप हरो जन री भीर।द्रौपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।भगत कारण रूप नरहरि, धर्‌यो आप सरीर।

काव्य-सौंदर्यभाव-सौंदर्य: इन पंक्तियों में मीरा का दैन्य-भाव और प्रभु के भक्त-वत्सल स्वरूप का स्मरण प्रकट हुआ है। मीरा द्रौपदी और प्रह्लाद के दृष्टांत देकर हरि से अपना कष्ट हरने की विनती करती हैं।शिल्प-सौंदर्य: भाषा राजस्थानी मिश्रित सरल एवं भावपूर्ण है। ‘द्रौपदी…चीर’ तथा ‘भगत…नरहरि’ में दृष्टांत अलंकार है। ‘राखी…रूप…’ आदि में अनुप्रास की छटा है। पदों में गेयता एवं प्रसाद गुण विद्यमान है।

2. बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुंजर पीर।दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥

काव्य-सौंदर्यभाव-सौंदर्य: मीरा गजराज (हाथी) के उद्धार का उदाहरण देकर कहती हैं कि जैसे प्रभु ने डूबते हुए गज का कष्ट दूर किया, वैसे ही उनकी ‘दासी’ की पीड़ा भी हरें। ‘दासी’ शब्द में मीरा का समर्पण और दैन्य-भाव झलकता है।शिल्प-सौंदर्य: ‘गजराज’, ‘कुंजर’ में हाथी के लिए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग है। ‘गजराज…काटी कुंजर’ में दृष्टांत तथा ‘मीराँ…म्हारी’ आदि में अनुप्रास अलंकार है। भाषा सरल, मधुर एवं गेय है।

3. चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥

काव्य-सौंदर्यभाव-सौंदर्य: मीरा कहती हैं कि श्रीकृष्ण की चाकरी से उन्हें एक साथ तीन उत्तम वस्तुएँ मिलेंगी – दर्शन, स्मरण (नाम-रूपी पूँजी) और भाव-भक्ति रूपी जागीर। यह भक्ति को सांसारिक संपत्ति (खरची, जागीर) से भी श्रेष्ठ मानने का सुंदर भाव है।शिल्प-सौंदर्य: ‘पास्यूँ…पास्यूँ’ की आवृत्ति से पुनरुक्ति/अनुप्रास तथा लय का सौंदर्य उत्पन्न हुआ है। ‘खरची’ और ‘जागीरी’ में भक्ति के लिए सांसारिक प्रतीकों का प्रयोग है। भाषा राजस्थानी, सरस एवं गेय है।

भाषा-अध्ययन

1. उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए— उदाहरण – भीर → पीड़ा / कष्ट / दुख; री → की

उत्तर
पाठ का शब्दप्रचलित रूपपाठ का शब्दप्रचलित रूप
चीरवस्त्र / साड़ीबूढ़तोडूबता हुआ
धर्‌योधारण कियालगास्यूँलगाऊँगी
कुंजरहाथीघणाबहुत / अत्यधिक
बिंदरावनवृंदावनसरसीउत्तम / सरस
रह्स्यूँरहूँगीहिवड़ाहृदय / मन
राखोरखोकुसुम्बीकुसुंभ-रंग की (केसरिया)

अतिरिक्त प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न (30–40 शब्द)

1. मीरा अपने पदों में किन प्रसंगों के माध्यम से प्रभु की भक्त-वत्सलता दर्शाती हैं?

उत्तरमीरा तीन प्रसंगों से प्रभु की भक्त-वत्सलता दर्शाती हैं – भरी सभा में चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज रखना, भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह रूप धारण करना तथा डूबते गजराज को ग्राह से बचाना। इन्हीं उदाहरणों से वे अपना कष्ट हरने की प्रार्थना करती हैं।

2. मीरा की भक्ति किस प्रकार की है?

उत्तरमीरा की भक्ति माधुर्य और दैन्य भाव की है। वे श्रीकृष्ण को अपना पति, स्वामी एवं प्रियतम मानकर अनन्य और एकनिष्ठ प्रेम करती हैं। उनकी भक्ति में पूर्ण समर्पण, सेवा-भाव तथा दर्शन की तीव्र व्याकुलता प्रकट होती है।

3. ‘तीनूँ बाताँ सरसी’ से मीरा का क्या आशय है?

उत्तरइससे मीरा का आशय है कि श्रीकृष्ण की चाकरी से उन्हें एक साथ तीन उत्तम वस्तुएँ मिलेंगी – प्रभु के दर्शन, नाम-स्मरण रूपी पूँजी और भाव-भक्ति रूपी जागीर। ये तीनों उन्हें सांसारिक संपत्ति से भी अधिक श्रेष्ठ एवं सरस प्रतीत होती हैं।

4. मीरा अपने आराध्य के दर्शन के लिए कितनी व्याकुल हैं?

उत्तरमीरा अपने आराध्य के दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल हैं। वे आधी रात को यमुना-तट पर दर्शन की कामना करती हैं और कहती हैं कि उनका हृदय (हिवड़ो) बहुत अधिक अधीर (बेचैन) हो रहा है – यही उनकी प्रबल दर्शन-लालसा को प्रकट करता है।

5. मीरा के पदों में किन-किन भाषाओं का प्रयोग मिलता है?

उत्तरमीरा के पदों में मुख्य रूप से राजस्थानी भाषा का प्रयोग है, जिसमें ब्रज और गुजराती का मधुर मिश्रण मिलता है। साथ ही कहीं-कहीं पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी के शब्द भी मिल जाते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (100–120 शब्द)

6. मीरा के पहले पद का भाव अपने शब्दों में विस्तार से लिखिए।

उत्तरपहले पद में मीरा अपने आराध्य हरि से दीनभाव से प्रार्थना करती हैं कि वे उनकी पीड़ा हर लें। अपनी प्रार्थना को बल देने के लिए वे प्रभु के पूर्व-कृत भक्त-रक्षा के प्रसंग स्मरण कराती हैं।पहला – जब दुःशासन ने भरी सभा में द्रौपदी का चीर खींचा, तब प्रभु ने चीर बढ़ाकर उसकी लाज रखी। दूसरा – भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए उन्होंने नरसिंह (नरहरि) रूप धारण किया। तीसरा – डूबते हुए गजराज को ग्राह के संकट से उबारकर उसका कष्ट दूर किया।इन उदाहरणों से मीरा यह विश्वास प्रकट करती हैं कि जो प्रभु अपने भक्तों का संकट हरते हैं, वे उनकी ‘दासी’ का दुख भी अवश्य दूर करेंगे। इस प्रकार यह पद मीरा के अनन्य विश्वास और समर्पण-भाव को प्रकट करता है।

7. दूसरे पद के आधार पर मीरा की भक्ति-भावना एवं समर्पण को स्पष्ट कीजिए।

उत्तरदूसरे पद में मीरा की भक्ति-भावना और पूर्ण समर्पण स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। वे श्रीकृष्ण से अपने को चाकर (सेवक) बनाने की प्रार्थना करती हैं, ताकि वे सदा प्रभु के निकट रह सकें।चाकरी में वे बाग लगाना, नित्य दर्शन करना और वृंदावन की कुंज-गलियों में गोविंद की लीला का गान करना चाहती हैं। इससे उन्हें दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति रूपी जागीर – तीनों लाभ मिलेंगे।वे श्रीकृष्ण के मनोहर रूप – मोरमुकुट, पीतांबर, वैजयंती माला और मुरली – का वर्णन करती हैं तथा आधी रात को यमुना-तट पर दर्शन की व्याकुल कामना करती हैं। इस प्रकार सेवा, दर्शन-लालसा और अनन्य प्रेम के द्वारा मीरा का सर्वस्व-समर्पण प्रकट होता है।

8. मीरा द्वारा वर्णित श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का सचित्र वर्णन कीजिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।

उत्तरमीरा ने दूसरे पद में श्रीकृष्ण के अत्यंत मनोहर एवं माधुर्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण किया है। उनके सिर पर मोरपंखों का मुकुट सुशोभित है, शरीर पर पीला वस्त्र (पीतांबर) शोभायमान है और गले में वैजयंती फूलों की सुंदर माला पड़ी है।वे हाथ में मुरली लिए वृंदावन में गायें चराते हैं, इसलिए ‘मोहन मुरली वाला’ कहलाते हैं। यह चित्रण गोप-बालक कृष्ण के लोक-रंजक एवं सलोने स्वरूप को प्रकट करता है।इस वर्णन की विशेषता यह है कि इसमें दृश्य-बिंब (मुकुट, पीतांबर, माला) के साथ श्रवण-बिंब (मुरली की धुन) का भी समावेश है, जिससे श्रीकृष्ण का रूप पाठक की आँखों के सामने साकार हो उठता है। यही मीरा के माधुर्य-भाव की भक्ति का परिचायक है।

अभ्यास MCQ & अभिकथन-कारण

1. स्पर्श अध्याय 2 ‘पद’ की रचयिता कौन हैं?

(क) सूरदास

(ख) मीराबाई

(ग) कबीर

(घ) रसखान

उत्तर(ख) मीराबाई।

2. मीराबाई के आराध्य देव कौन हैं?

(क) राम

(ख) शिव

(ग) गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण)

(घ) विष्णु

उत्तर(ग) गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण)।

3. पहले पद में प्रभु ने किसकी लाज भरी सभा में रखी थी?

(क) कुंती

(ख) द्रौपदी

(ग) सीता

(घ) गांधारी

उत्तर(ख) द्रौपदी।

4. भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रभु ने कौन-सा रूप धारण किया?

(क) वामन

(ख) वराह

(ग) नरसिंह (नरहरि)

(घ) मत्स्य

उत्तर(ग) नरसिंह (नरहरि)।

5. ‘कुंजर’ शब्द का अर्थ है—

(क) घोड़ा

(ख) हाथी

(ग) शेर

(घ) मगरमच्छ

उत्तर(ख) हाथी।

6. दूसरे पद में मीरा श्रीकृष्ण की क्या बनना चाहती हैं?

(क) रानी

(ख) चाकर (सेविका)

(ग) सखी

(घ) माता

उत्तर(ख) चाकर (सेविका)।

7. चाकरी से मीरा को एक साथ कौन-सी तीन वस्तुएँ मिलने की बात है?

(क) धन, यश, सुख

(ख) दर्शन, स्मरण, भाव-भक्ति (जागीर)

(ग) महल, बाग, साड़ी

(घ) मुकुट, माला, मुरली

उत्तर(ख) दर्शन, स्मरण, भाव-भक्ति (जागीर)।

8. मीरा श्रीकृष्ण के गले में किस फूल की माला बताती हैं?

(क) कमल

(ख) गुलाब

(ग) वैजयंती

(घ) चमेली

उत्तर(ग) वैजयंती।

9. मीरा किस तट पर आधी रात को प्रभु के दर्शन चाहती हैं?

(क) गंगा

(ख) यमुना (जमुना)

(ग) सरयू

(घ) नर्मदा

उत्तर(ख) यमुना (जमुना)।

10. मीरा के पदों में प्रमुख रूप से कौन-सा भाव है?

(क) वीर एवं ओज

(ख) हास्य एवं व्यंग्य

(ग) दैन्य एवं माधुर्य

(घ) श्रृंगार एवं वैराग्य का विरोध

उत्तर(ग) दैन्य एवं माधुर्य।
उत्तर-कुंजी: 1-ख, 2-ग, 3-ख, 4-ग, 5-ख, 6-ख, 7-ख, 8-ग, 9-ख, 10-ग।

अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।

1. अभिकथन (A): मीरा हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं।

कारण (R): हरि ने द्रौपदी, प्रह्लाद और गजराज जैसे भक्तों के संकट दूर किए हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है – भक्त-वत्सल प्रसंगों के आधार पर ही मीरा अपनी विनती करती हैं।

2. अभिकथन (A): मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं।

कारण (R): वे चाकरी के बदले धन और राज्य प्राप्त करना चाहती हैं।

उत्तर(ग) A सही है, पर R गलत है – मीरा चाकरी से धन-राज्य नहीं, बल्कि प्रभु के दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति चाहती हैं।

3. अभिकथन (A): मीरा के पदों में माधुर्य-भाव की भक्ति है।

कारण (R): वे श्रीकृष्ण को प्रियतम-रूप में मानकर अनन्य प्रेम करती हैं।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।

4. अभिकथन (A): मीरा की भाषा शुद्ध खड़ी बोली है।

कारण (R): उनके पदों में केवल संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग हुआ है।

उत्तर(घ) A गलत है, R भी गलत है – मीरा की भाषा मुख्यतः राजस्थानी है जिसमें ब्रज-गुजराती का मिश्रण है, न कि शुद्ध खड़ी बोली या केवल संस्कृतनिष्ठ शब्दावली।

5. अभिकथन (A): मीरा आधी रात को यमुना-तट पर प्रभु के दर्शन की कामना करती हैं।

कारण (R): उनका हृदय प्रभु-दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल (अधीर) है।

उत्तर(क) A और R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
उत्तर-कुंजी: 1-क, 2-ग, 3-क, 4-घ, 5-क।

परीक्षा-युक्तियाँ एवं सामान्य गलतियाँ

परीक्षा-युक्तियाँ

  • दोनों पदों के मुख्य भाव – पहला पद ‘भक्त-वत्सलता एवं विनती’ तथा दूसरा पद ‘चाकरी द्वारा समर्पण’ – याद रखें।
  • द्रौपदी, प्रह्लाद (नरसिंह) और गजराज – ये तीन भक्त-रक्षा के प्रसंग प्रश्नों में बार-बार पूछे जाते हैं।
  • चाकरी से मिलने वाली ‘तीन वस्तुएँ’ – दर्शन, स्मरण और भाव-भक्ति (जागीर) – क्रम सहित लिखें।
  • श्रीकृष्ण के रूप-वर्णन में मोरमुकुट, पीतांबर, वैजयंती माला और मुरली – चारों बिंदु अवश्य लिखें।
  • भाषा-शैली के उत्तर में राजस्थानी (ब्रज + गुजराती मिश्रित), दैन्य-माधुर्य भाव और गेयता का उल्लेख करें।

सामान्य गलतियाँ

  • मीरा को सूरदास या कबीर का समकालीन/रचना मान लेना – ये पद केवल मीराबाई के हैं।
  • ‘गजराज’ और ‘कुंजर’ को अलग-अलग प्राणी समझ लेना – दोनों का अर्थ ‘हाथी’ ही है।
  • चाकरी का अर्थ केवल ‘नौकरी’ लिखना – यहाँ इसका भाव ‘प्रभु की सेवा द्वारा सान्निध्य’ है।
  • भाषा को ‘शुद्ध हिंदी/खड़ी बोली’ लिख देना – भाषा मुख्यतः राजस्थानी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

स्पर्श कक्षा 10 अध्याय 2 ‘पद’ की रचयिता कौन हैं?

इस अध्याय में संकलित दोनों पद भक्ति-काल की प्रसिद्ध कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित हैं, जिनके आराध्य गिरधर गोपाल (श्रीकृष्ण) हैं।

पहले पद में मीरा हरि को किन भक्तों के उद्धार की याद दिलाती हैं?

मीरा प्रभु को तीन प्रसंगों की याद दिलाती हैं – द्रौपदी की लाज रखना, प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह रूप धारण करना और डूबते गजराज को बचाना।

मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी से क्या पाना चाहती हैं?

मीरा चाकरी से एक साथ तीन वस्तुएँ पाना चाहती हैं – प्रभु के नित्य दर्शन, नाम-स्मरण रूपी पूँजी और भाव-भक्ति रूपी जागीर।

प्रश्न NCERT स्पर्श पुस्तक से ज्यों-के-त्यों लिए गए हैं; उत्तर ClearStudy द्वारा मौलिक रूप से तैयार एवं जाँचे गए हैं।

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