Class 8 Sanskrit Deepakam Chapter 7 Solutions — मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा
Class 8 Sanskrit Deepakam Chapter 7 solutions: संस्कृत-गीत के चार पद्यों का हिन्दी भावार्थ, शब्दार्थ और आठ अभ्यासों के उत्तर पढ़ें। सही रेखाङ्कित पदों पर प्रश्ननिर्माण, समास और परियोजनाओं के नमूने समझें।
- पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
- पाठ-परिचय / प्रसंग
- मूल पद्यम् (भावार्थ सहित)
- सार (Hindi Summary)
- शब्दार्थ (Word-meanings)
- अभ्यासः (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
- अत्र इदम् अवधेयम् (समास-तालिका)
- योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
- अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
- MCQ & अभिकथन-कारण
- परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
पाठ का अवलोकन (Chapter Overview)
दीपकम् कक्षा 8 का सप्तम पाठ ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ एक मधुर गीत (पद्य-पाठ) है, जिसमें संस्कृतभाषा की महिमा का सुन्दर गान किया गया है। पाठ का आरम्भ एक संवाद से होता है, जिसमें ओमिता नामक छात्रा अपनी सखी को श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले संस्कृत-दिवस एवं विद्यालय में आयोजित विशिष्ट कार्यक्रमों (गीत-गायन-प्रतियोगिता आदि) के विषय में बताती है। इसके पश्चात् चार पद्यों में संस्कृत को सुन्दरसुरभाषा (देववाणी) कहकर उसकी विशेषताएँ बताई गई हैं – यह मुनियों एवं कवियों द्वारा विकसित मनोहर ज्ञान-मञ्जूषा (पेटिका) है, कवि के माता-रूपक में ज्ञान को पोषित करती है, वेद-वेदान्त के विचारों से परिपूर्ण है तथा नवरसों एवं अलंकारों से सुशोभित है। पाठ का केन्द्रीय भाव है – संस्कृतभाषा सर्वत्र (धरती पर) विजयिनी है।
पाठ-परिचय / प्रसंग
यह पाठ एक आधुनिक संस्कृत-गीत है, जो संस्कृतभाषा के सौन्दर्य एवं गौरव का वर्णन करता है। प्रत्येक पद्य की प्रत्येक पंक्ति के अन्त में ‘सुन्दरसुरभाषा’ पद का प्रयोग एक मधुर लय एवं टेक (refrain) के रूप में हुआ है। ‘सुर’ का अर्थ है देवता; अतः ‘सुरभाषा’ का अर्थ है देवभाषा। पाठ में संस्कृत को वेदव्यास, वाल्मीकि जैसे मुनियों तथा कालिदास, बाणभट्ट जैसे कवियों की भाषा बताया गया है, जो ज्ञान-विज्ञान, वेद-वेदान्त, आयुर्वेद एवं खगोलशास्त्र आदि अनेक क्षेत्रों में विद्यमान है। प्रत्येक पद्य के साथ पुस्तक में पदच्छेदः, अन्वयः एवं भावार्थः दिए गए हैं, जो भाव समझने में सहायक हैं।
मूल पद्यम् (भावार्थ सहित)
चार गीत-पद्य, पदच्छेद और अन्वय के साथ नीचे मौलिक हिन्दी व्याख्या दी गई है।
अयि मातस्तव पोषणक्षमता मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा ॥ १ ॥ — पद्यम् १
पदच्छेदः – मुनिवर-विकसित-कविवर-विलसित-मञ्जुल-मञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा । अयि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता सुन्दरसुरभाषा ।
अन्वयः – (त्वं) मुनिवरविकसितकविवरविलसितमञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा (असि) । अयि मातः ! तव पोषणक्षमता मम वचनातीता अस्ति ।
मौलिक हिन्दी भावार्थ: कवि संस्कृत को ऐसी सुन्दर ज्ञान-पेटिका मानता है जिसे मुनियों और कवियों ने समृद्ध किया। भाषा को माता कहकर वह उसकी पोषण-क्षमता और ज्ञान देने की शक्ति के प्रति आदर व्यक्त करता है। वचनातीता का आशय है कि उसकी प्रशंसा शब्दों में पूरी नहीं हो सकती।
कालिदास-बाणादिकवीनाम् ।
पौराणिक-सामान्य-जनानां
जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा ॥ २ ॥ — पद्यम् २
पदच्छेदः – वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनाम् कालिदास-बाणादिकवीनाम् पौराणिक-सामान्य-जनानाम् जीवनस्य आशा सुन्दरसुरभाषा ।
अन्वयः – (त्वं) वेदव्यासवाल्मीकिमुनीनां कालिदास-बाणादिकवीनां पौराणिकसामान्यजनानां जीवनस्य आशा (असि) । त्वं सुन्दरसुरभाषा (असि) ।
मौलिक हिन्दी भावार्थ: वेदव्यास और वाल्मीकि जैसे मुनियों तथा कालिदास और बाण जैसे कवियों की रचनाओं से संस्कृत का साहित्यिक महत्त्व समझाया गया है। कवि उसे पुराने और सामान्य लोगों के जीवन की आशा कहता है। यहाँ भाषा, साहित्य और मानवीय प्रेरणा का सम्बन्ध मुख्य है।
स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे ।
गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे
तव संस्कृतिरेषा, सुन्दरसुरभाषा ॥ ३ ॥ — पद्यम् ३
पदच्छेदः – श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा ।
अन्वयः – हे ! श्रुतिसुखनिनदे ! सकलप्रमोदे ! स्मृतिहितवरदे ! सरसविनोदे ! गति-मति-प्रेरक-काव्यविशारदे ! तव एषा संस्कृतिः (अस्ति) । (त्वं) सुन्दरसुरभाषा (असि) ।
मौलिक हिन्दी भावार्थ: संस्कृत की मधुर ध्वनि, आनन्द, हितकारी ज्ञान, सरस विनोद और काव्य-कुशलता की प्रशंसा की गई है। गति और मति में अच्छे कर्म तथा सोच की प्रेरणा निहित है। संस्कृतिरेषा = संस्कृतिः एषा; कवि इन गुणों को उसकी संस्कृति कहता है।
वेदविषय-वेदान्त-विचारा ।
वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा
विजयते धरायां, सुन्दरसुरभाषा ॥ ४ ॥ — पद्यम् ४
पदच्छेदः – नवरस-रुचिरा अलङ्कृति-धारा वेदविषय-वेदान्त-विचारा । वैद्य-व्योम-शास्त्रादि-विहारा विजयते धरायाम् सुन्दरसुरभाषा ।
अन्वयः – नवरस-रुचिरा अलङ्कृतिधारा वेदविषयवेदान्तविचारा वैद्यव्योमशास्त्रादिविहारा धरायां सुन्दरसुरभाषा विजयते ।
मौलिक हिन्दी भावार्थ: कवि नौ रसों, अलङ्कारों, वेद-वेदान्त के विचारों और चिकित्सा व खगोल जैसे शास्त्रों के माध्यम से संस्कृत-साहित्य की समृद्धि बताता है। धरायां विजयते उसका गौरव व्यक्त करने वाली काव्यात्मक पंक्ति है। इससे सभी स्थानों पर उसका दैनिक प्रयोग होने का दावा नहीं निकलता।
सार (Hindi Summary)
‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ पाठ का आरम्भ एक रोचक संवाद से होता है। ओमिता नामक छात्रा अपनी सखी को बताती है कि आज श्रावणी पूर्णिमा है, और इसी दिन संस्कृत-दिवस मनाया जाता है, जिसे एक सप्ताह तक (संस्कृत-सप्ताह के रूप में) मनाया जाता है। उसके विद्यालय में अनेक विशिष्ट कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, जिनमें गीत-गायन-प्रतियोगिता भी सम्मिलित है। ओमिता उसमें भाग लेगी और अपनी सखी को भी निमन्त्रण देती है। इसी प्रसंग के साथ संस्कृतभाषा की महिमा का गीत आरम्भ होता है।
गीत के चार पद्यों में संस्कृत को बार-बार ‘सुन्दरसुरभाषा’ अर्थात् सुन्दर देवभाषा कहकर सम्बोधित किया गया है। प्रथम पद्य में संस्कृत को मुनियों द्वारा विकसित एवं कवियों द्वारा सुशोभित मनोहर ज्ञान-मञ्जूषा (पेटिका) कहा गया है, जिसकी पोषण-क्षमता वर्णन से परे है। दूसरे पद्य में बताया गया है कि यह वेदव्यास, वाल्मीकि जैसे मुनियों तथा कालिदास, बाणभट्ट जैसे कवियों एवं पौराणिक तथा सामान्य जनों के जीवन की आशा है। तीसरे पद्य में संस्कृत को कर्णप्रिय ध्वनि देने वाली, सबको आनन्दित करने वाली, स्मृति के लिए हितकारी, सरस विनोद देने वाली तथा काव्य में पारंगत संस्कृति की स्रोत-भाषा बताया गया है।
चौथे पद्य में संस्कृत को नवरसों से रुचिकर, अलंकारों को धारण करने वाली, वेद-वेदान्त के विचारों से युक्त तथा आयुर्वेद एवं खगोलशास्त्र आदि शास्त्रों में विचरण करने वाली भाषा कहा गया है। इन सभी विशेषताओं के कारण संस्कृतभाषा सम्पूर्ण धरती पर सर्वत्र विजयी होती है। संक्षेप में, यह पाठ संस्कृतभाषा के सौन्दर्य, गौरव एवं उसकी ज्ञान-समृद्धि का गुणगान करता है तथा छात्रों के मन में संस्कृत के प्रति प्रेम एवं आदर का भाव जगाता है।

शब्दार्थ (Word-meanings)
| शब्दः (Sanskrit) | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| विकसिता | विकसित की गई, विस्तारित | Progressively developed |
| विलसिता | आनन्द देने वाली, रञ्जित | That which gives joy |
| मञ्जुला | मन को हरने वाली, मनोहरा | Lovely / Charming |
| मञ्जूषा | पेटी, पेटिका | Box / Encasement |
| पोषणक्षमता | पोषण की क्षमता, पालन-शक्ति | Nurturing capacity |
| मे / मम | मेरे | Mine |
| अतीता | पार हो, अतिक्रान्त | Beyond |
| वृन्दानाम् | समूहों की | Of groups |
| नवम् | नई, नूतन | New |
| वचनातीता | वाणी से परे (वर्णन से परे) | Beyond words |
| भूयिष्ठानाम् | अधिकांश, अधिकतर की | Mostly / of most |
| श्रुतिसुखनिनदे | कर्णप्रिय ध्वनि देने वाली | (O one) whose sound is pleasant to listen |
| सकलप्रमोदे | सभी को आनन्द देने वाली | That which gives pleasure to all |
| सरसविनोदे | मधुर विनोद करने वाली | That which creates pleasant humour |
| काव्यविशारदे | काव्य में पारंगत | (O one) proficient in literature |
| रुचिरा | आनन्द प्रदान करने वाली, रुचिकर | That which gives happiness |
| अलङ्कृतिधारा | अलंकारों को धारण करने वाली | Well ornamented / bearing figures of speech |
| व्योमशास्त्रम् | अन्तरिक्ष-विज्ञान | Astronomy |
| धरायाम् | धरती पर, पृथ्वी पर | On earth |
| विजयते | विजयी होती है | Is victorious |
मातः, देवभाषा और धरायां विजयते गीत की साहित्यिक प्रशंसा हैं। माता का रूपक सभी भाषाओं की उत्पत्ति का प्रमाण नहीं है। एकपद उत्तर में एक शब्द ही लिखें।
अभ्यासः (अभ्यासात् जायते सिद्धिः)
1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तरं लिखत —
(क) सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता ?
(ख) संस्कृतभाषा कुत्र विजयते ?
(ग) संस्कृतभाषा कस्य आशा ?
(घ) संस्कृते कति रसाः सन्ति ?
(ङ) कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते ?
2. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत —
(क) संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति ?
(ख) केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति ?
(ग) कैः रसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते ?
(घ) संस्कृतभाषा केषु शास्त्रेषु विहरति ?
(ङ) संस्कृतभाषायाः कानि कानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि ?
3. रेखाङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
(मूल वाक्य में रेखांकित पद के आधार पर उपयुक्त प्रश्नवाचक पद लगाकर प्रश्न बनाइए। रेखांकित पद मोटे अक्षरों में हैं।)
| वाक्यम् | प्रश्ननिर्माणम् (उत्तर) |
|---|---|
| (क) मुनिगणाः संस्कृतभाषायाः विकासं कृतवन्तः । | मुनिगणाः कस्याः विकासं कृतवन्तः ? |
| (ख) सामान्यजनानां जीवनं काव्यैः प्रभावितम् अस्ति । | सामान्यजनानां जीवनं कैः प्रभावितम् अस्ति ? |
| (ग) कवयः अपि उपादेयानि काव्यानि रचितवन्तः । | कवयः अपि कानि रचितवन्तः ? |
| (घ) संस्कृतभाषा पृथिव्याम् विहरति । | संस्कृतभाषा कुत्र विहरति ? |
| (ङ) संस्कृतभाषा विविधभाषाः परिपोषयति । | संस्कृतभाषा काः परिपोषयति ? |
| (च) वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणि शास्त्राणि सन्ति । | वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणि कानि सन्ति ? |
4. अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं च लिखत —
यथा – मातः → सम्बोधनम्, एकवचनम् ।
| पदम् | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|
| तव | षष्ठी | एकवचनम् |
| मञ्जूषा | प्रथमा | एकवचनम् |
| संस्कृतिः | प्रथमा | एकवचनम् |
| जनानाम् | षष्ठी | बहुवचनम् |
| जीवनस्य | षष्ठी | एकवचनम् |
| धरायाम् | सप्तमी | एकवचनम् |
| शास्त्रेषु | सप्तमी | बहुवचनम् |
5. अधोलिखितानां पद्यांशानां यथायोग्यं मेलनं कुरुत —
| कवर्गः | खवर्गः (दत्त-विकल्पाः) |
|---|---|
| (क) अयि मातस्तव पोषणक्षमता | स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे |
| (ख) वेदव्यास-वाल्मीकि-मुनीनां | विजयते धरायाम् |
| (ग) पौराणिक-सामान्यजनानाम् | मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा |
| (घ) श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे | कालिदासबाणादिकवीनाम् |
| (ङ) वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा | जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा |
6. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां पदानाम् एकपदेन अर्थं (समासपदं) लिखत —
यथा – देवस्य आलयः = देवालयः ।
| विग्रहः | एकपदम् (समासः) – उत्तर |
|---|---|
| (क) सुराणां भाषा | सुरभाषा |
| (ख) सुन्दरी सुरभाषा | सुन्दरसुरभाषा |
| (ग) नवरसैः रुचिरा | नवरसरुचिरा |
| (घ) पोषणस्य क्षमता | पोषणक्षमता |
| (ङ) मञ्जुला भाषा | मञ्जुलभाषा |
7. पेटिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत —
पेटिका (शब्द-मञ्जूषा): कालिदासबाणादि, आशा, संस्कृतिः, विजयते, मम, वेदविषय, मञ्जुलमञ्जूषा, सकलप्रमोदे
8. अधोलिखितविकल्पेषु प्रसङ्गानुसारम् अर्थं चिनुत —
(क) “मञ्जुलमञ्जूषा” इत्यस्य अर्थः कः?
(i) कठोरभाषा
(ii) शोचनीया भाषा
(iii) मनोहररूपेण सकलिता
(iv) सामान्यभाषा
(ख) सुन्दरसुरभाषा केषां जीवनस्य आशा उच्यते?
(i) केवलं कवीनाम्
(ii) बालकानाम्
(iii) पौराणिक-सामान्यजनानाम्
(iv) छात्राणाम्
(ग) सुन्दरसुरभाषा कुत्र विजयते ?
(i) आकाशे
(ii) जलधौ
(iii) धरायाम्
(iv) पवने
(घ) सुन्दरसुरभाषायां किं नास्ति ?
(i) शास्त्रज्ञानम्
(ii) संस्कृतिः
(iii) वेदान्तचिन्तनम्
(iv) अशुद्धिः
(ङ) कविः सुन्दरसुरभाषां केन पदेन सम्बोधयति?
(i) पितः
(ii) मातः
(iii) भ्रातः
(iv) दातः
अत्र इदम् अवधेयम् (समास-तालिका)
पाठ में ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ के अन्तर्गत समास (compound) का परिचय दिया गया है। परस्पर सम्बद्ध सार्थक पदों के एकपदीभाव (एक पद में संक्षेप) को समास कहते हैं। प्रायः दो या दो से अधिक पदों के संक्षिप्तीकरण का नाम समास है।
| विग्रहः | समासः (एकपदम्) |
|---|---|
| नद्याः तीरम् | नदीतीरम् |
| राज्ञः पुत्रः | राजपुत्रः |
| सुराणां भाषा | सुरभाषा |
| पोषणस्य क्षमता | पोषणक्षमता |
| वचनम् अतीता | वचनातीता |
| नवसंख्याकाः रसाः | नवरसाः |
| नवरसैः रुचिरा | नवरसरुचिरा |
समासस्य प्रभेदाः (समास के भेद)
समास के विविध प्रभेद हैं – अव्ययीभावः, तत्पुरुषः, कर्मधारयः, द्विगुः, द्वन्द्वः, बहुव्रीहिः च ।
| समासः | लक्षणम् (विशेषता) | उदाहरणम् |
|---|---|---|
| अव्ययीभावः | प्रायः पूर्वम् अव्ययपदस्य प्रयोगः भवति | रूपस्य योग्यम् – अनुरूपम् |
| तत्पुरुषः | परपदस्य प्राधान्यं भवति | सुराणां भाषा – सुरभाषा |
| द्विगुः | पूर्वं संख्यावाचकपदस्य व्यवहारः भवति | पञ्चानां वटानां समाहारः – पञ्चवटी |
| बहुव्रीहिः | अन्यपदस्य प्राधान्यं भवति | पीतम् अम्बरं यस्य सः – पीताम्बरः (श्रीविष्णुः) |
अतिरिक्त समास-उदाहरण: कर्मधारय — नीलम् कमलम् → नीलकमलम्; द्वन्द्व — माता च पिता च → मातापितरौ। पुस्तक में छह नाम दिए हैं; ऊपर की तालिका में चार के उदाहरण हैं। उच्चतर व्याकरण में कर्मधारय और द्विगु तत्पुरुष के प्रकार भी माने जाते हैं।
योग्यताविस्तरः & परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरः – संस्कृतप्रशस्तयः
पाठ के अन्त में संस्कृत की महिमा का वर्णन करने वाली पाँच प्रशस्तियाँ (श्लोक) दी गई हैं:
भारतं मातृभूमिर्नो मातृभाषा हि संस्कृतम् ॥
२. भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा ।
विहाय संस्कृतं नास्ति संस्कृतिः संस्कृताश्रिता ॥
३. पुरुषाः संस्कृताः सन्तु महिलाः सन्तु संस्कृताः ।
संस्कृतेन विचारेण राष्ट्रं भातु सुसंस्कृतम् ॥
४. संस्कृतं संस्कृतेर्मूलं ज्ञानविज्ञानवारिधिः ।
वेदतत्त्वार्थसञ्जुष्टं लोकालोककरं शिवम् ॥
५. यावद् भारतवर्षं स्याद् यावद् विन्ध्यहिमाचलौ ।
यावद् गङ्गा च गोदा च तावदेव हि संस्कृतम् ॥
परियोजनाकार्यम् (Project Work)
1. संस्कृतेन जीवनं कथं समृद्धं भवेत् इति अधिकृत्य ‘सुन्दरसुरभाषा धरायां विजयते’ इति संस्कृतनाटिकया छात्राः जागरूकाः करणीयाः ।
2. सरलसंस्कृतगीतानां सङ्ग्रहं कुरुत कक्षायां च गायत ।
3. संस्कृतसाहित्ये प्रसिद्धानां कवीनां काव्यानां च सङ्ग्रहः करणीयः ।
परियोजना 1 — छोटी नाटिका का मौलिक नमूना
छात्रा १: अहं संस्कृतगीतं पठामि।
छात्रा २: गीतस्य अर्थः कः?
छात्रा १: संस्कृतभाषा ज्ञानस्य मञ्जूषा अस्ति।
छात्रा २: आवां मिलित्वा गीतं गायावः।
उभे: संस्कृताध्ययनेन अस्माकं ज्ञानं वर्धते।
यह खुली गतिविधि का नमूना है; समूह अपना संवाद और गीत चुन सकता है। सभी सहपाठियों की मातृभाषाओं का आदर रखें।
नीचे के अतिरिक्त प्रश्न और MCQ ClearStudy के अभ्यास हैं। पुस्तक के प्रश्न अभ्यास 1–8 में दिए हैं।
अतिरिक्त प्रश्न (Extra Questions)
अतिरिक्त लघु प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
1. इस पाठ में संस्कृतभाषा को बार-बार किस पद से सम्बोधित किया गया है और उसका क्या अर्थ है?
2. श्रावणी पूर्णिमा का पाठ में क्या वैशिष्ट्य बताया गया है?
3. प्रथम पद्य में संस्कृतभाषा को ‘मञ्जुलमञ्जूषा’ क्यों कहा गया है?
4. संस्कृत में कितने रस हैं? उनके नाम लिखिए।
5. समास किसे कहते हैं? इसके भेद लिखिए।
अतिरिक्त व्याख्यात्मक प्रश्न — ClearStudy अभ्यास
6. ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ पाठ में वर्णित संस्कृतभाषा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
7. संस्कृतभाषा को माता कहने का आशय पाठ के आधार पर समझाइए।
गीत में माता का सम्बोधन ज्ञान, शब्दसम्पदा और साहित्य द्वारा पोषण की क्षमता का रूपक है। मुनियों तथा कवियों की रचनाओं से भाषा को समृद्ध बताया गया है। इसे सभी भारतीय अथवा विश्व-भाषाओं की उत्पत्ति का भाषावैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं समझना चाहिए। साहित्यिक प्रशंसा का उत्तर देते समय गीत का आशय लिखें और सर्वभाषाओं की जननी जैसी निरपेक्ष घोषणा से बचें।
8. समास से क्या तात्पर्य है? उसके भेदों का उदाहरण सहित संक्षिप्त परिचय दीजिए।
MCQ & अभिकथन-कारण
1. यह पाठ किस विषय पर आधारित गीत है?
(क) मातृभूमि
(ख) संस्कृतभाषा की महिमा
(ग) प्रकृति
(घ) मित्रता
2. ‘सुरभाषा’ का अर्थ है—
(क) मीठी भाषा
(ख) देवभाषा
(ग) मातृभाषा
(घ) कठिन भाषा
3. श्रावणी पूर्णिमा के दिन कौन-सा दिवस मनाया जाता है?
(क) हिन्दी-दिवसः
(ख) शिक्षक-दिवसः
(ग) संस्कृत-दिवसः
(घ) गणतन्त्र-दिवसः
4. इस गीत में कुल कितने पद्य हैं?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छह
5. ‘मञ्जूषा’ शब्द का अर्थ है—
(क) पुष्प
(ख) पेटिका (पेटी)
(ग) नदी
(घ) वृक्ष
6. संस्कृत-साहित्य में कितने रस माने गए हैं?
(क) सात
(ख) आठ
(ग) नौ
(घ) दस
7. ‘व्योमशास्त्रम्’ का अर्थ है—
(क) चिकित्सा-विज्ञान
(ख) अन्तरिक्ष-विज्ञान (खगोलशास्त्र)
(ग) रसायन-विज्ञान
(घ) गणित
8. संस्कृतभाषा कहाँ विजयी होती है?
(क) आकाशे
(ख) जलधौ
(ग) धरायाम् (पृथ्वी पर)
(घ) पवने
9. ‘सुराणां भाषा’ का समासपद क्या है?
(क) सुरभाषा
(ख) भाषासुरा
(ग) सुरगण
(घ) देवभाषा
10. किस कवि को इस पाठ में संस्कृत-कवि के रूप में स्मरण किया गया है?
(क) तुलसीदास
(ख) कालिदास
(ग) सूरदास
(घ) कबीर
अभिकथन-कारण – नीचे अभिकथन (A) और कारण (R) दिए गए हैं। सही विकल्प चुनिए—
(क) A और R दोनों सही, R, A की सही व्याख्या है। (ख) A और R दोनों सही, पर R, A की सही व्याख्या नहीं। (ग) A सही, R गलत। (घ) A गलत, R सही।
1. अभिकथन (A): संस्कृत को ‘सुन्दरसुरभाषा’ कहा गया है।
कारण (R): ‘सुर’ का अर्थ देवता है, अतः संस्कृत देवभाषा मानी जाती है।
2. अभिकथन (A): गीत में कवि संस्कृत को माता कहकर उसकी पोषणक्षमता की प्रशंसा करता है।
कारण (R): माता-रूपक में ज्ञान और शब्दसम्पदा द्वारा पोषण का भाव व्यक्त किया गया है।
3. अभिकथन (A): ‘सुराणां भाषा = सुरभाषा’ तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
कारण (R): तत्पुरुष समास में पूर्वपद की प्रधानता होती है।
4. अभिकथन (A): संस्कृत-साहित्य नवरसों से समृद्ध है।
कारण (R): संस्कृत-काव्यशास्त्र में शृङ्गार, हास्य, करुण आदि नौ रस माने गए हैं।
5. अभिकथन (A): गीत में संस्कृत की प्रशंसा के लिए धरायां विजयते कहा गया है।
कारण (R): संस्कृत आयुर्वेद एवं खगोलशास्त्र आदि अनेक शास्त्रों में विद्यमान एवं उपयोगी है।
परीक्षा-सुझाव एवं सामान्य त्रुटियाँ
परीक्षा-सुझाव (Exam Tips)
- चारों पद्य कण्ठस्थ करें – मेलन, रिक्तस्थान-पूर्ति एवं भावार्थ के का अभ्यास इनसे किया जा सकता है।
- शब्दार्थ (मञ्जूषा, वचनातीता, सम्बोधनपद, धरायाम्, व्योमशास्त्रम् आदि) हिन्दी एवं अंग्रेज़ी दोनों में याद रखें।
- समास एवं उसके छह भेद उदाहरण सहित याद करें – विशेषतः तत्पुरुष (परपद-प्रधान) एवं बहुव्रीहि (अन्यपद-प्रधान)।
- ‘एकपदेन उत्तरम्’ में केवल एक शब्द तथा ‘पूर्णवाक्येन उत्तरम्’ में पूरा वाक्य लिखें।
- सभी सम्बोधनपद (मातः, श्रुतिसुखनिनदे, सकलप्रमोदे, स्मृतिहितवरदे, सरसविनोदे, काव्यविशारदे) सूची-रूप में याद रखें।
सामान्य त्रुटियाँ (Common Mistakes)
- तत्पुरुष समास में ‘पूर्वपद-प्रधान’ लिख देना – इसमें परपद की प्रधानता होती है।
- संस्कृत में रसों की संख्या आठ या दस बता देना – ये नौ (नवरस) हैं।
- मात्रा एवं संयुक्ताक्षर की अशुद्धि – मञ्जूषा, सुन्दरसुरभाषा, अलङ्कृतिधारा को शुद्ध लिखें।
- ‘धरायाम्’ को आकाश/जल मान लेना – इसका अर्थ ‘पृथ्वी पर’ है।
- सम्बोधनपद को कर्ता मान लेना – मातः, श्रुतिसुखनिनदे आदि सम्बोधन (आठवीं विभक्ति-तुल्य) पद हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
दीपकम् कक्षा 8 का पाठ 7 ‘मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा’ किस विषय पर है?
यह एक संस्कृत-गीत है जो संस्कृतभाषा की महिमा का गुणगान करता है। इसमें संस्कृत को बार-बार ‘सुन्दरसुरभाषा’ (सुन्दर देवभाषा) कहकर उसकी विशेषताएँ बताई गई हैं और कहा गया है कि संस्कृत सम्पूर्ण धरती पर विजयी होती है।
‘सुन्दरसुरभाषा’ का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – ‘सुन्दर देवभाषा’। ‘सुर’ का अर्थ देवता है, अतः ‘सुरभाषा’ का अर्थ देवभाषा (देववाणी) है। यह पद गीत में टेक के रूप में बार-बार आता है।
इस पाठ में समास के कितने भेद बताए गए हैं?
पाठ के ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ भाग में समास के छह भेद बताए गए हैं – अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वन्द्व एवं बहुव्रीहि। उदाहरण के लिए ‘सुराणां भाषा = सुरभाषा’ तत्पुरुष समास है।
पाठ्यपुस्तक संदर्भ: NCERT दीपकम्, कक्षा 8, पाठ 7, पृष्ठ 75–84; उपलब्ध प्रति का पुनर्मुद्रण 2026–27। उत्तर और व्याख्याएँ ClearStudy की मौलिक शिक्षण सामग्री हैं; खुली गतिविधियों के उत्तर नमूने हैं। आधिकारिक NCERT पुस्तक पोर्टल।
